बिजाई से पहले मिट्टी की जांच करवाएं किसान, संतुलित खाद का करें प्रयोग: डा. यादव
mahendra india news, new delhi
खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में ग्वार की अधिक बिजाई करके तथा उत्पादकता बढ़ाने के मकसद से सिरसा जिले के खण्ड ओढ़ा के गांव घुक्कांवाली में ग्वार फसल पर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को सही समय पर बिजाई, बीजोपचार, संतुलित खाद का प्रयोग व समय से पहले बिजाई न करने की जानकारी दी। यह शिविर कृषि विभाग ओढ़ां के एटीएम डॉ. पवन कुमार के तत्वावधान में ग्वार विषेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव के साथ मिलकर आयोजित किया गया।
ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव ने किसानों को अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच करवाकर ही बिजाई करने की सलाह दी। मिट्टी जांच से यह पता चलता है कि जमीन में किस पोषक तत्व की कमी है। इसके अलावा उन्होंने किसानों को अपने खेत में गोबर की तैयार खाद डालने का विशेजोर दिया। इससे मृदा की उर्रवरा शक्ति बढ़ती है।
मिट्टी जांच के आधार पर सन्तुलित खाद का प्रयोग करें। गोष्ठी में ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव का किसानों से रूबरू होने पर पता चला कि किसान जड़गलन रोग को हल्के में लेते हैं, इससे उनको काफी नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों के अनुसार जड़गलन रोग ग्वार फसल में 40 से 45 प्रतिशत तक आ जाता है। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए बीज उपचार 3 ग्राम प्रति किलो बीज दर से सुखा उपचारित करके ही बिजाई करें, जिसका 15 रुपए प्रति एकड़ खर्चा आता है, जोकि गरीब से गरीब किसान भी कर सकता है। बीज उपचार करने से करीबन 1.0-1.5 क्ंिवटल प्रति एकड़ ग्वार की पैदावार बढ़ जाती है, जोकि भूमि के प्रकार के ऊपर निर्भर करता है।
कौनसी किस्मों की करें बिजाई:
ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों को उन्नतशील किस्में एचजी 365, एचजी 563 व एचजी 2-20 की बिजाई करने की सलाह दी। ये किस्में 85 से 110 दिन में पककर तैयार हो जाती।
बिजाई का उचित समय:
जिस किसान के पास अच्छी गुणवत्ता वाला पानी उपलब्ध है तो ग्वार की बिजाई मानसून की बारिश आने से पहले कुछ रकबे में पानी लगाकर जून के पहले पखवाड़े में रिस्क को कम करने के लिए पलेवा करके बिजाई कर सकते हैं, परन्तु ग्वार की बिजाई के लिए जून का दूसरा पखवाड़ा सबसे उचित है। बारिष पर आधारित बिजाई मानसून की अच्छी बारिश आने पर करें। गोष्ठी के दौरान किसानों को अगाह किया कि मई के महीने में ग्वार की बिजाई न करें।
संतुलित खाद का करें प्रयोग:
ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों से आग्रह किया अच्छी पैदावार लेने के लिए 100 किलो सिंगल सुपरफास्फेट तथा 15 किलो यूरिया या 35 किलो डीएपी प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालने के लिए सलाह दी। ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बी.डी. यादव ने बताया कि ग्वार की अच्छी पैदावार लेने के लिए अपने खेत में गोबर की खाद अवश्य डालें, इससे जमीन की उरर्वाशक्ति बनी रहेगी।
कृषि अधिकारी ने ये दिए सुझाव:
डॉ. पवन कुमार, एटीएम ओढ़ां ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना व मेरी फसल मेरी ब्यौरा के बारे में पूरी जानकारी दी। इसके अलावा प्राकृतिक खेती अपनाने पर विशेष जोर दिया। जिसके लिए कृषि विभाग की तरफ से कुरूक्षेत्र में मुफ्त ट्रेनिंग ली जा सकती है, जिसके लिए कृषि अधिकारी के समर्क में रहें। इस अवसर पर शिविर में 65 मौजूद किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की वेबिस्टिन दवाई, एक मास्क तथा एक जोड़ी दस्ताने हिन्दुस्तान गम एण्ड कैमिकल्स भिवानी की तरफ से मुफ्त दी गई। इसके अलावा प्रश्नोत्तरी सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पांच किसानों को सम्मानित किया गया। इस प्रोग्राम को आयोजित करने में गांव के प्रगतिशील किसान अभय सिंह का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा हरभजन सिंह, राजबीर, गुरजिन्द्र सिंह, दर्शन सिंह, गुरूदयाल सिंह, रमेश, चानन सिंह, बलदेव सिंह आदि किसान मौजूद थे।