5 एकड़ में 62 किस्म की सब्जियां उगाकर SIRSA के गांव के किसान ने बदली खेती की तस्वीर

 

MAHENDRA INDIA NEWS, NEW DELHI
खेती में प्रयोग और बाजार की मांग की समझ हो तो छोटी जोत भी बेहतर आमदनी का आधार बन सकती है। गांव मत्तड़ के प्रगतिशील किसान गुरप्रीत सिंह पुत्र गुरबचन सिंह ने पांच एकड़ में एक साथ अलग-अलग मौसम की करीब 62 किस्म की सब्जियां उगाकर इसका उदाहरण प्रस्तुत किया है। परंपरागत धान-गेहूं की खेती से हटकर उन्होंने बागवानी आधारित विविध खेती को अपनाया और खेत को पूरे वर्ष उत्पादन देने वाली इकाई में बदल दिया। अब वे विदेशी एवं विशेष किस्म की सब्जियों की खेती कर रहे हैं और अपनी उपज चंडीगढ़, दिल्ली व लुधियाना की सब्जी मंडियों तक पहुंचा रहे हैं। किसान के अनुसार उन्हें सालाना प्रति एकड़ तीन से चार लाख रुपये से अधिक की बचत हो रही है। गुरप्रीत सिंह ने अपनी पांच एकड़ जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग सब्जियों की खेती शुरू की। उनके खेत में लीक, सेलेरी, चेरी टमाटर, रंग-बिरंगी गोभी, घेरकिन खीरा और रंगीन शिमला मिर्च जैसी सब्जियां उगाई जा रही हैं। अलग-अलग फसलों की बुवाई और तुड़ाई का समय अलग होने से खेत में पूरे साल उत्पादन का सिलसिला बना रहता है।



15 से 20 दिन के अंतराल पर नई बुवाई
किसान के अनुसार एक ही समय पर पूरी जमीन में एक फसल लगाने के बजाय वे चरणबद्ध तरीके से खेती करते हैं। करीब 15 से 20 दिन के अंतराल पर नई बुवाई करने से अलग-अलग समय पर फसल तैयार होती रहती है। इससे बाजार में लगातार सब्जी भेजने का अवसर मिलता है और किसी एक फसल पर निर्भरता भी कम होती है। गुरप्रीत सिंह ने बताया कि विदेशी और विशेष किस्म की सब्जियों की मांग सामान्य सब्जियों से अलग बाजार में है। उनके अनुसार चेरी टमाटर को होटल और कंपनियों तक पहुंचाने पर बेहतर भाव मिलता है। रंगीन गोभी और घेरकिन खीरे की भी विशेष मांग रहती है। उनका कहना है कि फसल लगाने से पहले बाजार तलाशना और खरीदार से संपर्क करना इस खेती में बेहद जरूरी है।



पांच एकड़ से 10 से 12 लाख रुपये शुद्ध आमदनी का दावा
गुरप्रीत सिंह के अनुसार पहले पांच एकड़ में धान-गेहूं की खेती से सालभर में करीब दो से ढाई लाख रुपये की बचत होती थी। विविध सब्जी उत्पादन अपनाने के बाद उनका दावा है कि सभी खर्च निकालने के पश्चात 10 से 12 लाख रुपये सालाना शुद्ध मुनाफा हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस खेती में पानी की खपत परंपरागत खेती की तुलना में करीब 70 प्रतिशत तक कम हुई है।



पहले बाजार, फिर बीज का करें चयन
किसान गुरप्रीत सिंह का कहना है कि नई तरह की खेती शुरू करने वाले किसानों को एकदम बड़े स्तर पर जोखिम लेने के बजाय पहले एक कनाल या छोटे क्षेत्र में प्रयोग करना चाहिए। बाजार में किस सब्जी की मांग है, खरीदार कौन है और किस समय बेहतर भाव मिल सकता है, इसकी जानकारी लेने के बाद ही बीज और फसल का चयन करना चाहिए। उनके अनुसार कंपनियों, होटलों और सीधे खरीदारों से संपर्क होने पर किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिल सकता है। मत्तड़ के इस किसान का प्रयोग यह संदेश देता है कि खेती में फसल विविधीकरण, बाजार की समझ और चरणबद्ध उत्पादन को अपनाकर छोटी जोत को भी सालभर आय देने वाले मॉडल में बदला जा सकता है।