हरियाणा की अनाज मंडियों में किसान संगठनों का घेराव, धान खरीद में धांधली रोकने की मांग

 

MAHENDRA INDIA NEWS, NEW DELHI
 संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा व किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा हरियाणा द्वारा राज्य में मंडियों में बुधवार को 11 बजे से 2 बजे तक तीन घंटे का मार्केट कमेटियों का घेराव किया गया। घेराव में  बीकेयू टिकैत, ए आई के एस 1936, हरियाणा किसान मंच, ए आई के एस, बी के यू एकता उग्राहां, पगड़ी संभाल जटा, राष्ट्रीय किसान मंच के किसान साथियों ने भाग लिया। डा. सुखदेव सिंह जम्मू ने बताया कि धान की खरीद में रेट, नमी व तोल को लेकर धांधलियां हो रही हैं।

सरकारी खरीद एजेंसियां समय पर मंडी में खरीद करने के लिए न पहुंचने की वजह से धान की फसल प्राइवेट खरीददारों द्वारा सरकारी रेट 2461 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम दरों पर खरीद की जा रही है। कई जगह नमी के मानदण्ड में मशीनों से धांधली करके रेट कम दिया जा रहा है। डा. जम्मू ने बताया कि मण्डी में डिजिटल डाटा एंट्री के बहाने, प्रति एकड़ ऊपज खरीद निर्धारित करने जैसे ऊल जलूल बहाने से किसानों को मण्डी में परेशान करते हुए  लूट की जा रही है। मण्डी सचिव की नाक के नीचे दिन दिहाड़े व्यापारी व भ्रष्ट किस्म के कमीशन एजेंट भोले भाले किसानों की लूट कर रहे हैं व मार्केट कमेटियों का अमला मूक दर्शक बना हुआ है।

उन्होंने बताया कि घेराव के जरिये हरियाणा सरकार को यह चेताना चाहते हैं कि जो मंडियों में किसानों की लूट हो रही है, उसको रोकने के लिए हरियाणा सरकार किसी भी तरह से काम नहीं कर रही है। इसलिए आज मजबूर होकर हरियाणा के सभी किसान संगठन हरियाणा की सभी अनाज मंडियों के सचिव कार्यालय का घेराव कर रहे हैं, सरकार को यह बताने के लिए कि जो मंडियों में पोर्टल व्यवस्था की गई है, उसमें सरकार की मंशा जो बाहर से अनाज आने पर रोक लगाने की है, वह पूरी तरह असफल है। परंतु उसकी वजह से किसान बेवजह  परेशान हो रहा है। इसके अलावा नमी के नाम पर किसान को परेशान किया जा रहा है। नमी मौसम की वजह से होती है, इसलिए जब मौसम ही नमी वाला है तो 17 प्रतिशत नमी की जगह 20 प्रतिशत नमी को मानक बनाना चाहिए।

इसके अलावा सरकारी खरीद एजेंसियां मंडी में समय से आकर खरीद नहीं कर रही है, जिससे प्राइवेट खरीदार मनमानी करते हुए सस्ते दाम पर फसलों की खरीद कर रहा है। मण्डियों में फसलों की तुलाई को लेकर भी गोलमाल हो रहा है। कंप्यूटर कांटे से तौलाई करने का आदेश सरकार द्वारा पिछले साल का दिया हुआ है, परंतु मंडियों में अभी भी दूसरे कांटों से तुलाई हो रही है। हमारी सरकार से मांग है कि सभी मंडियों में सरकारी कांटे सही हालत में चलने चाहिए। जिन किसानों की धान की फसल कम रेट पर खरीदी गई है, उनकी भरपाई करते हुए 2461 प्रति क्विंटल की दर से करवाई जाए।