4 वर्ष से लंबित रविदास भवन प्रकरण में फिर हुई सुनवाई, शिकायतकर्तओं ने निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई

 

Mahendra india news, new delhi
सिरसा। ग्राम ख्योंवाली स्थित अनुसूचित जाति धर्मशाला (रविदास भवन) प्रकरण में बुधवार को खण्ड विकास एवं पंचायत कार्यालय, औढ़ां में शिकायतकर्ता बृजलाल एवं सुभाष चंद्र सहित अन्य शिकायतकर्ताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2022 से लंबित इस मामले में चार वर्षों के दौरान उन्हें दूसरी बार सुनवाई के लिए बुलाया गया। उनके अनुसार सुनवाई के दौरान अधिकारियों द्वारा उपस्थिति दर्ज करने के लिए फोटो एवं वीडियो भी लिए गए।

सुनवाई के दौरान शिकायतकतार्ओं ने अधिकारियों के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए तथा उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। उनका कहना है कि इस मामले में सरकारी रिकॉर्ड में कथित अनियमितताएं, भवन को कण्डम घोषित करने की प्रक्रिया, सरकारी संपत्ति को नुकसान, हरे-भरे पेड़ों की कटाई, उपायुक्त के आदेशों के पालन तथा सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जा एवं निर्माण जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार वर्ष 2018 में धर्मशाला के खिड़की-दरवाजों की नीलामी का रिकॉर्ड पंचायत अभिलेखों में उपलब्ध है, जबकि बाद की एक विभागीय रिपोर्ट में उन्हीं खिड़की-दरवाजों को चोरी होना बताया गया। उनका कहना है कि जनवरी 2022 में भवन को नुकसान पहुंचाया गया, हरे-भरे पेड़ काटे गए तथा बाद में भवन को कण्डम घोषित करने की प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताएं हुईं।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा कि उपायुक्त, सिरसा द्वारा भवन को कण्डम घोषित करते समय मलबे की सार्वजनिक नीलामी, बीडीपीओ की देखरेख में कार्रवाई, पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी तथा नीलामी की राशि पंचायत खाते में जमा कराने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। उनका आरोप है कि वर्ष 2026 में भवन को ध्वस्त किए जाने के दौरान इन निदेर्शों का पालन नहीं किया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2022 से 2026 तक विभिन्न विभागों एवं पुलिस अधिकारियों द्वारा एक ही मामले में अलग-अलग एवं परस्पर विरोधाभासी रिपोर्टें प्रस्तुत की गईं। वहीं उप-मण्डल अधिकारी (ना.), कालांवाली द्वारा गठित विजिलेंस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बिना अनुमति निर्माण, बिना अनुमति कमरों को तोड़े जाने तथा हरे-भरे पेड़ों की कटाई का उल्लेख किया है। सुनवाई के दौरान पूर्व सरपंच रीना बिरट भी उपस्थित रहीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि खण्ड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ), औढ़ां ने शिकायतों के तथ्यों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई और सुनवाई के दौरान फोटो एवं वीडियो लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को दिखाने हेतु रिकॉर्ड तैयार करने पर अधिक ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेजों, साक्ष्यों एवं बयानों को जांच रिकॉर्ड का हिस्सा बनाकर निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता बृजलाल, सुभाष चंद्र सहित अन्य शिकायतकर्ताओं ने अपने-अपने बयान दर्ज कराए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार उनके बयानों और प्रस्तुत दस्तावेजों को विधिवत जांच रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।