जिंदगी का ये अनोखा गणित, हरियाणा में जुड़वा भाई, साथ पढ़े, दोनों गणित टीचर, अब आज एक साथ ही होंगे रिटायर्ड, शादी के बंधन में भी एक दिन साथ बंधे

 

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सिरसा जिला के गांव नाथूसरी कलां के दो जुड़वा भाई की अनोखी कहानी है। जिंदगी की शुरूआत एक साथ की, शादी के बंधन में भी एक दिन साथ बंधे। वह भी दो बहनों के साथ रानियां क्षेत्र के गांव नानुआना में। यह गजब के गुरू हैं गांव नाथूसरी कलां के। गांव निवासी पूर्ण सिंह के जुड़वा बेटे रोहताश कुमार व रघुवीर सिंह दोनों एक साथ पढ़े लिखे। इसके बाद शिक्षा विभाग में गणित टीचर  के पद पर कार्यभार संभाला। दोनों भाई आज वीरवार यानि 30 जुलाई 2026 को रिटायर्ड हो रहे हैं। 

गांव नाथूसरी कलां निवासी रोहताश कुमार व रघुबीर सिंह का 9 जुलाई 1968 को जन्म हुआ। इसके बाद दोनों भाईयों ने नाथूसरी चौपटा के राजकीय स्कूल से दसवीं कक्षा की पढ़ाई की। बाद में इन्होंने राजकीय नेशनल कॉलेज में बीए की पढ़ाई करने के बाद बीएड की हिसार के साधु राम कॉलेज में पढ़ाई की।


 

गणित अध्यापक पहले लगा रोहताश कुमार 
रोहताश कुमार ने शिक्षा विभाग में 28 जुलाई 1994 को चौपटा के राजकीय स्कूल में अध्यापक के पद पर कार्यभार संभाला। इसके बाद तरकांवाली व शक्करमंदोरी के राजकीय स्कूल में सेवाएं दी। वर्ष 2021 में पदोन्नति होकर मुख्यअध्यापक के पद पर नियुक्त हुए। वहीं उन्होंने रूपाना बिश्रोईयां में अपनी सेवाएं दी। अब इसी स्कूल से रिटायर्ड होंगे।

एक साल बाद सरकारी नौकरी में लगा रघुबीर सिंह 
रघुबीर सिंह 16 अगस्त 1995 में शिक्षा विभाग के अंदर मेथ अध्यापक के पद पर गांव लुदेसर के राजकीय स्कूल में कार्यभार संभाला। यहां पर 6 साल की सेवाएं देने के बाद शाहपुरिया गांव के स्कूल में 20 साल तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2021 में मुख्यअध्यापक के पद पर पदोन्नति हुए। इसके बाद रामपुरा ढिल्लो व तरकांवाली में अपनी सेवाएं दी। अब तरकांवाली के राजकीय स्कूल से रिटायर्ड होंगे।

साईकिल या पैदल ही समय पर पहुंच जाते स्कूल
रोहताश कुमार व रघुबीर सिंह हमेशा समय पर स्कूल में पहुंचते थे। दोनों भाई कभी घर से साईकिल पर तो कभी पैदल ही स्कूल में पहुंच जाते थे। मौजूदा समय में भी दोनों साईकिल चलाना ही पसंद करते हैं। इनसे शिक्षा लेकर चिख्कित्सक, इंजीनियर, अध्यापक, सेना से लेकर हर क्षेत्र में बच्चे कामयाब हुए हैं। 

पिता को मनाते हैं आदर्श 
रोहताश कुमार व रघुबीर सिंह ने बताया कि हमारे आदर्श पिता पूर्ण सिंह हैं। जिन्होंने हमेशा कहा  मेहनत व ईमानदारी से कार्य करना। उनको आदर्श मानते हुए जिस भी स्कूल में रहे, वहां पर बच्चों शिक्षित करने का कार्य किया। हमें खुशी है कि आज हमारे पढ़ाए हुए बच्चे अच्छे मुकाम पर हैं। 

मेरे भी गुरू हैं 
मैंने रघुबीर व रोहताश सर से नौवीं कक्षा में शिक्षा ग्रहण की। जब भी मिलते हैं हमेशा स्नेह भरे शब्दों में चर्चा शुरू करते हैं। इनसे प्रेरणा लेकर हमें आगे बढऩा चाहिए। शिक्षा विभाग से रिटायर्ड होने से एक दिन पहले बुधवार को इनसे मुलाकात हुई। वह भी गुरू पूर्णिमा के दिन। 
महेंद्र सिंह मेहरा, वरिष्ठ पत्रकार
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