नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के गांव में आंधी से डेयरी की छत गिरने ले मलबे में दबी गायें, एक गाय गंभीर घायल; ग्रामीणों ने मुश्किल से निकाला

 
mahendra india news, new delhi 

नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के गांव जोगीवाला में तेज आंधी और तूफान के कारण एक पशु डेयरी की छत अचानक उड़कर गिर गई, जिससे अंदर बंधी करीब 20 गायें मलबे के नीचे दब गईं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।सूचना मिलने पर ग्रामीणों ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर सभी गायों को बाहर निकाला। घटना में कई पशु घायल हुए हैं, जबकि एक गाय को गंभीर चोट लगी है, 


जानकारी के अनुसार चौपटा क्षेत्र के जोगीवाला गांव निवासी किसान जयवीर बैनिवाल की पशु डेयरी में करीब 40 गायों का पालन-पोषण किया जाता है। सोमवार दोपहर करीब एक से दो बजे के बीच अचानक तेज आंधी और तूफान आया। जयवीर के अनुसार, तेज हवा का दबाव डेयरी के अंदर पहुंच गया और हवा का गुब्बारा बनते ही छत ऊपर की ओर उखडऩे लगी। इसके बाद जोरदार झटके के साथ छत का ढांचा असंतुलित हो गया और गाटर, सरकंडा व अन्य निर्माण सामग्री नीचे गिर गई।उन्होंने बताया कि छत गिरते ही डेयरी में बंधी 21 गायें मलबे के नीचे दब गईं। 

इस घटना का पता चलते ही गांव के लोग मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने सबसे पहले गायों को खूंटों से बांधी गई रस्सियों से मुक्त किया और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। साथ ही छत का टूटा हुआ सामान और मलबा हटाने का काम भी किया गया। जयवीर बेनिवाल ने बताया कि कुछ गायों को शुरुआती समय में ही बाहर निकाल लिया गया था, इसलिए उन्हें ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। हालांकि डेयरी के अंदर की ओर बंधी गायों को अधिक चोटें लगी हैं। एक गाय की कमर में गंभीर चोट आई है, जिसके कारण वह खड़ी नहीं हो पा रही है। 

अन्य घायल पशुओं का भी उपचार कराया जा रहा है।राहत कार्य में ग्रामीणों ने बढ़-चढक़र सहयोग किया। मलबा हटाने के लिए जेसीबी और ट्रैक्टर की सहायता ली गई। पूरे दिन चले अभियान के बाद देर शाम तक डेयरी को खाली कराया जा सका। किसान जयवीर बेनिवाल ने प्रशासन और सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की है। उनका कहना है कि तूफान से उन्हें भारी नुकसान हुआ है। जोगीवाला गांव के सरपंच अनिल बेनिवाल ने बताया कि तेज आंधी और तूफान के कारण गांव में कई स्थानों पर पेड़ टूट गए तथा बिजली के खंभों को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि जयवीर की डेयरी की छत गिरने से पशुओं को चोटें आई हैं, लेकिन ग्रामीणों की तत्परता से बड़ा नुकसान टल गया।