HARYANA में देसी गाय और मुर्राह भैंस पालकों को सरकार दे रही 40 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन

 

Mahendra india news, new delhi

हरियाणा सरकार ने प्रदेश में स्वदेशी गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और उच्च दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्वदेशी गौवंश संरक्षण एवं विकास (गोसंवर्धन) तथा एकीकृत मुर्राह विकास योजना लागू की है। इस योजना के तहत राज्य के पात्र पशुपालकों को उनकी उच्च दुग्ध उत्पादन वाली देसी गायों और मुर्राह भैंसों पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। योजना का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी नस्लों की संख्या बढ़ाना, पशुपालकों की आय में वृद्धि करना तथा डेयरी क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाना है।

ऐसे मिलेगा योजना का लाभ

योजना के अनुसार केवल हरियाणा राज्य के निवासी पशुपालक ही इसका लाभ प्राप्त कर सकेंगे। आवेदक की आयु 18 वर्ष या इससे अधिक होना अनिवार्य है। यह योजना व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए है, इसलिए किसी समूह, संस्था, फर्म या संगठन को इसके अंतर्गत आवेदन करने की अनुमति नहीं होगी। प्रत्येक पात्र आवेदक अधिकतम चार दुधारू पशुओं पर ही प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर सकेगा। योजना के अंतर्गत केवल हरियाना, साहीवाल और बेलाही नस्ल की देसी गायों तथा मुर्राह नस्ल की भैंसों को शामिल किया गया है। चयनित पशुओं के दूध उत्पादन का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। साहीवाल और हरयाना नस्ल की गायों पर अधिकतम 25 हजार रुपये तक, बेलाही गाय पर 15 हजार रुपये तक तथा मुर्राह भैंस पर 40 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है।

*उत्पादन अनुसार ये मिलेगी प्रोत्साहन राशि*

योजना के तहत साहीवाल नस्ल की गाय के 10 से 12 किलोग्राम दूध उत्पादन पर 15 हजार रुपये, 12 से 15 किलोग्राम पर 20 हजार रुपये तथा 15 किलोग्राम से अधिक उत्पादन पर 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। इसी प्रकार हरयाना नस्ल की गाय के 8 से 10 किलोग्राम दूध उत्पादन पर 15 हजार रुपये, 10 से 12 किलोग्राम पर 20 हजार रुपये और 12 किलोग्राम से अधिक उत्पादन पर 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। बेलाही नस्ल की गाय के लिए 5 से 8 किलोग्राम दूध उत्पादन पर 5 हजार रुपये, 8 से 10 किलोग्राम पर 10 हजार रुपये तथा 10 किलोग्राम से अधिक उत्पादन पर 15 हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई है। मुर्राह भैंस पालकों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। 18 से 22 किलोग्राम दूध उत्पादन करने वाली मुर्राह भैंस पर 20 हजार रुपये, 22 से 25 किलोग्राम उत्पादन पर 30 हजार रुपये तथा 25 किलोग्राम से अधिक दूध उत्पादन करने पर 40 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि दूध उत्पादन का रिकॉर्ड तैयार होने और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पशुपालकों को प्रदान की जाएगी।

इन शर्तों का करना होगा पालन

सघन पशुधन विकास परियोजना के उपनिदेशक डॉ सुखविंद्र सिंह ने बताया कि योजना के तहत लाभ प्राप्त करने वाले पशुपालकों को कुछ शर्तों का पालन करना होगा। लाभार्थी पशुपालक को पंजीकृत देसी गाय या मुर्राह भैंस तथा उसकी नर संतान को कम से कम एक वर्ष तक नहीं बेचना होगा। इसके अलावा बछड़ों और कटड़ों की उचित देखभाल करना अनिवार्य होगा। विभाग को आवश्यकता पड़ने पर इन पशुओं को खरीदने का प्रथम अधिकार भी प्राप्त होगा। यदि कोई लाभार्थी निर्धारित शर्तों का पालन नहीं करता है तो वह प्रोत्साहन राशि का पात्र नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि किसी विशेष दुग्धारू पशु पर उसके पूरे जीवनकाल में अधिकतम 3 बार ही प्रोत्साहन राशि प्राप्त की जा सकती है। इसके अतिरिक्त पंजीकृत पशुओं का प्रजनन कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से करवाना अनिवार्य होगा ताकि नस्ल सुधार और गुणवत्तापूर्ण पशुधन को बढ़ावा दिया जा सके। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदकों को परिवार पहचान पत्र, पैन कार्ड तथा बैंक पासबुक या रद्द किया हुआ चेक जमा कराना होगा।