सरकारी योजना से डेयरी व्यवसाय को मिले पंख, गांव रूपावास के अक्षय ने खड़ा किया 500 पशुओं का कारोबार
MAHENDRA INDIA NEWS, NEW DELHI
मेहनत, लगन और सही दिशा में किए गए प्रयासों से पशुपालन को एक सफल व्यवसाय बनाया जा सकता है। गांव रूपावास निवासी अक्षय ने डेयरी व्यवसाय के माध्यम से इसे साबित किया है। कभी 50 पशुओं से शुरू हुआ परिवार का डेयरी कारोबार आज 500 पशुओं तक पहुंच चुका है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने वाले अक्षय न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि आठ अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करवा रहे हैं। उनका लक्ष्य आने वाले समय में पशुओं की संख्या बढ़ाकर एक हजार तक पहुंचाना है।
पिता बुधराम ने वर्ष 2017 में रखी थी डेयरी व्यवसाय की नींव
अक्षय के परिवार में डेयरी व्यवसाय की शुरुआत वर्ष 2017 में उनके पिता बुधराम ने 50 पशुओं के साथ की थी। शुरुआती दौर में परिवार ने पशुपालन को आजीविका का साधन बनाते हुए धीरे-धीरे अपने कारोबार को आगे बढ़ाया। इसके बाद उनके चाचा राम सिंह भी इस व्यवसाय से जुड़े। उन्होंने सरकारी योजना के तहत हाईटेक मिनी डेयरी यूनिट स्थापित करने का लाभ लेते हुए डेयरी में 50 पशु और शामिल किए। परिवार के सदस्यों की मेहनत और पशुपालन के प्रति लगन से कारोबार का विस्तार होता गया।
सरकारी सहायता से डेयरी व्यवसाय को मिला नया विस्तार
डेयरी व्यवसाय को आधुनिक और बड़े स्तर पर संचालित करने के उद्देश्य से अक्षय ने पिछले वर्ष 50 लाख रुपये की सहायता लेकर और अधिक निवेश किया। सरकारी योजना से मिली सहायता ने उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर दिया। अक्षय के अनुसार, वर्तमान में उनकी डेयरी में कुल 500 पशु हैं। इनमें 20 गोवंश हैं, जबकि शेष भैंस हैं। अक्षय का लक्ष्य भविष्य में डेयरी में पशुओं की संख्या एक हजार तक पहुंचाना है। उनका प्रयास है कि कारोबार को और अधिक बढ़ाया जाए तथा दूध उत्पादन और बिक्री के माध्यम से आय के अवसरों को मजबूत किया जाए।
हर महीने 32 से 37 लाख रुपये के दूध की बिक्री
अक्षय की डेयरी में दूध की बिक्री व्यवसाय का प्रमुख आय स्रोत है। वे दूध को लगभग 75 रुपये प्रति लीटर की दर से बेच रहे हैं। उनके अनुसार, डेयरी से हर महीने करीब 32 से 37 लाख रुपये के दूध की बिक्री होती है। बड़े स्तर पर पशुपालन और दूध की नियमित बिक्री ने इस व्यवसाय को उनके परिवार के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बना दिया है।
अक्षय का मानना है कि पशुपालन को केवल पारंपरिक काम समझने के बजाय एक व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में अपनाया जाना चाहिए। इसके लिए पशुओं की उचित देखभाल, नियमित प्रबंधन और उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग आवश्यक है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर इस क्षेत्र में निवेश करने से युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।
गोबर से भी सालाना आठ लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी
अक्षय ने डेयरी व्यवसाय में पशुओं से प्राप्त होने वाले गोबर को भी अतिरिक्त आय का साधन बनाया है। उनकी डेयरी से निकलने वाले गोबर को ट्रॉली के हिसाब से बेचा जाता है। इसके लिए करीब 2,500 रुपये प्रति ट्रॉली की दर निर्धारित है। अक्षय के अनुसार, गोबर की बिक्री से उन्हें सालाना लगभग आठ लाख रुपये की आमदनी होती है।
आठ लोगों को मिला रोजगार, युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
अक्षय का डेयरी व्यवसाय अब केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। इस कारोबार के माध्यम से आठ अन्य लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। बड़े स्तर पर पशुओं की देखभाल, दूध उत्पादन और डेयरी से जुड़े दैनिक कार्यों के लिए श्रम की आवश्यकता होती है। इस प्रकार उनका व्यवसाय दूसरे लोगों की आजीविका में भी योगदान दे रहा है।
डेयरी घाटे का सौदा नहीं, सही प्रबंधन से बन सकता है लाभकारी व्यवसाय
अक्षय के अनुसार डेयरी व्यवसाय को घाटे का सौदा मानना उचित नहीं है। इसे सफल बनाने के लिए पशुओं की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनके रखरखाव, दूध की बिक्री और उपलब्ध संसाधनों के उपयोग पर भी ध्यान देना जरूरी है। सरकारी सहायता ने उनके परिवार को कारोबार के विस्तार में सहयोग दिया और स्वरोजगार को नई दिशा मिली।