मांगों को लेकर 6 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर गरजेंगी आशा वर्कर्स, मीटिंग में फैसला
Mahendra india news, new delhi
आशा वर्कर्स यूनियन जिला कमेटी की मीटिंग सीटू कार्यालय सिरसा में हुई है। मीटिंग में विस्तारित चर्चा करते हुए आशा वर्कर्स ने बताया कि 06 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, अगर फिर भी हमारी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आगामी आंदोलन करने का निर्णय लिया जाएगा।
सरकार लगातार आशा वर्कर्स पर काम का बोझ बढ़ा रही है और आशाओं के मानदेय में कटौती कर रही है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 में संसद स्तर के दौरान आशा वर्कर्स के मानदेय में 1500 रुपए की बढ़ोतरी घोषणा की है, परंतु एक साल बीत गया अभी तक उस घोषणा को लागू नहीं किया गया है। जिला सचिव मीनाक्षी ने कहा कि हरियाणा सरकार स्वास्थ्य विभाग मिलकर आशाओं पर आॅनलाइन काम का दबाव बना रहे हैं।
आॅनलाइन काम की वजह से आशा वर्कर्स की नियमित गतिविधियां प्रभावित हो रही है। सरकार ने जिस उद्देश्य से आशा की भर्ती की थी, वह उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। परंतु हरियाणा सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। स्वास्थ्य विभाग और सरकार आशाओं को मानसिक और आर्थिक प्रताड़ित करते हुए आॅनलाइन काम का दबाव बना रही है। सरकार और विभाग आशा वर्कर्स की समस्याओं को सुनने को तैयार नहीं है। आशा वर्कर्स को लगातार काम से हटाने की धमकी दी जा रही है। आशा वर्कर्स के मानदेय में कटौती करके प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश की तमाम आशाओं में भारी रोष है।
मीटिंग को सम्बोधित करते हुए जिला कैशियर शिमला ने बताया कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग की मनमानी नीतियों से परेशान होकर आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा ने आंदोलन करने का निर्णय लिया है। पूरे हरियाणा में 1 अप्रैल को आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा रजिस्ट्रेशन नंबर 1919 के आह्वान पर जिला स्तर जनरल बॉडी मीटिंग करके आंदोलन की तैयारी करते हुए 6 अप्रैल को सभी जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करेंगी।
मीटिंग में जिला कमेटी सहित पिंकी, सुदेश सहित अन्य दर्जनों आशा वर्कर्स ने भागीदारी की।
मुख्य मांगें:
केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1500 की बढ़ोतरी को तुरंत लागू किया जाए। हरियाणा सरकार द्वारा 73 दिन की हड़ताल के काटे गए मानदेय का तुरंत भुगतान किया जाए। आशाओं पर आॅनलाइन काम के दबाव को तुरंत बंद किया जाए। आयुष्मान आरोग्य मंदिर के मानदेय में की गई कटौती को तुरंत बहाल किया जाए। जननी सुरक्षा योजना की लाभार्थी सभी गर्भवती महिलाओं सहित आशाओं के रोके गए पैसे का तुरंत भुगतान किया जाए। आशाओं को धमकी दिया जाना तुरंत बंद किया जाए। आशा वर्कर्स को पक्का कर्मचारी बनाया जाए, जब तक पक्का कर्मचारी नहीं बनाया जाता, तब तक मजदूर की श्रेणी में शामिल करके तमाम सामाजिक सुरक्षा लाभ और न्यूनतम वेतन दिया जाए।