भीषण गर्मी और लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी जारी, नागरिक बरतें सावधानी
Health department issues advisory regarding intense heat and heatwave; citizens should take precautions
स्वास्थ्य विभाग हरियाणा द्वारा भीषण गर्मी और लू को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। कार्यकारी सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद शर्मा ने बताया कि जिले में गर्मी व हीट वेव के संभावित प्रभावों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हैं।
उन्होंने बताया कि तापमान में बढ़ोतरी को देखते हुए स्वास्थ्य संस्थानों को विशेष तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि हीट स्ट्रोक और गर्मी से संबंधित बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। सभी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में हीट स्ट्रोक प्रबंधन इकाइयों को सक्रिय रखने, आइस पैक, ठंडे आईवी फ्लूड्स व अन्य कूलिंग व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि बढ़ती गर्मी और हीट वेव (लू) की स्थिति शरीर की कार्य प्रणाली पर प्रभाव डाल सकती है, जिससे व्यक्ति गंभीर रुप से बीमार पड़ सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे हीट वेव के दौरान विशेष सावधानी बरतें। दस्त होना, हल्का बुखार आना और अत्यधिक प्यास लगना भी शरीर में गर्मी और पानी की कमी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस और तरल पदार्थों का सेवन करें तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।
क्या करें:
डा. प्रमोद ने बताया कि हीट स्ट्रोक के लक्षण जैसे कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, उबकाई, अत्यधिक पसीना आना और मूर्छा आदि को पहचानना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार की परेशानी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। डॉ. शर्मा ने कहा कि गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए। अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए, भले ही प्यास न लगी हो। यात्रा के दौरान अपने साथ पानी अवश्य रखें। ओआरएस, लस्सी, नींबू पानी, छाछ, चावल का पानी (माड़) जैसे घरेलू पेय पदार्थों का सेवन लाभदायक होता है। इसके अलावा तरबूज, खरबूजा, संतरा, अंगूर, अनानास, खीरा और ककड़ी जैसे पानी की अधिक मात्रा वाले मौसमी फल एवं सब्जियों का सेवन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शरीर को पूरी तरह ढककर रखना भी जरूरी है। हल्के रंग के सूती एवं पसीना सोखने वाले कपड़े पहनें। धूप में निकलते समय चश्मा, छाता, टोपी और चप्पल / जूते का उपयोग करें। खुले में कार्य करने वाले लोग सिर, चेहरा, हाथ और पैरों को गीले कपड़े से ढककर रखें और छाते का प्रयोग करें।
कार्यकारी सिविल सर्जन ने बताया कि यथासंभव घर, कार्यालय या ठंडी एवं हवादार जगहों पर ही रहें। घरों में दिन के समय खिड़कियां, पर्दे और दरवाजे बंद रखें ताकि गर्म हवा और धूप अंदर न आए, जबकि शाम और रात के समय इन्हें खोल दें ताकि कमरों में ठंडक बनी रहे। बाहर जाने की स्थिति में बीच-बीच में आराम करें तथा पंखे और गीले कपड़ों का प्रयोग करें। उन्होंने पशुपालकों से भी अपील की कि वे जानवरों को छायादार स्थान पर रखें और उन्हें पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाएं।
डॉ. शर्मा ने कहा कि एक वर्ष से कम आयु के शिशु, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बाहरी वातावरण में कार्य करने वाले व्यक्ति, हृदय रोगी, उच्च रक्तचाप से पीडि़त लोग तथा ठंडे क्षेत्रों से गर्म क्षेत्रों में आने वाले व्यक्ति की विशेष देखभाल की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग और अकेले रहने वाले बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करनी चाहिए। दिन के समय घर के निचले तल पर रहने का प्रयास करें तथा शरीर का तापमान कम रखने के लिए पंखे और गीले कपड़ों का प्रयोग करें।
क्या न करें:
डा. प्रमोद ने नागरिकों को यह भी सलाह दी कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से बचें। नंगे पैर बाहर न जाएं और भारी, गहरे रंग तथा तंग कपड़े पहनने से परहेज करें। अधिक प्रोटीन वाले एवं बासी भोजन का सेवन न करें। बच्चों और पालतू जानवरों को खड़ी गाडिय़ों में अकेला न छोड़ें। अत्यधिक गर्मी में कठिन श्रम वाले कार्य न करें तथा खाना बनाते समय रसोई को हवादार रखें। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि गर्मी के मौसम में सतर्क रहें और अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
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भौगोलिक संदर्भ
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