अखिल भारतीय किसान सभा ने की किसान नेताओं को नोटिस भेजने की निंदा

 

mahendra india news, new delhi
सिरसा। अखिल भारतीय किसान सभा के जिला संयोजक हमजिंदर ने दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान हिसार से किसान नेता संदीप धीरनवास एवं अन्य दर्जनों किसानों पर हत्या समेत अन्य संगीन धाराओं में दर्ज मुकदमों में किसान नेताओं की गिरफ्तारियों के नोटिस जारी करने की कड़ी निंदा की है। किसान आंदोलन के निलंबन पर केंद्र और हरियाणा सरकार ने पिछले सभी मुकदमों को खारिज करने का लिखित आदेश दिया था और अब गिरफ्तारियों के नोटिस जारी कर किसान आंदोलन से विश्वासघात किया जा रहा है।

जिसके पीछे सरकार की असल मंशा किसानों की आवाज कुचलने की है। प्रेस बयान जारी करते हुए किसान सभा के जिला संयोजक हमजिंदर सिंह सिद्धु ने बताया कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ साल 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान अपनी जायज मांगों को लेकर किसानों ने अनेक स्थानों पर प्रदर्शन किए थे। जिसके निलंबन के दौरान केंद्र और राज्य सरकार ने कृषि कानूनों को वापिस लिया और किसानों पर आंदोलन के दौरान के दर्ज तमाम मुकदमों को खारिज करने का लिखित आदेश दिया था,

लेकिन आंदोलन के बाद सरकार और प्रशासन समय समय पर आंदोलन के दौरान के मुकदमों को निकाल कर किसान आंदोलन के नेताओं को नोटिस देते हुए सम्मन भेजे जा रहे हैं। अभी इस पिछले प्रदर्शन के मामले में चार साल बाद  मंत्री रणबीर गंगवा के आवास के बाहर के प्रदर्शन के मामले में किसान सभा के तहसील अध्यक्ष संदीप धीरणवास, किसान नेता अनिल गोरछी, मनजीत, अमित बिश्नोई, बिसला, सतीश लौरा, राजेश भाकर, अमित समेत अन्य दर्जनों किसानों के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं। सरकार और प्रशासन कोर्ट कार्यवाहियों का हवाला देकर किसानों की आवाजों को कुचलना चाहती है। असल में सरकार और प्रशासन किसानों को डराना चाहते हैं, ताकि किसानों के मुद्दों पर होने वाले आंदोलनों को कुचला जा सके।

अखिल भारतीय किसान सभा हरियाणा सरकार और प्रशासन के किसानों की आवाज को दबाने वाले इस तरह के मुकदमों का कड़ा विरोध करती है और प्रशासन एवं सरकार से उनके वायदे के मुताबिक तमाम मुकदमों को खारिज करने की मांग करती है अन्यथा किसान
सड़कों पर उतरेंगे और आंदोलन को मजबूर होंगे।