इस समय तक करें गेहूं की बिजाई, ओलावृष्टि और गर्मी से बचेगी फसल, बंपर होगी फसल
mahendra india news, new delhi
गेहूं की बिजाई का समय आ गया है। किसान गेहूं की बिजाई की तैयारी करने मे ंजुट गये हैं। किसानों के लिए जरूरी सलाह बदलते जलवायु और मौसम के मिजाज के बीच खेती-किसानी के तौर-तरीकों में बदलाव करना बहुत ही जरूरी हो गये हैं।
आपको बता दें कि अनियमित वर्षा, बाढ़, सुखाड़ और तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण खेती के समक्ष कई तरह की नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इन प्रतिकूल प्रभावों से फसलों को बचाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र सिरसा के कृषि वैज्ञानिक डा. देवेंद्र जाखड़ ने किसानों को खास सलाह दी है।
समय पर बोआई
उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर गेहूं की बुआई 15 नवंबर से 5 दिसंबर के बीच की जाती है। हालांकि बदलते मौसम के मिजाज को देखते हुए किसानों के लिए 15 नवंबर तक बिजाई पूरी करना ज्यादा फायदेमंद होगा। वक्त पर बुआई करने से फसल में फूल आने और दाना पकने के समय अधिक तापमान का खतरा टल जाता है।
टर्मिनल हीट स्ट्रेस
देर से बिजाई होने पर फसल को 'टर्मिनल हीट स्ट्रेस' का सामना करना पड़ता है, जिससे पछिया हवा और गर्मी का बुरा असर पड़ता है। वक्त पर बिजाई से फसल को अप्रैल महीने में होने वाली ओलावृष्टि के खतरे से भी बचाया जा सकता है।
दरअसल, देर से तैयार होने वाली फसल की कटाई अप्रैल तक खिंच जाती है, जबकि अप्रैल में ओलावृष्टि की करीब 70 फीसद घटनाएं होती हैं।
रबी मक्का की खेती
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को अक्टूबर के माह में रबी मक्का की बुआई से बचने की खास सलाह दी है। उन्होंने बताया कि बेहतर और बंपर उपज के लिए 10 नवंबर से 30 नवंबर के बीच मक्का की बुआई करना सबसे उत्तम माना गया है। इस निश्चित अवधि में फसल के विकास के लिए पूरी तरह अनुकूल मौसम मिलने की संभावना रहती है।
पर्यावरण हितैषी खेती
किसानों को अच्छे उत्पादन के लिए पर्यावरण हितैषी कृषि प्रणाली अपनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही कृषि वैज्ञानिकों ने फसल चक्र का सख्ती से पालन करने और रासायनिक उर्वरकों का कम से कम उपयोग करने की बात कही है।
बिजाई की तिथि में थोड़ा बदलाव करके किसान मौसम के दुष्प्रभावों से अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।