एप्पल की घड़ी व मोबाइल खरीदना ही सफलता नहीं है, यह केवल रैट रेस है, इसमें मत दौड़ो
mahendra india news, new delhi
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर
दोस्तों कब तक लुटते व लुटाते रहोगे, दिखावा कभी खत्म नहीं होगा, क्योंकि वो कहीं ओर से संचालित है, वो किसी और को अमीर बनाने का लक्ष्य है, वो किसी और वो अलग स्तर का व्यवसाय है, जिसमें हमारे युवा बहुत आसानी से फंस जाते है। हर किसी के खुशी के पैरामीटर अलग है, अगर किसी के पास अधिक पैसा है वो पैसे से ही सफलता के पैरामीटर बनाएंगे, किसी के पास झूठ फरेब है तो वो उसी को सफलता का पैरामीटर है, किसी के पास बड़ी गाड़ी है तो उसके लिए यही सफलता का पैरामीटर है,
किसी के पास ब्रांडेड कपड़े है तो वो उसे ही सफलता का पैरामीटर मानते है, किसी के लिए रेस्टोरेंट या होटल में भोजन करना ही खुशी के पैरामीटर है। सभी का जीवन अलग अलग है, सभी की खुशियां भी अलग अलग है, सभी की प्रकृति अलग अलग है, और इनके चक्कर में ऐसे युवा फंस जाते जो बहुत मेहनत से पैसे कमाते है, दूसरों को दिखाने के चक्कर में अपनी कष्ट कमाई को उड़ाते है, क्योंकि ये खेल मिडिया के माध्यम से, पब्लिसिटी के माध्यम से, या धर्म के नाम पर खेला जा रहा है जिसमें ऐसे युवा फंसते है जो न तो उस ग्रुप से तालुक रखते है और न ही उनको ऐसी वस्तुओं की जरूरत है। अच्छा मै युवाओं से ये प्रश्न करता हूं कि ये जो एक हवा चल रही है कि कल किसने देखा, जितना कमाओं, उतना उड़ाओ,
ये विचार क्या तुम्हारे खुद के है? नहीं भाई ये विचार तुम्हारे नहीं है, तुम्हारे भीतर ये इंस्टॉल कर दिए गए है ताकि तुम्हारी कमाई किसी और के पास जा सकें। फिल्म इंडस्ट्री के बड़े बड़े कलाकार पैसे लेकर उन एक प्रतिशत अमीर लोगों के प्रोडक्ट बेचने के लिए पब्लिसिटी करते है और पैसे लेते है। जिन मिडल क्लास के युवाओं को इंप्रेस करने के लिए ये एड की जा रही है, वो कभी विचार ही नहीं करते है कि जिन वस्तुओं के लिए या जिन खाद्य पदार्थों के लिए या जिन कपड़ों के लिए एड की जा रही है उन प्रोडक्ट को एड करने वाले लोग कभी उपयोग करते ही नहीं है।
बस यही बात समझनी है क्योंकि पिज़ा की एड वो इसलिए करते है ताकि देश के बच्चे, युवा पीढ़ी पिज़ा खाए और अपने स्वास्थ्य को खराब करें, बीमार हो जाए, अपने पाचन तंत्र को खराब करें, वो खुद पिज़ा कभी नहीं खाते है, कोल्ड ड्रिंक की एड से कोई भी सशक्त नहीं बन सकता है, कोई हवा में नहीं उड़ सकता है, जो इसे उपयोग करेंगे, उनकी सेहत ही खराब होगी, इसलिए एड करने वाले लोगों के डोले या चेस्ट की सुडौलता कोई पिज़ा, बर्गर, कोल्डड्रिंक्स या पानी पूरी खाने से नहीं बनती है, सेहत केवल पौष्टिक आहार खाने से होती है। पर इस बात को कौन मानता है,
सब को ऐसा लगता है कि हमारा करियर या हमारी सेहत तो इसी से बनेगी, परंतु ऐसा होता नहीं है। दोस्तों, एक कहावत है कि अगर आपके पास 5000 रुपए है तो उसमें से पांच सौ रुपए का पर्स खरीदो और 4500 रुपए पर्स में रखो ताकि समय पर पैसा काम आवे। इसका दूसरा वर्जन ये भी हो सकता है कि पूरे 5000 रुपए का पर्स ही खरीद लो, केवल दिखावा करने के लिए और उसमें एक रुपया भी रखने को न हो। प्रिय युवा दोस्तों, अपने जीवन को बिना वजह के खतरे में मत डालो, बिना वजह अपनी मेहनत की कमाई को किसी ऐसे ग्रुप के हवाले मत करो, जो तुम्हारे स्तर का नहीं है अर्थात जो आर्थिक रूप से तुम्हारे ग्रुप में नहीं आता है।
आप दूसरों के देखा देखी एप्पल की घड़ी क्यों खरीद रहे हो, एप्पल के मोबाइल क्यों खरीद रहे हो? जबकि हमारे पास बहुत सस्ते सस्ते ऑप्शन है, और वही कार्य वो इंस्ट्रूमेंट भी करते है यानि अगर पांच सौ रुपए की घड़ी होगी, तो वो भी समय बताएगी, अगर 10000 का मोबाइल भी होगा तो वो भी फोन करने व सुनने का काम करता है। दोस्तों, अपने बुजुर्गो से अवश्य सीखने की कौशिश करें, क्योंकि जीवन में कब पैसों की जरूरत पड़ जाए, ये पता नहीं होता है, इसलिए अपनी मेहनत की कमाई को किसी ऐसे के लिए ना उड़ाएं जिनको तुम्हारे पैसों की कोई कद्र नहीं है। किसी के साथ रैट रेस मत लगाओ, किसी के जैसे कपड़ों के लिए मारामारी मत करो,
किसी को इंप्रेस करने के लिए किसी बड़े मॉल में खरीददारी करके पैसे मत लुटाएं। मै सभी युवाओं से कहना चाहता हूँ कि अपनी खुशी के क्षेत्र को पहचानो, अपनी छोटी छोटी खुशी की गतिविधि पहचानो, बस उन्हीं से हैप्पीनेस आती है। किसी का अनुसरण इस लिए मत करो कि उन्हीं जैसे बन जाओ, किसी के सामने अपने को हीनता का शिकार न बनने दें, इतनी बुद्धि जरूर विकसित करें, इतनी जागरूकता जरूर रखें कि अपना पैसा कहां खर्च करना, क्यों खर्च करना है और कैसे खर्च करना है, बस इन्हीं प्रश्नों का हल आपको जीवन जीने का सही रास्ता दिखाएगा, दोस्ती करो, लेकिन उन्हीं जैसा बनना है यह वहम मत पालो। मै यहां ये बिल्कुल नहीं कह रहा हूँ
कि बिल्कुल कंजूस बन जाओ लेकिन मैं यहां ये जरूर व जोर देकर कह रहा हूँ कि अपना पैसा अपने जैसे लोगों या अपने जैसे स्तर वालों के काम ही आवे, तो व्यक्ति इस समाज को आर्थिक रूप से बैलेंस करने में सफल होता है। सभी युवा ध्यान से सुन ले, कि वो अपना एक भी पैसा किसी भी प्रकार की एड में दिखने वाली वस्तु को खरीदने में खर्च न करें, क्योंकि जितने भी बड़े लोग है उनमें से 50 प्रतिशत लोग तो हमारे मिडल क्लास को अंधेरे में धकेल कर ही कमाते है, और जिन वस्तुओं की अधिक एड होती है उसकी गुणवत्ता को भी परखने की जरूरत होती है, उनकी कीमत में उन लोगों को दिया जाने वाला मोटा धन भी शामिल होता है
जो उसकी एड कर रहा है, इसलिए एड की जाने वाली वस्तु बिल्कुल मत खरीदो, यह अपने मन में पक्का कर ले, मन इतना क्लियर होना चाहिए कि एड वाली वस्तु नहीं खरीदनी है। क्या आपने कभी विचार किया है कि कोई घड़ी दो करोड़ या ढाई करोड़ की क्यों होती है उसमें ऐसा क्या लगा है, या कोई मोबाइल दो लाख या इससे भी अधिक हो सकता है, उसमें ऐसा क्या होता है, चलो हो भी तो फिर उसकी एड की जरूरत क्यों पड़ रही है, ये स्टोरी केवल मिडिल क्लास लोगों को फंसाने का हथियार है, कि आप बड़ी बड़ी कंपनियों में हाड़तोड़ मेहनत करो और वहां से कमाया हुआ धन फिर से उन्हीं के प्रोडक्ट खरीदने में उड़ा दो, बस यही चक्कर है
जिसे समझने की आवश्यकता है। आपने कभी किसी किसान को अपनी फसल की एड करते हुए देखा है? क्या आपने किसी किसान या पशु पालक को अपने देशी घी का प्रचार करते हुए देखा है? कोई किसान अपनी सब्जियों की पब्लिसिटी करते हुए देखा है, लेकिन बिना एड के भी किसानों द्वारा बनाया हुआ देशी शुद्ध घी बिक जाता है। शुद्ध वस्तुओं की एड की आवश्यकता नहीं होती है , बस यही बात हमारी युवा पीढ़ी को समझनी चाहिए। हम किसी अमीर व्यक्ति के खिलौने नहीं है, हम कोई किसी अमीर व्यक्ति के प्यादे नहीं है,
हम किसी की वस्तु को इस लिए महंगा न खरीदे, कि वो किसी बड़े ब्रांड की है, कोई भी वस्तु खरीदनी है तो वो ही खरीदे जो तुम्हारे ही जैसे किसी व्यक्ति के जीवन का उत्थान करती है। यहां तो अमीरों के नाम पर ऐसे ऐसे महानुभाव भी है जो हमारे ही पैसे जो बैंक में इसलिए जमा करते है कि चार पैसे इंटरेस्ट के रूप में मिलेगा, लेकिन उस पैसे को कोई अमीर आदमी लोन के रूप में लेकर उसे चुकाए ही नहीं और भाग जाए, इससे भी अधिक खुद का जीवन ऐशो आराम से जिए, अपने बच्चों को तो विदेशों में पढ़ाए। मध्यम वर्ग परिवारों के बच्चों को मेहनत तो अपर क्लास की तरह करनी चाहिए और खर्चा किफायती होना चाहिए, क्योंकि तुम अमीरों की देखा देखी उन वस्तुओं का उपयोग करने लगते हो, जिन्हे तुम्हारी आर्थिक स्थिति कभी वेरिफाई नहीं करती है।
हर किसी के उपयोग में आने वाली हर चीज का आकलन उसकी वास्तविक आर्थिक स्थिति के अनुसार होती है। एक बहुत ही गूढ़ बात कह रहा कि कोई अमीर व्यक्ति बिल्कुल सस्ती वस्तु भी उपयोग करें तो लोग सोचते है यह तो बहुत महंगी होगी, क्योंकि वो आर्थिक रूप से सशक्त है, अगर वो उसकी वास्तविक कीमत बता भी दें तो भी लोग यही कहेंगे कि देखा कितना अमीर व्यक्ति है परंतु कितनी सादगी है और इसके विपरित अगर कोई मध्यमवर्गीय व्यक्ति या युवा खूब महंगी महंगी घड़ी या कपड़े पहने तो भी लोग उसकी कीमत कम ही आंकते है और अगर वो किसी तरह उन वस्तुओं की कीमत बताने में कामयाब भी हो जाएं तो फिर लोग कहेंगे कि देख रहे हो कितने चोंचले करते है अपनी हैसियत को नहीं देखते है, बस यही बात अगर हमारे ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवा समझने लग जाएं तो फिर तुम भी अमीर बन जाओगे और जो लोग ग्रामीणों को हेय दृष्टि से देखते है उनकी अक्ल भी ठिकाने पर आ जाएं।
जब वो लोग जिनके तुम बनाए हुए आइटम खरीदते हो, या उनके बनाए हुए मोबाइल या घड़ियां या कपड़े खरीदते हो, तुम्हारे से कोई वास्ता ही नहीं है, तुम उनको कभी देख भी नहीं सकते हो, तो फिर क्यों अपनी मेहनत की कमाई उनको थमा देते हो। जीवन समझदारी का नाम है, जीवन में दिखावे से ज्यादा समझ की जरूरत है, वैसे भी आजकल कौन क्या पहन रहा है, किसकी घड़ी किस ब्रांड की है, किसका मोबाइल किस ब्रांड का है, उसे कोई नहीं देखते है, न किसी के पास इतना समय है। कितनी विचित्र बात है कि हम पहले तो महंगी वस्तुओं पर अपनी कमाई लुटाएं फिर उसको दिखाने के लिए जतन करें कि कोई इसे देखें। हमारे राष्ट्र में हमारे ही समाज में, हमारे ही समुदाय के कितने ही ऐसे बच्चे है, जो शिक्षा से इसलिए वंचित है, क्योंकि उनके पास फीस भरने के लिए पैसे नहीं है, उनकी यूनिफॉर्म के लिए पैसे नहीं है, हमारे ही समुदाय में कितने ऐसे बच्चे और युवा है जो खेल कूद में भारत का नाम रौशन करना चाहते है लेकिन उनके पास धन नहीं है, कितने ही ऐसे बच्चे है जिनको पौष्टिक आहार नहीं मिलता है, कितनी ही हमारी बेटियां है
जिनके पास शिक्षा के लिए पैसे नहीं है, जिनके पास चिकित्सक बनने कर लिए , इंजीनियर बनने के लिए, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने के लिए धन नहीं है, क्या हम अपनी फिजूल खर्ची को रोककर उन बच्चों या युवाओं की सहायता नहीं कर सकतें हैं, क्या हम शादी विवाह में शराब की स्टाल लगाने में खर्च होने वाले धन को उन बच्चों के लिए खर्च नहीं कर सकते है, क्या हम अपनी फिजूल खर्ची जो हम एप्पल की घड़ी व मोबाइल खरीदने के लिए खर्च करते है उसे रोककर उन बच्चों को डॉक्टर इंजीनियर नहीं बना सकते है, या हम उन्हें अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी नहीं बना सकते है, बड़े बड़े रेस्टोरेंट में खाने पर, शादी विवाह में होटलों में करोड़ों रुपए बर्बाद करने से अच्छा है कि हम अपने समाज के बच्चों को राष्ट्र का अच्छा नागरिक बनाने में खर्च करें। ये बहुत ही मार्मिक बात है,
दोस्तों आने वाले समय में हम तभी याद रखे जाएंगे कि हमने राष्ट्र को क्या दिया, हमने अपने समाज को क्या दिया, हमने अपने ही समुदाय को कितनी सहायता की है। ये सभी ब्रांडेड कपड़े, ये ब्रांडेड घड़ियां, ये एप्पल के मोबाइल, ये होटलों में शादियां करना, ये डेस्टिनेशन वेडिंग, ये ब्रांडेड चीजें खरीदने को कोई नहीं याद रखेंगे, बस याद तुम्हारा अपने समाज को दिया गया योगदान रहेगा। आओ मिलकर अपने समाज को सशक्त करने के लिए आगे आएं और अपनी कष्ट कमाई को बेकार में किसी ऐसी कंपनियों को देना बंद करें, जो हमारे समाज राष्ट्र के कुछ काम नहीं आती है, उस धन को अपने लोगों को सशक्त करने में लगाएं, शिक्षित करने में लगाएं, स्वस्थ बनाने में तथा अपने राष्ट्र को विकसित करने में ही लगाएं। और अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाएं, राष्ट्रीय संसाधनों का किफायती उपयोग करना भी देश को विकसित करने जैसा ही है, इसे भी समझो, क्योंकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी हमारी ड्यूटी है। आओ सादगी पूर्ण जीवन जिएं।
जय हिंद, वंदे मातरम