मसूर व मटर की खेती पर किसान ये दें ध्यान, कैसे करें बीज का उपचार

 
 मसूर व मटर की खेती पर किसान ये दें ध्यान
कृषि विकास अधिकारी DR. Anil ने बताया कि मसूर व मटर की फसल से किसानों को कम लागत में अच्छा मुनाफा मिल सकता है. लेकिन जरूरी है कि किसान मटर की फसल की बुवाई के वक्त ही कुछ जरूरी उपाय कर लें, क्योंकि मटर की फसल में उकठा रोग लगता है। इससे कई बार धीरे-धीरे पूरी फसल बर्बाद हो जाती है और किसानों को अपनी लागत निकालना भी कठीन हो जाता है। इसके लिए किसानों को मटर की फसल की बुवाई मृदा शोधन करने के साथ-साथ बीज उपचारित करने के बाद ही करें. इसके अलावा कोशिश करें कि मटर की फसल की बुवाई बेड बनाकर या फिर कूड़ बनाकर मेड के ऊपरी सिरे पर लगाएं.

बीज उपचार करें किसान
उकठा रोग मिट्टी में मौजूद फफूंदी के कारण फैलता है. जिसमें पौधे जड़ से सुख जाते हैं. जरूरी है कि किसान बुवाई करने से पहले मृदा शोध करें। मृदा शोध करने के लिए 2 किलोग्राम ट्राईकोडर्मा को 35 से 40 किलो गोबर की सड़ी हुई खाद में मिलाकर 10 दिन तक छायादार स्थान पर रखें। इसके बाद तैयार हुए पूरे मिश्रण को पूरे खेत में बिखेर कर मटर की फसल की बुवाई कर दें।

कैसे करें बीज का उपचार?
कृषि अधिकारी ने बताया कि किसी भी फसल की बुवाई करने से पहले बीज उपचारित करना एक अहम क्रिया है. वहीं दलहन की फसल मटर की बुवाई करते समय भी किसानों को भी उपचारित करना चाहिए. बीज उपचारित करने के लिए किसान 2.5 ग्राम कार्बेंडाजिम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी के साथ ही किसान 1 ग्राम कार्बेंडाजिम और 2 ग्राम थीरम को मिलकर भी बीज उपचारित कर सकते हैं. उपचारित बीज को उपचारित भूमि में बुवाई करने से उकठा रोग नहीं लगता बीज का जमाव भी बेहतर होता है.