तपती धूप में बेजुबानों के लिए राहत बन रही डेरा सच्चा सौदा की पक्षियोंद्धार मुहिम
- पूज्य गुरु जी के वचनों पर चलते हुए निरंतर की जा रही पक्षियों की सेवा

 


सरसा। आसमान से बरसती आग, तपती धरती और लू के थपेड़ों के बीच जब इंसान भी घरों में राहत तलाशने को मजबूर हो जाता है, तब बेजुबान पक्षियों की पीड़ा का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। भीषण गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए भटकते पक्षियों को राहत पहुंचाने का कार्य डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत वर्षों से निस्वार्थ भाव से करती आ रही है। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन वचनों से प्रेरित होकर साध-संगत न केवल इंसानों, बल्कि बेजुबान जीवों की सेवा को भी अपना धर्म मानते हुए निरंतर पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था कर रही है। डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे 175 मानवता भलाई कार्यों में शामिल 37वें कार्य पक्षियोंद्धार के तहत साध-संगत पक्षी उद्धार हो हर आंगन में, मिलकर सब ये ठाने, रख दो भरकर पानी छत पर और मुठ्ठी भर दाने के संदेश को जन-जन तक पहुंचा रही है।

इसी सोच के साथ साध-संगत गांवों और शहरों में लोगों को भी गर्मी के दिनों में पक्षियों के लिए पानी और दाना रखने के लिए प्रेरित कर रही है। मई-जून की भीषण गर्मी और 46 से 48 डिग्री तापमान के बीच साध-संगत अपने घरों की छतों, दुकानों, पार्कों, सार्वजनिक स्थानों और धार्मिक स्थलों पर मिट्टी के सकोरे रख रही है। कई स्थानों पर पेड़ों के नीचे और शाखाओं पर भी मिट्टी व प्लास्टिक के सकोरे बांधे गए हैं, ताकि पक्षियों को आसानी से पानी मिल सके। सुबह होते ही पक्षियों का इन सकोरों के आसपास जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। गौरैया, कबूतर, मैना सहित अनेक पक्षी यहां पहुंचकर अपनी प्यास बुझाते नजर आते हैं। पूज्य गुरु जी की शिक्षाओं पर चलते हुए साध-संगत रोजाना सुबह-शाम इन सकोरों में पानी भरती है और दाना डालती है।

तेज गर्मी के कारण पानी जल्दी सूख जाने पर दिन में कई बार भी सकोरों को भरा जाता है। साध-संगत के सेवादार लगातार इनकी साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखते हैं, ताकि पक्षियों को स्वच्छ पानी मिल सके। गर्मी के इस मौसम में यह सेवा बेजुबान पक्षियों के लिए किसी जीवनदान से कम नहीं है। सरसा में एमएसजी डेरा सच्चा सौदा एवं मानवता भलाई केंद्र कल्याण नगर, सुखचैन कॉलोनी, शाह सतनाम जी नगर और सरसा ब्लॉक की साध-संगत द्वारा हुड्डा स्थित विभिन्न पार्कों, सोनी धर्मशाला, नागरिक अस्पताल सहित अनेक स्थानों पर सैकड़ों मिट्टी के सकोरे लगाए गए हैं। साध-संगत निरंतर इनकी देखभाल करते हुए उनमें पानी और दाना डाल रही है। इसके अलावा कई सेवादार अपने निजी स्तर पर भी मोहल्लों और गलियों में पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कर रहे हैं।


- जीव सेवा को जन-जन तक पहुंचा रही साध-संगत
पूज्य गुरु जी अपने रूहानी सत्संगों में हमेशा जीवों पर दया, करुणा और सेवा भाव अपनाने की प्रेरणा देते हैं। उन्हीं शिक्षाओं पर अमल करते हुए डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत न केवल स्वयं पक्षियों और बेजुबान पशुओं की सेवा कर रही है, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित कर रही है। गर्मी के मौसम में साध-संगत जगह-जगह मिट्टी के सकोरे रखकर पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था कर रही है। इसके साथ ही पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिल सके, इसके लिए छायादार पेड़ों पर लकड़ी से बने सुंदर घोंसलेनुमा घर भी लगाए जा रहे हैं। इन घोंसलों में पक्षी आराम करने के साथ-साथ अपने बच्चों को भी सुरक्षित रख पा रहे हैं। वहीं बेजुबान पशुओं के लिए भी विभिन्न स्थानों पर हरे चारे और पानी की व्यवस्था की जा रही है। साध-संगत का उद्देश्य केवल सेवा करना ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के मन में जीवों के प्रति दया और संवेदनशीलता की भावना जागृत करना भी है।


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पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि साध-संगत छतों पर पक्षियों के लिए दाने डालती है और पानी रखती है, ताकि पक्षी आकर चोगा चुग लें और पानी पी सकें। पता नहीं कब से प्यासे पक्षी आकर पानी पीएंगे। मई-जून के महीनों में विशेष रूप से पक्षियों को दाना-पानी नहीं मिलता, क्योंकि चारों ओर सूखा पड़ जाता है। ऐसे में आप जो दाना-पानी रखते हैं, पता नहीं वे कौन-सी दुआएं दे जाएं और कौन-सी दुआ भगवान जी सुन लें। यही सच्चा दान है, यदि आपने करना है तो।