एप्लीकेशन ऑफ स्पेक्ट्रोमेट्री बेस्ड मेटाबोलोमिक्स इन प्लांट रिसर्च एंड एलाइड एरियाज विषय पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन
Mahendra india news, new delhi
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के वनस्पति विज्ञान विभाग ने यूनिवर्सिटी साइंस इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर (USIC) के सहयोग से एप्लीकेशन ऑफ स्पेक्ट्रोमेट्री बेस्ड मेटाबोलोमिक्स इन प्लांट रिसर्च एंड एलाइड एरियाज (Application of Spectrometry-Based Metabolomics in Plant Research and Allied Areas) विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। कार्यक्रम ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं वैज्ञानिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर इस प्रकार के कार्यक्रम वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देते हैं तथा राष्ट्र निर्माण में विज्ञान की भूमिका को सुदृढ़ करते हैं। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार ने भी वेबिनार की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।
मुख्य वक्ता के रूप में कतर विश्वविद्यालय, दोहा के रिसर्च एसोसिएट डॉ. दीपक कसोटे ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने व्याख्यान में डॉ. कसोटे ने मेटाबोलोमिक्स की अवधारणा को सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने बताया कि स्पेक्ट्रोमेट्री आधारित तकनीकों के माध्यम से पौधों के मेटाबोलाइट्स की पहचान कैसे की जाती है और यह पद्धति पौधों की वृद्धि, तनाव सहनशीलता, रोग प्रतिरोधक क्षमता, पोषण गुणवत्ता तथा औषधीय गुणों को समझने में किस प्रकार सहायक है। उन्होंने वास्तविक शोध उदाहरणों के माध्यम से यह भी स्पष्ट किया कि मेटाबोलोमिक्स कृषि, जैव प्रौद्योगिकी और पौध विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उभर रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं यूएसआईसी निदेशक प्रो. एम. के. किदवई के स्वागत संबोधन से हुआ। मुख्य वक्ता का औपचारिक परिचय डॉ. ज्योति रानी ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में धन्यवाद प्रस्ताव फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. संजू बाला ढुल ने प्रस्तुत किया।
वेबिनार के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तरी सत्र अत्यंत संवादात्मक रहा। प्रतिभागियों ने शोध डिजाइन, डेटा विश्लेषण एवं मेटाबोलोमिक्स अनुसंधान की व्यावहारिक चुनौतियों से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. कसोटे ने विस्तार पूर्वक उत्तर दिया और युवा शोधार्थियों को उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
आयोजन की सफलता में डॉ. मंजू नेहरा (FST), डॉ. धर्मवीर अहलावत (भौतिकी) एवं प्रो. जे. एस. दुहन (बायोटेक्नोलॉजी) का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के सुचारू संचालन में संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, तकनीकी स्टाफ एवं स्वयंसेवकों नीलम, ममता, संदीप, साहिल, दीपक एवं विभूति का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वेबिनार में लगभग 184 प्रतिभागियों ने भाग लिया। देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा; बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी; भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली; पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना; केरल कृषि विश्वविद्यालय; बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल; जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर; चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार; एसकेएन एयू, जोबनेर (जयपुर) सहित अनेक विश्वविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों से प्रतिभागियों की सहभागिता रही।