भारत-अमेरिका ट्रेड डील व बुढ़ापा पेंशन काटने के विरोध में किसानों ने फूंके ट्रंप, मोदी व सीएम के पुतले

 

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बीकेई मीडिया प्रभारी गुरलाल भंगू ने जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार को बीकेई महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली की अध्यक्षता में एसकेएम गैर राजनीतिक वह किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में डीसी कार्यालय सिरसा में ट्रंप, मोदी व नायब सैनी के पुतले फूंके गए।

अंग्रेज सिंह कोटली ने कहा कि भाजपा सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगे सरेंडर करते हुए उसके साथ जो ट्रेड डील की है, उससे भारत के किसान, पशुपालकों, मछली पालकों सहित कृषि के सहायक धंधे बर्बाद हो जाएंगे, जो कॉरपोरेट्स तीन काले कानूनों के माध्यम से भारत की मंडियों पर कब्जा करना चाहते थे, अब उनके रास्ते आसान हो जाएंगे। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापार समझौता गुप्त रूप से बातचीत करके किया गया और इसकी शर्तों का खुलासा नहीं किया गया। इसके बजाय केवल अस्पष्ट बयान जारी किए गए, क्योंकि भारतीय पक्ष से जुड़े लोगों को यह समझ थी कि पूरी जानकारी सार्वजनिक करने से देश को राजनीतिक और आर्थिक नुकसान हो सकता है। इतनी दूरगामी आर्थिक और संप्रभुता से जुड़ी शर्तों वाले समझौते में पारदर्शिता की कमी बेहद चिंताजनक है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने देश को गुमराह किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित व्यापार समझौते के अनुसार, भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों जैसे फलों और सब्जियों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ  को शून्य प्रतिशत तक कम करेगा। इससे स्पष्ट होता है कि भले ही अभी टैरिफ  कम नहीं किए गए हों, लेकिन समझौते में यह समझ बनी हुई है कि इसके प्रावधानों के अनुसार आगे चलकर इन्हें कम किया जाएगा।

अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रोलिंस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर ट्रंप को अमेरिकी किसानों का समर्थन करने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यह समझौता अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत जैसे बड़े बाजार में अधिक निर्यात करने, कीमतें बढ़ाने और ग्रामीण अमेरिका में धन पहुंचाने में मदद करेगा। अमेरिकी कृषि सचिव का यह बयान भी इस बात का प्रमाण है कि भारत ने कृषि वस्तुओं के आयात पर सहमति जताई है। यह विरोधाभास ही दर्शाता है कि वाणिज्य मंत्री के बयान भ्रामक थे और इससे सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े होते हैं।

सबसे बड़ी समस्या इस समझौते में पारदर्शिता की कमी है, जिन लोगों ने दावा किया था कि न्यूज़ीलैंड के साथ समझौते में कृषि को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने बाद में चुपचाप सेब पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत कम कर दिया। इसी प्रकार आसियान समझौते के तहत तय पाम ऑयल के आयात शुल्क को कई बार कम किया गया। जी-20 की सफलता के नाम पर अमेरिका से सेब, बादाम और अखरोट पर आयात शुल्क चुपचाप घटा दिया गया। सुभाष झोरड़ ने कहा कि भाजपा सरकार बिजली शोध बिल 2025, सीड्स बिल व एफटीए के माध्यम से किसानों को चौतरफा घेर रही है। किसान आंदोलन पार्ट-1 और पार्ट-2 की मांगों को लेकर किस समय-समय पर आंदोलन कर रहे हैं। लिखित रूप में मानी हुई मांगों को भी अभी तक लागू नहीं किया गया है।

एसपी खरीद गारंटी कानून, स्वामीनाथन आयोग सी2+50 प्रतिशत के तहत फसलों के भाव, किसानों मजदूरों की संपूर्ण कर्जा माफी सहित किसानों की मांगों को मानने की बजाय केंद्र सरकार किसान विरोधी नए-नए फरमान सुना रही है। केंद्र सरकार ने 2025.26 के बजट में किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख करने की घोषणा की थी, जिसका अभी तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।

हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चे के आह्वान पर किसानों मजदूरों की संपूर्ण कर्जा माफी सहित सभी मांगों को लेकर 23, 24 और 25 फरवरी को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री आवास के बाहर लगने जा रहे महापड़ाव में बीकेई के बैनर तले बड़ी संख्या में सिरसा से किसान-मजदूर पहुंचेंगे। वहीं हरियाणा सरकार द्वारा बुजुर्गों की काटी गई बुढ़ापा पेंशन को भी बहाल करवाया जाएगा।

सुभाष झोरड़ ने कहा कि 1987 में चौधरी देवीलाल ने किसानों की बुढ़ापा पेंशन शुरू की थी, लेकिन मौजूदा सरकार बुढ़ापा पेंशन काटने का काम कर रही है। गुरप्रीत सिंह संधू ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों से नफरत करती हैए इसीलिए नए-नए किसान विरोधी कानून लेकर आ रही है और अमेरिका सहित अन्य देशों से किसानी को बर्बाद करने वाले समझौते कर रही है। इस मौके पर दलजीत सिंह रंगा, गुरप्रीत सिंह जैलदार, मास्टर पाली राम, अमरीक सिंह बाजवा, सुनील खारिया, लाभ सिंह भंगू, बलजिंदर सिंह भंगू, बलवीर रोड़ी, भरत गोदारा, मनदीप रघुआना, कृष्ण भाकर कालुआना, सुखप्रीत रघुआना, जसमेर सिंह सरपंच सहित भारी संख्या में किसान उपस्थित थे।