सिरसा निवासी अभिनेता, लेखक और निर्देशक सचिन कथूरिया ने रचा इतिहास, एक ही फिल्म में निभाए 50 किरदार

 

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सिरसा निवासी अभिनेता, लेखक और निर्देशक सचिन कथूरिया ने अभिनय जगत में एक अनूठी उपलब्धि हासिल कर जिले का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। सचिन कथूरिया को एक ही फिल्म में 50 अलग-अलग किरदार निभाने के लिए एशिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिला है।

इस असाधारण उपलब्धि के लिए उन्हें ग्रैंड मास्टर की उपाधि से भी सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें उनकी हिंदी फिल्म ट्रैप: ए मैन विद 50 शेड्स के लिए मिला है। फिल्म की खास बात यह है कि इसका लेखन, निर्देशन और मुख्य अभिनय स्वयं सचिन कथूरिया ने किया है। एशिया बुक आॅफ रिकॉर्ड्स की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में बताया गया कि संपादकीय बोर्ड द्वारा गहन जांच और सत्यापन के बाद उनकी उपलब्धि को रिकॉर्ड के रूप में स्वीकार किया गया है।

यह रिकॉर्ड संस्था के आगामी संस्करण में प्रकाशित किया जाएगा। फिल्म में सचिन कथूरिया ने 50 अलग-अलग किरदारों को पर्दे पर जीवंत किया है। प्रत्येक किरदार की अलग पहचान, बॉडी लैंग्वेज, आवाज, हाव-भाव और व्यक्तित्व को उन्होंने बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। अभिनय की इस चुनौतीपूर्ण यात्रा ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा को नई पहचान दिलाई है।

फिल्म की कहानी एक व्यक्ति के बहुआयामी जीवन और उसके 50 अलग-अलग रूपों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म का निर्माण द स्क्रीन हंटर्स बैनर तले किया गया और इसे यूट्यूब चैनल द स्क्रीन हंटर्स पर आधिकारिक रूप से रिलीज किया गया। फिल्म को दर्शकों से भी सराहना मिली है। 7 सितंबर 1980 को जन्मे सचिन कथूरिया ने अपने करियर की शुरूआत थिएटर और शॉर्ट फिल्मों से की थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने निरंतर मेहनत, लगन और रचनात्मक सोच के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। आज वे अभिनेता, लेखक और निर्देशक के रूप में स्थापित नाम हैं।


हिंद का नापाक को जवाब में खराबुद्दिन का किरदार था, जिसे हनीप्रीत मारती हैं आखिर में और जत्थू इंजीनियर में विदेशों से जड़ी-बूटियां लेने आते हैं, जो वो किरदार था... जैक रिचर्ड्स का। सचिन कथूरिया ने बताया कि इसके अलावा हरियाणा के काफी सॉन्ग्स और फिल्म्स में एक्टर और डायरेक्टर के रूप में सफलतापूर्वक काम कर चुका हूं। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को दिया। उनकी यह उपलब्धि न केवल सिरसा, बल्कि पूरे हरियाणा के लिए गर्व का क्षण है।