एनएफएल कंपनी द्वारा जबरन खाद की 'टैगिंग' से किसान और डीलर परेशान: लखविंद्र सिंह
mahendra india news, new delhi
भारतीय किसान एकता (BKE) के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने एनएफएल (नैशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड) कंपनी और कृषि विभाग पर खाद की टैगिंग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार के स्पष्ट निदेर्शों के बावजूद एनएफएल कंपनी द्वारा खाद विक्रेताओं (डीलरों) को डीएपी और यूरिया के साथ अन्य गैर-जरूरी उत्पाद जैसे अमोनियम सल्फेट, सल्फर और बायो-पोटाश जबरन थमाए जा रहे हैं, जिसका अंतिम वित्तीय बोझ किसानों की जेब पर पड़ रहा है। औलख ने बताया कि सिरसा जिले के कई खाद विक्रेताओं ने हाल ही में सबूतों के साथ कृषि महानिदेशक (हरियाणा) को एनएफएल कंपनी की मनमानी की लिखित शिकायत दी थी। इसके बावजूद कृषि विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
रैक आवंटन में सामने आई 'टैगिंग' की सच्चाई:
हाल ही में (24 सितंबर को) सिरसा में एनएफएल कंपनी का डीएपी खाद का रैक पहुंचा, जिसमें लगभग 47,000 कट्टे डीएपी तथा 7,500 कट्टे अमोनियम सल्फेट आए थे। इसमें से हेफेड 24,000 कट्टे डीएपी दिए गए (कोई टैगिंग नहीं), निजी डीलर 23,000 कट्टे डीएपी और 7,500 कट्टे अमोनियम सल्फेट दिए गए। डीलरों को डीएपी के साथ जबरन अमोनियम सल्फेट लेने पर मजबूर किया गया। इसी वजह से 1,391 कट्टे डीएपी और 646 कट्टे अमोनियम सल्फेट के एक आवंटन को लेने से मना कर दिया गया और ट्रकों को खाली नहीं करवाया गया।
किसानों का प्रदर्शन और पुलिस का हस्तक्षेप:
शुक्रवार को जब किसान डीएपी खाद लेने के लिए किसान भवन में एकत्र हुए, तो खाद न मिलने पर उनका आक्रोश फूट पड़ा। किसानों ने डबवाली रोड पर पहुंचकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को टोकन जारी कर खाद वितरण का आश्वासन दिया। औलख ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में एनएफएल अधिकारी द्विवेदी और गुण नियंत्रण अधिकारी अमित कुमार से टेलीफोन पर बात की, जिससे स्पष्ट हुआ कि अमोनियम सल्फेट की टैगिंग के कारण ही डीलर खाद की गाड़ियां नहीं उतार रहे थे।
सरकार और कृषि विभाग को सख्त चेतावनी:
बीकेई प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि एक तरफ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, हरियाणा के मुख्यमंत्री और राज्य के कृषि मंत्री रोज बयान देते हैं कि यूरिया व डीएपी के साथ किसी उत्पाद की टैगिंग नहीं होने दी जाएगी। दूसरी तरफ सरकारी उपक्रम एनएफएल ही सरेआम टैगिंग कर रहा है। यदि हरियाणा सरकार और कृषि विभाग ने कंपनियों की इस जबरन टैगिंग पर तुरंत रोक नहीं लगाई, तो किसान संगठन मजबूरी में कड़ा संघर्ष शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।