दीपू कंवर ने ससुराल में एक कमरे को बनाया हॉस्टल, घर पर काम करती तो ससुर डांटते, बहू ने 79वी रैंक हासिल कर जज बनने का सपना किया साकार 

 
mahendra india news, new delhi

राजस्थान के बाड़मेर की बहू दीपू कंवर और जामनगर की बेटी ने तीसरे प्रयास में गुजरात न्यायिक सेवा में 79वी रैंक हासिल की है। ऐसा कर दीपू ने जज बनने का सपना साकार किया है। दीपू के संघर्ष की कहानी भी कुछ अलग से हैं। दीपू कंवर ने ससुराल में ही एक कमरे को हॉस्टल बना कर दिन-रात पढ़ाई की, यही नहीं जब भी दीपू घर का काम करने लगतीं, उनके ससुर प्यार से कहते थे बीनणी, आप पढ़ो, इस सफलता में पति और सास-ससुर का भरपूर सहयोग मिला. लगातार मेहनत और परिवार के समर्थन से दीपू ने कठिन चुनौतियों के बावजूद कामयाबी पाई। 


बताया जा रहा है कि दीपू कंवर की शादी करीबन सात वर्ष पहले बाड़मेर जिले के जालीपा निवासी लोकेंद्र सिंह के साथ हुई,  अब दीपू कंवर के एक बेटी भी है. दीपू कंवर बताती हैं कि न्यायिक सेवा की तैयारी का सफर आसान नहीं था, इसके लिए उन्होंने लगातार 3 बार परीक्षा दी और तीसरे प्रयास में कामयाबी हासिल की। इस सफर के दौरान कई चुनौतियां आई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने निर्धारित टारगेट पर पूरी लग्न से जुटी रही। इसी को लेकर दीपू कंवर ने तैयारी के दौरान अपने ससुराल में ही एक कमरे को हॉस्टल की तरह बना लिया था जहां वे दिन-रात पढ़ाई करती थीं। 


दीपू कंवर की इस कामयाबी में सबसे अधिक मदद उनके सास समद कंवर, ससुर थानसिंह और पति लोकेंद्र सिंह का रहा है, उनका कहना है कि अगर परिवार का इतना मजबूत साथ नहीं मिलता तो इस मंजिल तक पहुंचना इतना आसान नहीं था। दीपू कंवर बताती हैं कि जब परिवार बेटियों और बहुओं के सपनों को समझे और उनका साथ दे तो वे किसी भी मंजिल तक पहुंच सकते हैं।