मानसून की बरसात के मौसम मेें ऐसे रखें पशुओं, इन रोगों के फैलने का रहता है डर
mahendra india news, new delhi
मानसून की जगह जगह बरसात हो रही है। इस मौसम में पशुओं का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी हो जाता है। अगर पशुओं पर इस मौसम में ध्यान नहीं दिया जाता है तो रोगों के फैलने का हमेशा डर बना रहता है। बारिश के मौसम में पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें जल-जमाव से बचाएं, साफ-सुथरे सूखे बाड़े में रखें, तथा गलघोंटू और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाव के टीके लगवाएं।
पशु चिकित्सक डा. संदीप ने बताया कि फंगल संक्रमण और थनैला रोग से बचाने के लिए उन्हें ताजा चारा-पानी दें और बासी चारा न खिलाए, पशुशाला का फर्श पक्का, ऊंचा और ढलानदार होना चाहिए ताकि पानी जमा न हो, छत से पानी का रिसाव नहीं होना चाहिए
टीकाकरण और दवाइयां: मानसून शुरू होने से पहले ही पशु चिकित्सकों की सलाह से एचएस (गलघोंटू), बीक्यू (लंगडय़िा) और एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) के टीके अवश्य लगवाएं, पशुओं के पेट के कीड़े (डिवार्मिंग) मारने की दवा भी दें, आहार और पेयजल: पशुओं को हमेशा ताजा और सूखा चारा खिलाए, भीगा या फफूंद लगा चारा देने से पशुओं में पाचन संबंधी समस्याएं और फंगल बीमारियां हो सकती हैंख्, पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध कराएं, दुधारू पशुओं के थनों में नमी और गंदगी के कारण थनैला रोग का खतरा बढ़ जाता है, दूध निकालने से पहले और बाद में थनों को एंटीसेप्टिक घोल से अच्छी तरह साफ करें।
मच्छर-मक्खियों से बचाव:
पशु बाड़े में नमी और जलभराव के कारण मक्खी-मच्छर अधिक पनपते है, इससे बचाव के लिए बाड़े में नियमित रूप से चूने का छिडक़ाव करें और शाम के समय धुआं अवश्य करें, पशुओं में तेज बुखार, मुंह या नाक से पानी आना, अत्यधिक लार, लंगड़ापन या दस्त जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अपने समीप के पशु चिकित्सक से संपर्क करें।