हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा ने की दो घंटे की हड़ताल, चेतावनी

 

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हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा ने केंद्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर राष्ट्र व्यापी हड़ताल का समर्थन करते हुए केंद्र व राज्य सरकार की कर्मचारी, मजदूर व विभाग विरोधी नीतियों के खिलाफ दो घण्टे का विरोध प्रदर्शन राज्य उप प्रधान कुलदीप पाबड़ा, राज्य उप प्रधान लादू राम लूनिया की अध्यक्षता में किया गया।


मंच संचालन सचिव सुरेंद्र बैरागी व प्रवीण ने किया। प्र्रदर्शन में मौजूद कर्मचारियों को संबोधित करते हुए सांझा मोर्चा के वरिष्ठ सदस्यों राज्य महासचिव चमन स्वामी, प्रधान रिछपाल संधू, प्रधान सतवीर कड़वासरा,शेर सिंह ,जोधासिंह रंधावा ने बताया कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए कर्मचारी व मजदूर विरोधी श्रम कानून को लागू कर रही है, जो पूरी तरह कर्मचारी एवं मजदूर विरोधी हैं। कर्मचारी एवं मजदूरों के काम के घंटे को भी 8 से बढ़कर 12 घण्टे किए जा रहे हैं,  

यूनियन बनाने के अधिकार को छीना जा रहा है, कर्मचारियों के हकों का हनन किया जा रहा है। इसी प्रकार कर्मचारियों को 58 साल तक विभाग में ईमानदारी से सेवा करने के बाद भी नाम मात्र की पेंशन दी जा रही है, जबकि देश व प्रदेश के सांसद, विधायक, मंत्री, चार-चार पेंशन ले रहे हैं, जो कर्मचारी के साथ घोर अन्याय हो रहा है।

दूसरी ओर प्रदेश सरकार छात्र-छात्राओं एवं आम व्यक्ति की पसंद सुरक्षित एवम सस्ती परिवहन सेवा का निजीकरण करके पूंजीपतियों के हवाले कर रही हैं। योजना की ठेके की इलेक्ट्रिक बसों व ठेके की किलोमीटर स्कीम की बसों को रोडवेज विभाग में बिना  मांग के महंगी दरों पर ठेके पर लेकर लगातार शामिल किया जा रहा है, जिससे रोडवेज विभाग में घाटा लगातार बढ़ रहा है। रोडवेज विभाग में सेवानिवृति के कारण चालक, परिचालकों की बहुत कमी हो गई है।

 इसी प्रकार बसों की मरम्मत करने, सफाई, धुलाई करने वाले कर्मचारियों की भी बहुत कमी हो गई है, जिस कारण बसें वर्कशॉप में खड़ी रहती है। जिससे आम जनता को परिवहन सेवा से वंचित होना पड़ रहा है। सरकार के राजस्व को भी हानि पहुंच रही है और प्राइवेट बसों को फायदा पहुंच रहा है। रोडवेज विभाग में आज हजारों पद खाली पड़े हैं। सरकार प्रदेश की जनसंख्या के आधर पर नई सरकारी बसों को खरीदकर रोडवेज बेड़े में शामिल करनी चाहिए,

जिससे हजारों बेरोजगार युवकों को रोजगार मिलेगा। आम जनता की विपरीत परिस्थितियों में दिन रात सेवा करने वाले रोड़वेज कर्मचारियों की अनेक समस्याओं व मांगों को सरकार जायज मानकर नेताओं से समझौता तो लगातार कर रही है, परन्तु उन जायज मांगों को लागू नहीं कर रही है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में धुन्ध, बारिश एवं कोरोना काल जैसे विपरीत समय में जोखिम भरी ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को जोखिम भत्ता दिया जाए। चालकों -परिचालक, लिपिक, स्टोर कीपर, कैशियर के पद का पे ग्रे बढ़ाया जाए।

देय अर्जित अवकाश कटौती पत्र को वापिस लेकर पूर्व की तरह देय अर्जित अवकाश दिए जाएं। सभी प्रकार की पूर्ण प्रकिया करने वाले 2016 के चालकों को पक्का किया जाए। अड्डा इंचार्ज का नया पद सृजित करके चालकों को प्रमोशन दी जाए। वंचित 2008 के परिचालकों को उपनिरीक्षक के पद पर प्रमोशन की जाए। कर्मशाला के 2018 के ग्रुप डी के कर्मचारियों को कॉमन कैडर से बाहर करके तकनीकी पदों पर प्रमोशन दी जाए। जूता भत्ता, शिक्षा भत्ता, वर्दी भत्ता महंगाई अनुसार बढ़ाया जाए। दादरी डिपो के 52 हेल्परों सहित सभी प्रकार के का कच्चे कर्मचारियों की पॉलिसी बनाकर पक्का किया जाए।

कोरोना समय में खड़ी ठेके की बसों को पेमेन्ट करने के आदेश रद्द करने के पूरे मामले की जांच की जाए। बकाया बोनस का भुगतान किया जाए। सभी डिपो के सभी मार्गों का पुन: सर्वे करवाया जाए। चालक-परिचालकों से आठ घण्टे की ड्यूटी ली जाए। आठ घण्टे की ड्यूटी से अधिक ड्यूटी का ओवर टाईम दिया जाए। वरिष्ठ नेताओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए आगाह किया कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान वार्ता बैठक से करें, अन्यथा मोर्चा बैठक करके आगामी बड़े आंदोलन की घोषणा करने को मजबूर होगा। इस अवसर पर सुरेंद्र कागदाना, सुरेंद्र डूडी, बाबूराम, मेनपाल, प्रहलाद, वीर सिंह, हेमंत आदि कर्मचारी उपस्थित रहे।