SIRSA के सुरखाब प्लेस में हुआ भव्य रूहानी सत्संग,  मोह-माया के जाल में फंसकर इंसान असली मकसद भूला: संत बिरेन्द्र सिंह

 

Mahendra india news, new delhi
SIRSA डेरा जगमालवाली के संत बिरेन्द्र सिंह ने सिरसा के निजी पैलेस में आयोजित विशाल रूहानी सत्संग के दौरान संगत को आत्मिक शांति और प्रभु भक्ति का मार्ग दिखाया। सिरसा सेवा समिति द्वारा आयोजित इस समागम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु अपने मुर्शिद के अनमोल वचनों को सुनने पहुंचे। पूरा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। संत जी ने आगाह करते हुए कहा, किस गफलत में पड़कर सो गया, समय बीत गई तेरी। जागो मुसाफिर सोवन वाले, मौत इशारा दे रही। 

A grand spiritual satsang was held at Surkhab Place in Sirsa, trapped in the web of illusion, man forgot his real purpose: Sant Birendra Singh

उन्होंने समझाया कि इंसान इस दुनिया में मुसाफिर की तरह है, लेकिन वह यहां के मोह-माया के जाल में फंसकर अपना असली मकसद भूल गया है। उन्होंने कहा कि परमात्मा किसी पहाड़, जंगल या अन्य  स्थान पर नहीं, बल्कि इंसान के अपने शरीर रूपी मंदिर के भीतर बैठा है। उन्होंने कबीर साहब और अन्य संतों का उदाहरण देते हुए कहा कि सतगुरु  केवल 'सिमरन'  (मेडिटेशन) और ध्यान लगाने से ही प्राप्त होता है।

उन्होंने कहा कि संत किसी खास धर्म, जाति या कबीले के लिए नहीं आते, बल्कि पूरी मानवता को एक नूर से उपजा हुआ मानते हैं। संतों का उद्देश्य धर्मों के झगड़े करवाना नहीं, बल्कि सोई हुई आत्मा को जगाना है। संत जी ने जीवन जीने का सूत्र देते हुए कहा कि यदि जीवन में शांति चाहिए तो दूसरों को माफ करना सीखो। बदले की भावना विनाश की ओर ले जाती है, जबकि दयालुता और क्षमा ही आत्मा का विकास करती है।

उन्होंने समझाया कि जैसे बीमारी के इलाज के लिए मौके के डॉक्टर की जरूरत होती है, वैसे ही रूहानी सफर के लिए 'वक्त के गुरु' की शरण जरूरी है, तभी चौरासी लाख योनियों के बंधन से मुक्ति मिल सकती है।
     सत्संग के दौरान सिरसा सेवा समिति के सेवादारों ने व्यवस्था संभालने में अभूतपूर्व योगदान दिया। आने वाली संगत के लिए अटूट लंगर का विशेष प्रबंध था। सत्संग की समाप्ति के बाद देर रात तक संगत ने लाइन में लगकर महाराज जी के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण किया।