पन्नीवाला रूलदु स्थित ई20 इथेनॉल फैक्ट्री में एग्रीकल्चर ग्रेड 45 किलो तथा बिना मार्के के 50 किलो में यूरिया खाद का मिला जखीरा
mahendra india news, new delhi
सिरसा। भारतीय किसान एकता (बीकेई) के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने जानकारी देते हुए बताया कि किसानों के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध करवाई जाने वाली एग्रीकल्चर ग्रेड (नीम-कोटेड) यूरिया सीधे 45 किलो पैकिंग के गट्टे दूसरा इसी खाद को फर्जी तरीके से टेक्निकल ग्रेड मार्के वाले गट्टों में भरकर गांव पन्नीवाला रूलदु (डबवाली) स्थित ई-20 ग्रीन फ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में प्रयोग की जा रही थी। भारतीय किसान एकता ने पूरे मामले की लिखित शिकायत उप कृषि निदेशक, सिरसा को भेजी।
शिकायत के आधार पर कृषि विभाग की टीम गुण नियंत्रण अधिकारी अमित कुमार, एपीपीओ विजेंद्र चौहान, एसडीओ अमित कुमार डबवाली ई-20 ग्रीन फ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड पहुंची उनके साथ बीकेई टीम से प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली, लीला साहूवाला, गुरप्रीत सिंह खालसा, जसवीर सिंह चोरमार, गुरजिंदर सिंह चोरमार, खुशदीप सिंह हैबुआना, इकबाल सिंह सरां, सोनू पनीवाला रूलदु भी शामिल थे। कृषि विभाग की टीम ने फैक्ट्री के अधिकारियों से यूरिया खाद से संबंधित मांगे गए, लेकिन वह पूरे दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए।
यूरिया खाद की स्टोर में कई तरह के गट्टे पड़े हुए थे। विभाग ने फैक्ट्री संचालकों से कहा कि सारे गेट अलग-अलग करके लगाए, ताकि हमें पता चले कौन से मार्के के कितने गट्टे हैं, लेकिन फैक्ट्री संचालकों ने इस काम के लिए ना तो कोई कागजात दिए और ना ही मजदूर दिए तत्पश्चात कृषि विभाग ने बाहर से लेबर मंगवा गट्टे अलग-अलग लगवा कर उनकी गिनती की तथा पुलिस की मौजूदगी में जांच के लिए सैंपल लिए गए। औलख ने बताया कि मौके पर मिले 50 किलोग्राम के गट्टों पर निर्माता कंपनी का नाम, अधिकतम खुदरा मूल्य (एम आर पी), बैच नंबर तथा अन्य आवश्यक विवरण अंकित नहीं थे। अलग-अलग तरह के फर्जी मार्के लगाए हुए थे किसान नेताओं ने मांग पर संबंधित फैक्ट्री प्रबंधन एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई जा रही है। लखविंदर सिंह औलख ने कहा कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार यह सामग्री शुभम इंटरनेशनल, संत नगर, बुराड़ी, दिल्ली से बिल की गई तथा झुंझुनू (राजस्थान) से भेजी गई है। दस्तावेजों में 25,000 किलोग्राम, का बिल लगभग 18.50 प्रति किलोग्राम (925 प्रति 50 किलोग्राम, 18 प्रतिशत जीएसटी अतिरिक्त) दर्शाया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर जो सामग्री दिखाई गई, वह दस्तावेजों में दर्शाए गए टेक्निकल ग्रेड उत्पाद से मेल नहीं खाती। उन्होंने मांग की कि बिल, माल, पैकिंग, गुणवत्ता तथा आपूर्ति श्रृंखला की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच कराई जाए, ताकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता या फजीर्वाड़ा हुआ है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सके। औलख ने कहा कि फैक्ट्री से नीम कोटेड 45 किलो वाले पीले गट्टे भी मिले, जो किसानों को सब्सिडी के साथ 266.50 रुपए में दी जाती है बीकेई प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया का औद्योगिक उपयोग किया जा रहा है, इसीलिए किसानों को खाद की उपलब्धता प्रभावित हो रही है तथा सरकारी सब्सिडी का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि बहु करोड़ी यूरिया खाद घोटाला की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से करवाई जाए,
क्योंकि इसमें कई राज्यों के यूरिया खाद के स्मगलर जुड़े हुए हैं, जो की किसानों के हक की नियम को यूरिया के साथ-साथ जीएसटी की भी करोड़ों रुपए की चोरी कर रहे हैं। कृषि विभाग की अनथक मेहनत तथा बीकेई टीम के सहयोग से 7 जुलाई दोपहर 1: 15 बजे से लेकर 8 जुलाई सुबह 4:45 बजे तक 15.30 घंटे करवाई चली, फैक्ट्री के मालिक हरी ग्रोवर फैक्ट्री में मौजूद होने की बावजूद भी कृषि विभाग की टीम का सहयोग नहीं किया। इस संबंधी सदर थाना डबवाली में (एफआईआर नंबर 0233) केस दर्ज किया गया है।