सीडीएलयू SIRSA में विभिन्न पदों पर अतिरिक्त दायित्व सौंपे गए

 

mahendra india news, new delhi
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार द्वारा शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों के सुचारु संचालन हेतु चार प्रोफेसर  को अतिरिक्त दायित्व सौंपे गए हैं। इस संबंध में कुलसचिव डॉ सुनील कुमार द्वारा अधिसूचना जारी की गई है।  
जैव प्रौद्योगिकी विभाग की प्रो. प्रियंका सिवाच को निदेशक, सेंटर फॉर लाइफ स्किल्स का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। वहीं शारीरिक शिक्षा विभाग की प्रो. मोनिका वर्मा को मुख्य सतर्कता अधिकारी का अतिरिक्त दायित्व प्रदान किया गया है।


इसके अतिरिक्त जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. राज कुमार सलार को प्रॉक्टर का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। इसी क्रम में वाणिज्य विभाग के प्रो. शैलेन्द्र सिंह को निदेशक, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल का अतिरिक्त दायित्व प्रदान किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नवनियुक्त दायित्व धारकों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि वे अपने अनुभव एवं दक्षता से विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।



उल्लेखनीय है कि प्रो. प्रियंका सिवाच जैव प्रौद्योगिकी विभाग में प्रोफेसर हैं। उन्हें 24 वर्षों से अधिक का विश्वविद्यालय स्तर का अध्यापन एवं शोध अनुभव प्राप्त है। वे पूर्व में डीन, फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंसेज, डीन रिसर्च , विभागाध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग, कन्वीनर, महिला शिकायत समिति तथा नोडल अधिकारी, बौद्धिक संपदा अधिकार  जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन कर चुकी हैं। प्रो. सिवाच का शोध क्षेत्र प्लांट बायोटेक्नोलॉजी, जीनोमिक्स एवं मॉलिक्यूलर प्लांट वाइरोलॉजी है। उनके नाम 80 से अधिक शोध एवं समीक्षा लेख प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। उन्होंने 9 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की है तथा 7 शोधार्थी वर्तमान में पीएचडी. कर रहे हैं। वे UGC, नई दिल्ली द्वारा वित्तपोषित दो प्रमुख शोध परियोजनाएँ सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुकी हैं तथा उनके नाम एक भारतीय पेटेंट भी स्वीकृत है। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए उन्हें महिला वैज्ञानिक रजत जयंती स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। जीवन कौशल विकास के क्षेत्र में वे एक आईसीएफ प्रमाणित लाइफ कोच के रूप में विद्यार्थियों को नियमित रूप से मार्गदर्शन भी प्रदान करती हैं।
 


प्रो. मोनिका वर्मा वर्तमान में खेल परिषद की अध्यक्ष, शारीरिक शिक्षा विभाग की अध्यक्ष, इतिहास विभाग की अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय पुस्तकालय अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने शिक्षण और शोध जीवन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अब तक वे 18 पीएच.डी. तथा 17 एम.फिल. शोधार्थियों का निर्देशन कर चुकी हैं। उनके नाम 14 पुस्तकें एवं 41 शोध-पत्रों का प्रकाशन है। स्ट्रेंथ एंड फ्लेक्सिबिलिटी बॉडी वेट ट्रेनिंग गाइड के नाम से पेटेंट भी है।
प्रो. मोनिका इससे पूर्व भी विश्वविद्यालय में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं जिनमें कुलसचिव (अतिरिक्त कार्यभार), दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय की निदेशक, शिक्षा विभागाध्यक्ष, शिक्षा संकाय की अधिष्ठाता, महिला शिकायत समिति की सचिव, शोध संकाय की अधिष्ठाता, तथा मुख्य अधीक्षक प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त वे यूजीसी नेट परीक्षा (दिसंबर 2014 एवं जून 2015) तथा एआईयू (भारतीय विश्वविद्यालय संघ) की ऑब्जर्वर भी रह चुकी हैं।

 प्रो. सालार का जैव प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में योगदान विश्वविद्यालय की समाजोपयोगी और प्रभावशाली शोध प्रतिबद्धता को दर्शाता है।अपने शैक्षणिक करियर में प्रो. सालार ने 11 पीएचडी. शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है, 6 पुस्तकें लिखी हैं, और 100 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। प्रो. सालार को स्कॉलर जीपीएस द्वारा जारी नवीनतम रैंकिंग में विश्व के शीर्ष शोधकर्ताओं में स्थान प्राप्त हुआ है। उन्हें वैश्विक स्तर पर शीर्ष 2.74% विद्वानों में स्थान प्राप्त किया है। उन्हें कृषि और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में 2.86% और कृषि जैव प्रौद्योगिकी के विशेष क्षेत्र में 0.7% की उत्कृष्ट रैंकिंग प्राप्त हुई है। प्रो. सालार ने जापान, नॉर्वे, स्लोवाक गणराज्य और ऑस्ट्रिया सहित कई देशों की शैक्षणिक यात्राएं की हैं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया है।

प्रो. शैलेंद्र सिंह वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर, वर्तमान में डीन, फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट तथा विभागाध्यक्ष, वाणिज्य विभाग के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में 18 वर्ष से अधिक का अध्यापन अनुभव प्राप्त है।प्रो. शैलेंद्र सिंह के नाम 38 शोध पत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। उन्होंने अब तक 10 शोधार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान कराई है तथा अनेक एम.फिल. शोध कार्यों का सफल निर्देशन किया है। उनका शोध क्षेत्र लेखांकन, जीवन बीमा, वित्तीय प्रबंधन एवं कॉरपोरेट गवर्नेंस से संबंधित है। उनका अकादमिक एवं प्रशासनिक अनुभव विश्वविद्यालय के गुणवत्ता संवर्धन, शोध संस्कृति एवं संस्थागत विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है।