गुरु-शिष्य परंपरा योजना 2026-27 के लिए लोक कलाओं एवं पारंपरिक विधाओं में आवेदन आमंत्रित
 

 
 mahendra indianews  
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज के माध्यम से संचालित “गुरु-शिष्य परंपरा योजना” वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न लोक कलाओं एवं पारंपरिक विधाओं में आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लुप्तप्राय लोक कलाओं और दुर्लभ पारंपरिक विधाओं का संरक्षण एवं संवर्धन करना है।

योजना के अंतर्गत लोकगायन, लोकनाट्य, लोक चित्रकला, दुर्लभ वाद्ययंत्र तथा लोक नृत्यों जैसी विधाओं में अनुभवी कलाकारों से आवेदन मांगे गए हैं। सरकार का प्रयास है कि पारंपरिक कला विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाकर उन्हें संरक्षित किया जाए, ताकि देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिल सके।

योजना के लिए निर्धारित पात्रता के अनुसार आवेदक की आयु 50 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। साथ ही संबंधित कला क्षेत्र में कम से कम 20 वर्षों का अनुभव होना अनिवार्य है। आवेदकों को अपने बायोडाटा, नवीनतम छायाचित्र तथा कला क्षेत्र से संबंधित प्रमाण-पत्रों की स्वप्रमाणित प्रतियां आवेदन के साथ संलग्न करनी होंगी।

इसके अलावा सरकार या प्रतिष्ठित कला एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से प्राप्त पुरस्कार, सम्मान अथवा मान्यता संबंधी प्रमाण-पत्रों की प्रतियां भी आवेदन के साथ लगानी होंगी। योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण के लिए एक गुरु और चार शिष्यों का प्रावधान किया गया है। वहीं लोक कलाओं की कुछ विशेष विधाओं में अधिकतम आठ शिष्यों तक की अनुमति दी गई है। कुछ विधाओं में आवश्यकता अनुसार एक या दो संगतकार रखने का प्रावधान भी किया गया है।

यह योजना उन पारंपरिक और दुर्लभ कला विधाओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जो समय के साथ धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं। इससे अनुभवी कलाकारों को अपनी कला नई पीढ़ी को सिखाने का अवसर मिलेगा और देश की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।