CDLU के त्रिवेणी युवा महोत्सव में हरियाणवी संस्कृति की धूम, विद्यार्थियों ने गायन, नृत्य और कला में दिखाई प्रतिभा

 

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चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा में आयोजित चार दिवसीय 13वें त्रिवेणी युवा महोत्सव के तीसरे दिन विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक, साहित्यिक और रचनात्मक प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न मंचों पर आयोजित प्रस्तुतियों में हरियाणवी लोक संस्कृति, भारतीय संगीत, पश्चिमी संगीत, अभिनय और कलात्मक अभिव्यक्ति के विविध रंग देखने को मिले। महोत्सव विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्रदान कर रहा है।


कार्यक्रम की शुरुआत विभिन्न प्रतियोगिताओ के निर्णायक मंडल, युवा कल्याण निदेशक प्रोफेसर मंजू नेहरा, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह, कल्चरल कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर रणजीत कौर, ब्रह्मजीत सिंह, सहायक युवा कल्याण निदेशक राजेश छिकारा सहित विभिन्न महाविद्यालयो के प्राचार्य द्वारा दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदना के साथ हुई।


महोत्सव के दौरान हरियाणवी लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों ने विशेष आकर्षण पैदा किया। ‘जय हरियाणा’ और ‘सूरज ढल गया, अंबर में छाई लाली’ जैसे गीतों की धुनों के बीच प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति दी। पारंपरिक हरियाणवी वेशभूषा दामण, कुर्ती, चुनरी और आभूषणों से सजे कलाकारों ने लोकनृत्य के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मंच पर प्रस्तुत किया। लोक धुनों और ढोलक-नगाड़ों की थाप पर प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। विभिन्न टीमों ने अपने नृत्य और अभिनय के माध्यम से ग्रामीण जीवन, लोक परंपराओं तथा तीज-त्योहारों से जुड़े सांस्कृतिक संदर्भों को भी अभिव्यक्त किया।


इस संबंध में जानकारी देते हुए युवा कल्याण निदेशक प्रोफेसर मंजू नेहरा ने बताया कि तीसरे दिन मुख्य मंच एमपी हॉल में हरियाणवी समूहगान, मिमिक्री और वन एक्ट प्ले की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। समूहगान में प्रतिभागियों ने हरियाणवी संगीत परंपरा को स्वर दिया, जबकि मिमिक्री और एकांकी प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अभिनय, संवाद अदायगी और रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रदर्शन किया।
ऑडिटोरियम में पश्चिमी एकल गायन, पश्चिमी एकल वादन, पश्चिमी समूह गान और सामान्य लोकगीत एकल गायन की प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं। इन प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों ने विभिन्न संगीत शैलियों में अपनी गायन और वादन क्षमता का परिचय दिया। पश्चिमी संगीत की आधुनिक धुनों और लोकगीतों की पारंपरिक मिठास ने महोत्सव के संगीत पक्ष को विविधता प्रदान की।


सी.वी. रमन भवन के सेमिनार हॉल में हिंदी एवं अंग्रेजी भाषण प्रतियोगिताओं के साथ प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का प्रारंभिक चरण आयोजित किया गया। भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों को अपने विचार और तर्क प्रस्तुत करने का अवसर मिला, जबकि प्रश्नोत्तरी के माध्यम से उनकी सामान्य ज्ञान संबंधी तैयारी और बौद्धिक क्षमता को परखने का मंच उपलब्ध हुआ।


वहीं, यूआईटीडीसी भवन में पोस्टर मेकिंग और रंगोली प्रतियोगिताओं के दौरान विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा सामने आई। प्रतिभागियों ने रंगों, रेखाओं और विभिन्न रचनात्मक अवधारणाओं के माध्यम से अपने विचारों को दृश्य रूप दिया। इन प्रतियोगिताओं ने विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता और कलात्मक कौशल को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।
महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गायक वरिंदर संधू की प्रस्तुति ने भी श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने ‘विजे माँवा दे’ और ‘ते कावां वे, सुन कावां’ जैसे गीत प्रस्तुत किए। लोकसंगीत से जुड़ी उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भरते हुए श्रोताओं को लोक धुनों की भावपूर्ण दुनिया से जोड़ा।


त्रिवेणी युवा महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को मंच प्रदान करने के साथ उनकी रचनात्मकता, अभिव्यक्ति कौशल और सांस्कृतिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने से भी जुड़ा है। विभिन्न विधाओं में आयोजित प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। महोत्सव के तीसरे दिन की गतिविधियों ने विश्वविद्यालय परिसर में सांस्कृतिक विविधता, कलात्मक अभिव्यक्ति और युवा सहभागिता का वातावरण बनाया। इस अवसर पर प्रोफेसर अशोक मालिक, प्रोफेसर रविंद्र, डॉ दीपक पाठक, डॉ किरण, मुस्कान, योगेश आदि उपस्थित थे।