चीनी के रेट बढ़ते ही सरकार सख्त, स्टॉक की जांच के लिए 10 टीमें तैनात

 

mahendra india news, new delhi

पिछले कई दिनों से चीनी के रेट में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार चीनी की जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की तैयारी में है। 

जानकारी के अनुसार घरेलू बाजार में चीनी के रेटों में तेज बढ़ोतरी के बीच चीनी के स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन करने के लिए 10 केंद्रीय टीमों के विभिन्न प्रदेशों का दौरा करने की संभावना है। यह घटनाक्रम सरकार द्वारा हाल में चीनी के रेटों में बढ़ोतरी के पीछे सट्टेबाजी, जमाखोरी और आर्टिफिशियल कमी पैदा करने जैसे कारणों को चिन्हित किए जाने के बाद सामने आया है. 

केंद्र सरकार के ताजा आकलन के अनुसार कुछ चीनी मिलें केवल कागजों पर बिक्री दिखा रही हो सकती हैं, जबकि उनके पास वास्तविक स्टॉक मौजूद है. इसी वजह से अधिकारियों ने स्टॉक के फिजिकल वेरिफिकेशन को और तेज करने का निर्णय किया है। 

पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के रेटों में तेज बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने इससे पहले कहा था कि चीनी का रेट 20 जुलाई को 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम से बढक़र 20 अगस्त 2026 को 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है.

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि चीनी की कीमतों में ग्रोथ के लिए इथेनॉल प्रोडक्शन में चीनी के डायवर्जन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. सरकार के मुताबिक, इथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में करीब 9 प्रतिशत रह गई है.

फिजिकल स्टॉक का वेरिफिकेशन होगा तेज
केंद्र सरकार व प्रदेश सरकारें पहले से ही चीनी मिलों में स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन कर रही हैं. अब इस प्रक्रिया को और तेज किए जाने की उम्मीद है. इसके तहत 10 केंद्रीय सरकारी टीमें राज्यों का दौरा करेंगी। इसका उद्देश्य ये पता लगाना है कि मिलों द्वारा रिपोर्ट किया गया स्टॉक वास्तविक फिजिकल स्टॉक से मेल खाता है या नहीं. साथ ही, ऐसे मामलों की पहचान करना भी इसका मकसद है, जहां आर्टिफिशियल कमी पैदा करने के लिए चीनी को कथित तौर पर बाजार में आने से रोका जा रहा है. राज्यों से यह भी कहा गया है कि वे कार्रवाई तेज करें और जमाखोरी या मुनाफाखोरी में लिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें.

केंद्र सरकार ने देशभर में चीनी डीलरों के लिए एक अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 400 टन की स्टॉक सीमा पहले ही लागू कर दी है. वहीं, 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी.