दलित गरीब परिवारों से प्लॉटों के मालिकाना हक के नाम पर अवैध वसूली के आरोप
mahendra india news, new delhi
सिरसा ग्राम ख्योंवाली, खण्ड ओढ़ां, जिला सिरसा में दलित समाज के गरीब परिवारों को वर्ष 1999 में ग्राम पंचायत के प्रस्ताव संख्या 16 दिनांक 02.10.1999 के तहत लगभग 295 परिवारों को तीन-तीन मरले (लगभग 100 वर्गगज) के आवासीय प्लॉट आवंटित किए गए थे। आरोप है कि इन प्लॉटों की आज तक रजिस्ट्री नहीं हुई थी, जिसके कारण लाभार्थी परिवारों को अनेक सरकारी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। पूर्व सरपंच रीना बिरट का आरोप है कि हरियाणा सरकार द्वारा पंचायत भूमि पर पात्र गरीब परिवारों को 500 वर्गगज तक भूमि का मालिकाना हक देने की योजना लागू किए जाने के बाद खण्ड कार्यालय ओढां के अधिकारियों और ग्राम पंचायत की मिलीभगत से लाभार्थियों से प्रति परिवार अवैध वसूली की गई।
उनका कहना है कि अधिकांश लोगों को इस राशि की कोई रसीद नहीं दी गई तथा उन्हें यह कहकर डराया गया कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो उनके मकानों की रजिस्ट्री नहीं करवाई जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों के मकान जोहड़, गली अथवा अन्य विवादित स्थानों पर स्थित हैं, उनसे भी 2,500 लिए गए। जबकि उन लोगों के लिए सरकार के कोई निर्देश जारी नहीं किए गये हंै।
इस योजना की पहली समय-सीमा समाप्त हो जाने के बाद लाभार्थियों को कोई राहत नहीं मिली। बाद में राज्य सरकार द्वारा आवेदन लेने के लिए योजना को पुन: खोला गया, लेकिन इसके बावजूद पात्र लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। जब खण्ड कार्यालय आंढां ने इन लोगों से फीस ली है तो उनकी जिम्मेदारी है कि इनकी फाईल को तैयार करवाकर आगे भेजे और मालिकाना हक दिलवाये। रीना बिरट के अनुसार उन्होंने इस मामले की शिकायत वित्तायुक्त राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार सहित अन्य मंचों पर की। इसके बाद वित्तायुक्त राजस्व एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव के स्तर से अतिरिक्त मुख्य सचिव, पंचायती राज विभाग को पत्र क्रमांक 1638-स्टर-4-2026/3640 दिनांक 15.06.2026 के माध्यम से जांच कराने के निर्देश जारी किए गए। पूर्व सरपंच का कहना है कि जांच के सिलसिले में उन्हें 8 जुलाई 2026 को खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ), औढ़ा कार्यालय में बुलाया गया, जहां उनसे कथित अवैध वसूली के संबंध में प्रभावित लोगों के शपथपत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा गया।
ताकि इस मामले को भी अनुसुचित जाति धर्मशाला पर कब्जा करनवाने, अवैध निर्माण व तोड़फोड़ की तरह लटकाया जा सके। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि ग्राम सभा आयोजित कर अथवा गांव में जाकर स्वतंत्र रूप से जांच की जाए, ताकि लोग बिना किसी भय या दबाव के अपने बयान दे सकें, लेकिन उनका आरोप है कि यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि शिकायत सामने आने के बाद कुछ लाभार्थियों पर दबाव बनाया गया कि यदि किसी ने शिकायत या शपथपत्र दिया तो उनके मकानों की रजिस्ट्री नहीं होने दी जाएगी। इतना ही नहीं, उपायुक्त कार्यालय से उनकी फाइल भी पास नहीं होने देने की धमकी दी गई। उनका यह भी दावा है कि शिकायत के बाद कुछ लोगों को कथित रूप से ली गई राशि वापस कर दी गई है। रीना बिरट ने बताया कि उन्हें खण्ड कार्यालय ओढां का पत्र क्रमांक 9108 दिनांक 08.07.2026 प्राप्त हुआ है,
जिसमें प्रभावित व्यक्तियों को खण्ड कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बीडीपीओ, ओढां की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनकी निष्पक्षता संदेह के घेरे में है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गांव में सार्वजनिक गली पर कथित अतिक्रमण संबंधी शिकायत सीएमओ आॅफ/एन/2026/008877 को वास्तविक तथ्यों के बजाय पेड़ गिरने की रिपोर्ट के आधार पर बंद कर दिया गया। उनका आरोप है कि निशानदेही एवं नोटिस की कार्रवाई होने के बावजूद अतिक्रमण हटाने की प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तथा कब्जाधारियों को संरक्षण देते हुए उन्हें न्यायालय जाने की सलाह दी गई, जिससे कार्रवाई लंबित हो गई। उनका कहना है कि न्यायालय से कोई स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त नहीं होने के बावजूद प्रशासन द्वारा आगे की कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत को पुन: खोलने के लिए आवेदन देने के बावजूद उसे दोबारा प्रारंभ नहीं किया गया। गांव ख्योंवाली में अनुसुचित जाति के लोगों को हर योजना से वंचित किया जाता आ रहा है। पूर्व सरपंच ने कहा कि यदि किसी सरकारी योजना के नाम पर गरीब एवं अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों से अवैध वसूली की गई है उसकी निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।