पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा से महिला सशक्तिकरण की अनोखी मिसाल
mahendra india news, new delhi
सिरसा। महिला सशक्तिकरण की बातें अक्सर मंचों और भाषणों में सुनने को मिलती हैं, लेकिन सिरसा की ग्रामीण पृष्ठभूमि में डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा से संचालित एक शिक्षण संस्थान में यह विचार व्यवहारिक रूप में दिखाई देता है। यहां पियन से लेकर प्रिंसिपल और सुरक्षा गार्ड से लेकर खेल प्रशिक्षक तक हर जिम्मेदारी महिलाएं ही निभा रही हैं, जिससे बेटियों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा मिल रही है। इस संस्थान का नाम शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल व शाह सतनाम जी गर्ल्स कॉलेज है। आज 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इन शिक्षण संस्थानों में महिला सशक्तिकरण की एक अलग ही तस्वीर देखने को मिलती है। यहां महिलाओं को हर स्तर पर जिम्मेदारी निभाने का अवसर दिया गया है और पूरा स्टाफ महिलाओं का है, जो बेटियों को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।
संस्थान प्रबंधन का मानना है कि बेटियों की शिक्षा के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसी सोच के तहत यहां हर स्तर पर महिलाओं को जिम्मेदारी देकर उन्हें नेतृत्व का अवसर दिया गया है। इससे छात्राओं को भी यह संदेश मिलता है कि महिलाएं हर क्षेत्र में सक्षम हैं और किसी भी जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभा सकती हैं। संस्थान में बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए ऐसा वातावरण तैयार किया गया है, जहां लगभग हर जिम्मेदारी महिलाएं ही संभाल रही हैं। संस्थान प्रबंधन भविष्य में एक और पहल की तैयारी भी कर रहा है।
जल्द ही स्कूल बसों के लिए महिला ड्राइवरों की भर्ती की जाएगी, ताकि परिवहन व्यवस्था में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सके। महिला दिवस के अवसर पर यह संस्थान इस बात का उदाहरण बनकर सामने आया है कि यदि महिलाओं को अवसर और विश्वास दिया जाए तो वे हर जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकती हैं। शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के इस मॉडल से ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिल रही है।
- संस्थान में हर जिम्मेदारी संभाल रहीं महिलाएं
संस्थान में न केवल शिक्षिकाएं और गैर-शिक्षण स्टाफ महिलाएं हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था, बिजली मिस्त्री, प्लंबर, स्कूल बसों में कंडक्टर, फोटोग्राफर और खेल प्रशिक्षक तक की जिम्मेदारी भी महिलाएं निभा रही हैं। इससे छात्राओं को सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरा माहौल मिलता है। संस्थान में वर्तमान में कोई भी पुरुष कर्मचारी कार्यरत नहीं है, जो इसे एक अलग पहचान देता है।
- लड़कियों के लिए अलग एमएसजी भारतीय खेल गांव
खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए संस्थान परिसर में लड़कियों के लिए अलग से खेल गांव बनाया गया है, जिसे एमएसजी भारतीय खेल गांव का नाम दिया गया है। यहां छात्राएं विभिन्न खेलों का अभ्यास करती हैं। खास बात यह है कि इस खेल परिसर में किसी भी पुरुष खिलाड़ी या प्रशिक्षक की एंट्री नहीं होती। इससे छात्राओं को पूरी स्वतंत्रता और सहजता के साथ खेल गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलता है। शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल और शाह सतनाम जी गर्ल्स कॉलेज ने देश और प्रदेश को कई खेलों में मेडल दिलाकर गौरवान्वित किया है। इसके अलावा यहां की पांच छात्राओं को प्रदेश का सर्वोच्च खेल सम्मान भीम अवार्ड भी मिल चुका है।
- सेना और पुलिस से सेवानिवृत्त महिलाएं संभाल रहीं सुरक्षा
स्कूल के मुख्य द्वार पर सुरक्षा गार्ड के रूप में भारतीय सेना और पुलिस से सेवानिवृत्त महिला जवान सेवाएं दे रही हैं। इसके अलावा स्कूल में म्यूजिक सिस्टम संचालन, अकाउंट संबंधी कार्य और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी महिलाओं के हाथों में हैं।
पापा कोच पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल व कॉलेज की स्थापना कर और यहां तमाम जिम्मेदारियां महिलाओं के हाथों में सौंपकर महिला सशक्तिकरण का संजीव उदाहरण पेश किया है। जहां कथनी और करनी एक समान है। पूज्य गुरु जी के आशीर्वाद से स्कूल पूरे प्रदेश में शिक्षा और खेलों के क्षेत्र में अव्वल है। यहां प्रत्येक कार्य महिलाओं के द्वारा बिना पुरुषों की सहायता से पूर्ण किया जाता है। चाहे शैक्षणिक हो और चाहे खेलकूद, हर क्षेत्र में संस्थान ने अलग पहचान बनाई है।
- शीला पूनिया इन्सां, प्रिंसीपल शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल ििसरसा।