जेसीडी कॉलेज ऑफ फार्मेसी की छात्रा भावना ने जीपैट परीक्षा में मारी बाजी

 
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 जेसीडी विद्यापीठ के अंतर्गत स्थापित जेसीडीएम कॉलेज ऑफ फार्मेसी की प्रतिभाशाली छात्रा भावना ने जीपैट (ग्रेजुएट फार्मेसी एप्टीट्यूड टेस्ट) परीक्षा उत्तीर्ण कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे संस्थान का नाम गौरवान्वित किया है। उसकी इस उपलब्धि से संस्थान में खुशी और गर्व का माहौल है।

इस अवसर पर जेसीडी विद्यापीठ के महानिदेशक प्रोफेसर डॉ. जय प्रकाश ने भावना को बधाई देते हुए कहा कि उसकी सफलता यह सिद्ध करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदार हों, तो कोई भी सफलता दूर नहीं रहती। उन्होंने कहा कि भावना ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर यह मुकाम हासिल किया है, जो अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है।

डॉ. जय प्रकाश ने आगे कहा कि जेसीडीएम संस्थान विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी उचित मार्गदर्शन प्रदान करता है। यही कारण है कि यहां के विद्यार्थी विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में जीपैट जैसी परीक्षा में सफलता प्राप्त करना आसान नहीं है, लेकिन भावना ने यह साबित कर दिया कि समर्पण और सही दिशा में किया गया प्रयास हमेशा सफलता दिलाता है।

उन्होंने भावना के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि वह आगे भी इसी तरह सफलता के नए आयाम स्थापित करेगी और संस्थान का नाम रोशन करती रहेगी। साथ ही उन्होंने अन्य विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भी भावना से प्रेरणा लेते हुए अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहें और निरंतर मेहनत करते रहें।

इस उपलब्धि पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मोहित कुमार ने भी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि बी.फार्मेसी छठे सेमेस्टर की छात्रा भावना, सुपुत्री श्री नरेश कुमार ने 90.08 परसेंटाइल प्राप्त कर जीपैट परीक्षा क्वालीफाई की है। उन्होंने कहा कि यह सफलता भावना की मेहनत, लगन और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। डॉ. मोहित कुमार ने अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरित करते हुए कहा कि यदि वे भी इसी प्रकार लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करेंगे, तो निश्चित रूप से सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

संस्थान के समस्त स्टाफ और विद्यार्थियों ने भावना को इस शानदार उपलब्धि पर हार्दिक बधाई दी और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। भावना की यह सफलता न केवल उसके व्यक्तिगत जीवन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे संस्थान के लिए गर्व का विषय बन गई है।