हरियाणा प्रदेश की 17 हजार आशा वर्करों की जॉब होगी पक्की, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद जगी उम्मीद, प्रदर्शन किया स्थगित 

 
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हरियाणा प्रदेश की आशा वर्करों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। प्रदेश की हजारों आशा वर्करों ने  सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए अपनी जॉब पक्की करने का दबाव बढ़ा दिया है। प्रदेश के अंदर पिछले 21 वर्ष से आशा वर्कर कार्यरत हैं।

इस वक्त करीबन 20 हजार आशा वर्कर सेवाएं दे रही हैं, इनमें से करीबन 17 हजार की सेवाएं 10 वर्ष से अधिक अवधि की हो गई हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हरियाणा प्रदेश की आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की प्रधान सुनीता, उप प्रधान रानी, सह सचिव सुदेश व अनीता और राज्य कमेटी की सदस्य वंदना ने मंगलवार यानि 26 मई को स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव से मुलाकात कर अनुबंध आधार पर बरसों से काम कर रही आशा वर्करों को पक्का करने और तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

प्रदेश के अंदर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से संविदा आधार पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों को 2 दिन पहले ही हाई कोर्ट ने सुखद राहत दी है। जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने 104 याचिकाओं पर एक साथ निर्णय सुनाते हुए कहा था कि हरियाणा सरकार संविदा व्यवस्था की आड़ में कर्मचारियों का अनिश्चितकाल तक शोषण नहीं कर सकती।

इसमें कहा गया कि लंबे वक्त से लगातार सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का कार्य अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी प्रकृति का होता है। इसलिए उन्हें प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से नियमित किया जाना चाहिए और सभी सेवा लाभ दिए जाएं। एनएचएम केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य वित्तीय भार वहन करते हैं।

हरियाणा सरकार ने हालांकि अदालत के अंदर दलील दी थी कि नियमित पद स्वीकृत नहीं हैं और कोर्ट नियमितीकरण का आदेश देकर नए पद सृजित नहीं कर सकती, मगर हाई कोर्ट ने इन दलीलों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने कहा कि सालों तक लगातार सेवा लेना यह साबित करता है कि कार्य स्थायी प्रकृति का है। हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसला का हवाला देते हुए कहा कि यदि नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया से हुई हो, कर्मचारी योग्य हों और सालों तक बिना किसी कोर्ट के संरक्षण के सेवा दे रहे हों, तो प्रदेश उन्हें अनिश्चितकाल तक अस्थायी नहीं रख सकता।

हरियाणा प्रदेश की कैबिनेट मंत्री व स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने आशा वर्करों की इस मांग के प्रति सहमति जताई और मिशन महानिदेशक आरएस ढिल्लो को विभागीय कार्यवाही शुरू करने की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा गया। आशा वर्कर यूनियन की पदाधिकारी निदेशक से भी मिलीं।

उन्हें अवगत कराया गया कि 31 दिसंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक दस सालों की सेवाएं पूरी करने वाले सभी तरह के कर्मचारी-मजदूरों को नियमित किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के भरोसे से संतुष्ट होकर आशा वर्कर यूनियन ने 28 मई को रेवाड़ी में होने वाले प्रदर्शन को स्थगित कर दिया।

हरियाणा प्रदेश की आशा वर्कर यूनियन की प्रमुख मांगें
    मांग का विवरण 
वर्ष 2023 की 73 दिवसीय हड़ताल के दौरान काटे गए मानदेय का भुगतान करें
जननी सुरक्षा योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर के काटे हुए मानदेय को तुरंत बहाल/लागू किया जाए।
साल 2025 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1,500 रुपये की मानदेय बढ़ोतरी को एरियर सहित दिया जाए। 
आशा वर्कर्स को मानदेय सहित मेडिकल लीव और मैटरनिटी लीव   की सुविधा मिले।
सभी आशा वर्कर्स और उनके स्वजनों को हरियाणा सरकार के पैनल में शामिल अस्पतालों में फ्री /कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए।
पारदर्शिता के लिए हर माह सभी आशा वर्कर्स को उनके मानदेय भुगतान की स्लिप दी जाए।
पर्व के मौके पर सभी आशा वर्कर्स को पर्व भत्ता (बोनस) प्रदान किया जाए।