CDLU SIRSA में भारतीय भाषा परिवार सम्मेलन का शुभारम्भ

 
Indian Language Family Conference inaugurated at CDLU SIRSA
 

 Mahendra india news, new delhi
 चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के मानविकी संकाय द्वारा आयोजित ‘भारतीय भाषा परिवार सम्मेलन’ का शुभारम्भ मंगलवार को टैगोर भवन एक्सटेंशन में हुआ। भारतीय भाषाओं की एकता, संरचना और सांस्कृतिक समृद्धि पर केंद्रित यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित की जा रही है।


कार्यक्रम में इतिहास संकलन समिति के प्रांत कार्यकारी अध्यक्ष एवं जाने माने शिक्षाविद राम सिंह यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई जिसने पूरे वातावरण को गरिमामय बना दिया। मुख्य अतिथि राम सिंह यादव ने कहा कि भारतीय भाषाएँ केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा, संस्कृति और सभ्यता की जीवंत धरोहर हैं। भारत की विविध भाषाओं में निहित सामंजस्य हमारी सामाजिक शक्ति का अद्भुत उदाहरण है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी मातृभाषाओं को आत्मविश्वास के साथ अपनाएँ, उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ें और युवा पीढ़ी को भाषा-आधारित शोध एवं नवाचार की ओर प्रेरित करें। ऐसे सम्मेलन न केवल ज्ञान का आदान-प्रदान करते हैं, बल्कि राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का माध्यम भी बनते हैं।


उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर भारतीय भाषाओं की बढ़ती स्वीकार्यता इस बात का प्रमाण है कि हमारी भाषाएँ भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। हमें इन्हें केवल विरासत के रूप में नहीं बल्कि विकास के साधन के रूप में भी देखना चाहिए।
उद्धघाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा कि चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को अपनी शैक्षणिक प्रतिबद्धता के मूल में रखता है। देशभर से आए विद्वानों का यह संगम भाषाई अध्ययन को नई दिशा देगा। यह सम्मेलन शोध, विमर्श और ज्ञान-सृजन का ऐसा मंच है, जहाँ भारतीय भाषाओं के वैश्विक महत्व पर नए दृष्टिकोण विकसित होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में भाषा एवं संस्कृति से जुड़े और अधिक राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित करने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने अनेक अनुकरणीय उदहारण दे कर प्रतिभागियों को भारतीय भाषा परिवार को सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित किया।


विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि भारतीय भाषाओं की जड़ें हमारी सामाजिक संरचना में गहराई से जुड़ी हैं। हमें आवश्यकता है कि प्रशासन, शिक्षा और शोध के हर स्तर पर भारतीय भाषाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। ऐसे कार्यक्रम न केवल भाषाई चेतना बढ़ाते हैं, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी मूल भाषाई पहचान से जोड़े रखते हैं।

संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में भारतीय भाषाओं की उत्पत्ति, विकास और भाषा परिवारों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, भाषाई एकता, अनुवाद, बोली-विविधता और सांस्कृतिक सेतु पर शोधपत्र प्रस्तुतियाँ, युवा शोधार्थियों के लिए संवाद-सत्र भाषा संरक्षण और भाषाई नवाचार के नए तरीक़ों पर चर्चा उत्साह के साथ संपन्न हुए। मानविकी संकाय के डीन एवं सम्मेलन समन्वयक प्रो. पंकज शर्मा ने बताया कि कुलगुरु प्रो. विजय कुमार के मार्गदर्शन में यह राष्ट्रीय आयोजन हिंदी, पंजाबी, संस्कृत तथा अंग्रेज़ी एवं विदेशी भाषा विभाग के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में स्थानीय संयोजक प्रो. अनु शुक्ला ने सभी का स्वागत किया। सहसंयोजक प्रो. उमेद सिंह ने सभी का धन्यवाद किया। मंच का सफलतापूर्वक संचालन डॉ भूमिका द्वारा किया गया।


कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र से प्रो. रामचंद्र, केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ से प्रो. बीर पाल व डॉ कमलेश, प्रो. अशोक मलिक, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. राजकुमार, प्रो. रणजीत कौर, डॉ रोहतास, प्रो. राजबीर दलाल सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों तथा महाविद्यालयों से आए विद्वानों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।