महंगा हो सकता है लोन, बढ़ती महंगाई के बीच रेपो रेट में 0.25 की बढ़ोतरी कर सकता है RBI
mahendra india news, new delhi
मिडिल-ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढऩे से उत्पन्न हुए महंगाई के दबाव के बीच आरबीआई यानि भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर में रेपो दर में 0.25 फीसद की बढ़ोतरी कर सकता है। अर्थशास्त्रियों और बैंक अधिकारियों का मानना है पीटीआई द्वारा आयोजित 16 अर्थशास्त्रियों और सीनियर बैंक अधिकारियों के एक सर्वे के अनुसार अगर भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी रेपो रेट में बढ़ोतरी करती है, तो ये ब्याज दर नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत होगा। अर्थशास्त्रियों और बैंक अधिकारियों का मानना है
हालांकि, एक्सपर्ट्स का व्यापक रूप से मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में रेपो रेट में कम से कम 2 बार बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि कई एक्सपर्ट्स को पूरे वित्त वर्ष के दौरान 2 से 3 बार बढ़ोतरी की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति बढऩे के कारण आरबीआई को अपने मौद्रिक नीति रुख को धीरे-धीरे सामान्य करने की जरूरत हो सकती है।
फरवरी 2023 में बढ़ा था रेपो रेट
आपकी जानकारी के लिए ये भी बताते चलें कि रेपो रेट में अंतिम बार दिसंबर 2025 में कटौती की गई थी, इसके बाद से ही यह 5.25 फीसद पर स्थिर है। जबकि, रेपो दर में आखिरी बार फरवरी, 2023 में बढ़ोतरी की गई थी, जब आरबीआई ने रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद उसने 2023-24 के दौरान रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और फिर 2025 में कटौती का चक्र शुरू किया। इस समय आरबीआई का रेपो रेट 5.25 फीसद पर है।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कनिका पसरीचा ने कहा, विश्व के अलग-अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा दरों में बढ़ोतरी के साथ तालमेल बैठाने, बढ़ती महंगाई के जोखिम और मजबूत वृद्धि की रफ्तार ब्याज दरों को बढ़ाने के लिए नीतिगत गुंजाइश देती हैख्, क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि पिछली पॉलिसी के बाद से मुख्य रूप से पश्चिम एशिया संघर्ष के फिर से भडक़ने, ऊर्जा और जिंस की कीमतों में तेजी के कारण महंगाई का दबाव और ज्यादा बढ़ गया है। अगर ये दबाव जारी रहता है, तो आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद है।