ब्रह्मज्ञान रूपी दिव्य ज्योति को अपने भीतर प्रज्वलित करने से मिलेगी शांति और आनंद: साध्वी जी

 

सिरसा/रतिया।  गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज के दिव्य एवं वृहद लक्ष्य के अंतर्गत दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के मंगलमय तत्वावधान में रतिया की पुण्य धरा मां की चौकी के दिव्य एवं अलौकिक महा-अनुष्ठान से भक्तिमय हो उठी। इंपीरियल गार्डन के मनोरम परिसर में सायं 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक आयोजित माता की चौकी महा-अनुष्ठान का शुभारंभ पंजाबी सभा प्रधान सतीश हांडा, पंजाबी सभा के पूर्व प्रधान नवनीत मेहता व रघुनाथ मंदिर कमेटी के प्रधान सुभाष चुघ ने सह-परिवार ज्योति प्रज्ज्वलित करके किया। इस महा-अनुष्ठान में भाजपा

जिलाध्यक्ष प्रवीण जोड़ा, महाशक्ति चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान भवानी सिंह, बीएल बत्रा, विज्ञान सागर बाघला, विद्या सागर बाघला, अंकित सिंगला, जैकी गर्ग, शाम लाल बांसल, सुरेश मंगला, पुजारा लाल चुघ, मिट्ठू सिंगला, कपिश गुप्ता आदि अनेक गणमान्य व्यक्तियों सहित रतिया व आस-पास के क्षेत्र से हजारों श्रद्धालुओं ने सपरिवार भाग लेकर मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रख्यात भजन-प्रवक्ता साध्वी भावअर्चना भारती ने आशुतोष महाराज के अन्य शिष्यों के साथ मंच से अपनी भाव-विभोर कर देने वाली दिव्य वाणी एवं मां के गुणगान से ओत-प्रोत मधुर भजनों द्वारा समूचे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।

उनकी स्वर-लहरियों ने श्रद्धालुओं के हृदय-पटल को भक्ति के अनहद नाद से गुंजायमान कर दिया। साध्वी जी ने जन-जन को आत्म-साक्षात्कार के दिव्य पथ के प्रति जागृत करते हुए बताया कि बाह्य आडंबरों से हटकर जब मानव ब्रह्मज्ञान रूपी दिव्य ज्योति को अपने भीतर प्रज्वलित करता है, तभी वह शाश्वत शांति और आनंद को प्राप्त होता है। साध्वी जी के ओजस्वी उद्गार सुनकर समूचा पंडाल भारत माता की जय और जय माता दी के गगनभेदी जयघोषों से गूंज उठा।

श्रद्धालुओं ने ध्यान-साधना एवं सत्संग का लाभ लेकर जीवन को सार्थक दिशा देने तथा माता-पिता की सेवा व राष्ट्र-सेवा का संकल्प लिया। कार्यक्रम में पधारे सभी धमार्नुरागी भक्तों के लिए प्रेम-पूर्वक लंगर रूपी महाप्रसाद की स्नेहिल व्यवस्था रही, जिसे श्रद्धालुओं ने ग्रहण कर पुण्य लाभ कमाया। संस्थान से स्वामी प्रेमानंद ने बताया कि गुरुदेव के मिशन के अनुरूप ऐसे आयोजनों का उद्देश्य जन-मानस को नशा, अवसाद एवं दिशाहीनता से मुक्त कर ब्रह्मज्ञान द्वारा शांतिमय समाज का निर्माण करना है। श्रद्धालुओं ने तन-मन-धन से सेवा-सहयोग कर अक्षय पुण्य अर्जित किया। कार्यक्रम का समापन मां भगवती की महाआरती एवं विश्व कल्याण की मंगल कामना के साथ हुआ।