हरियाणा में प्रदेश में स्मार्ट बागवानी का रोडमैप तैयार, एक हजार एकड़ में स्मार्ट बागवानी, डिजिटल क्रांति की ओर मुड़ेंगे प्रदेश के किसान

 
mahendra india news, new delhi

हरियाणा प्रदेश की सरकार किसानों पर विशेष ध्यान दे रही है। किसानों को समय समय पर आधुनिक खेती के लिए जागरूक  करने के साथ बेहतर सुविधा दे रही है। अब इसी कड़ी में प्रदेश के सीएम नायब सिंह सैनी के प्रयासों से खाद्यान्न के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने वाला हरियाणा प्रदेश अब एक और ऐतिहासिक कृषि परिवर्तन की दहलीज पर है। 

हरियाणा प्रदेश सरकार ने एक हजार एकड़ क्षेत्र को अत्याधुनिक स्मार्ट बागवानी के दायरे में लाने का रोडमैप तैयार कर लिया है। यह महत्वाकांक्षी स्कीम सारे हरियाणा में मांग आधारित क्लस्टर माडल से धरातल पर उतरेगी।

आपको बता दें कि जलवायु परिवर्तन, गिरते भूजल स्तर और छोटी होती जोत जैसी गंभीर चुनौतियों के बीच यह पहल एरोपोनिक्स (हवा में खेती), हाइड्रोपोनिक्स (पानी में खेती), वर्टिकल फार्मिंग (बहुमंजिला खेती) और सेंसर-आधारित ग्रीन हाउस तकनीकों से हरियाण के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने जा रही है। इसका सीधा उद्देश्य वर्ष 2030 तक राज्य में बागवानी क्षेत्र को दोगुना और कुल उत्पादन को तीन गुना करना है।

जानें किस जिले को क्या मिली जिम्मेदारी
हरियाणा प्रदेश की सरकार एक हजार एकड़ के टारगेट को मांग और क्लस्टर आधारित माडल पर लागू कर रही है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों को उनकी मौजूदा विशेषज्ञता के आधार पर प्राथमिकता दी जा रही है।

दिल्ली-एनसीआर बेल्ट
बता देें कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और झज्जर जिलों को प्रीमियम और कमर्शियल हाइड्रोपोनिक्स एवं इनडोर वर्टिकल फार्मिंग के लिए चुना गया है। दिल्ली व गुरुग्राम के 5 सितारा होटलों, प्रीमियम सुपर मार्केट के नजदीक होने के कारण यहां लेट्यूस, चेरी टमाटर, रंगीन शिमला मिर्च और स्ट्राबरी जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों की सीधे मार्केटिंग आसान होगी।

इसी के साथ ही सोनीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र पानीपत, अंबाला जिला पहले से ही मशरूम उत्पादन में भारत में अग्रणी हैं। यहां नियंत्रित वातावरण और वर्टिकल रैक प्रणालियों का विस्तार करके कम से कम जगह में मशरूम और बेमौसम सब्जियों का उत्पादन कई गुणा बढ़ाया जाएगा।