किसानों को दूध पेमेंट में देरी सहित भ्रष्टाचार की जांच के लिए बीकेई ने सीएम को भेजा पत्र
mahendra india news, new delhi
दुग्ध संघ सिरसा द्वारा किसानों को दूध की पेमेंटो में देरी, दूसरी कंपनियों की उपेक्षा रेटों में कमी, प्लांट में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं एवं अनुचित नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग को लेकर बीकेई अध्यक्ष लखविंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा है।
भारतीय किसान एकता बीकेई अध्यक्ष लखविंद्र सिंह औलख ने बताया कि दूध संघ सिरसा पशुपालक डेयरी किसानों के साथ लंबे समय से मनमानी कर रहा है। अब तक किसानों को दूध भुगतान नहीं किया गया है बाजार में दूसरी कंपनियों के दूध के रेट वीटा से काफी अधिक है लेकिन बार-बार कहने के बावजूद भी दूध की रेट नहीं बनाई जा रहे हैं।
दूध की आवक 75 से 80 हजार लीटर प्रति दिन है, जबकि किसानों का मानना है कि गर्मी की वजह से 45000 लीटर से ऊपर दूध की पैदावार नहीं हो रही है, इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि 30-35 हजार लीटर नकली तैयार किया गया दूध विटा मिल्क प्लांट सिरसा के अधिकारियों की मिलीभगत से लिया जा रहा है, जिसके कारण दूध के रेटों में बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।
उन्होंने बताया कि दुग्ध संघ सिरसा में बीएमसी से मिल्क प्लांट तक दूध खरीद प्रक्रिया में कथित मिलीभगत के माध्यम से मिलावटी एवं निम्न गुणवत्ता का दूध खरीदा जा रहा है। आरोप है कि रिकॉर्ड में दूध की गुणवत्ता को बेहतर दर्शाकर उसे अन्य दूध में मिलाया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है तथा वीटा की साख भी प्रभावित हो रही है। रेगुलर एवं अनुभवी कर्मचारियों को उनके कार्य से हटाकर अन्य स्थानों पर बैठाया गया है तथा उनकी जगह अस्थायी कर्मचारियों से महत्वपूर्ण कार्य करवाए जा रहे हैं। इससे कार्यप्रणाली की पारदर्शिता एवं गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान की दुग्ध समितियों से संबंधित दूध खरीद रिकॉर्ड एवं मिल्क ट्रैक शीट में कथित रूप से हेरफेर कर दुग्ध संघ को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उत्पादन विभाग में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं की ओर वरिष्ठ आॅडिटर द्वारा भी संकेत किया जा चुका है, लेकिन आज तक संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
टेंडर की शर्तें कथित रूप से कुछ विशेष पक्षों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई जाती हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा समाप्त होती है और दुग्ध संघ को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। दूध, घी एवं अन्य दुग्ध उत्पादों की चोरी की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे मिलीभगत की आशंका उत्पन्न होती है। वाहनों की मरम्मत एवं रखरखाव के नाम पर कथित रूप से अनावश्यक खर्च दिखाकर दुग्ध संघ को आर्थिक क्षति पहुंचाई जा रही है। इसके अतिरिक्त, यह भी संज्ञान में लाना चाहता हूं कि वर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश मेहता का नाम पूर्व में भी कथित भ्रष्टाचार संबंधी मामलों में सामने आ चुका है।
यदि इसकी निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो वास्तविक तथ्य सामने आ सकते हैं। इन अनियमितताओं के कारण दुग्ध संघ से जुड़े पशुपालकों को समय पर दूध का भुगतान नहीं मिल पाता, जिससे उन्हें मजबूर होकर अपना दूध निजी व्यापारियों को कम मूल्य पर बेचना पड़ता है। इससे पशुपालकों को आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है। अत: आपसे अपील है कि उपरोक्त सभी शिकायतों की किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच करवाई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, जांच पूर्ण होने तक संबंधित अधिकारियों को वर्तमान पद से हटाकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए ।