जेसीडी डेंटल कॉलेज SIRSA का शोध अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित

 

Mahendra india news, new delhi
सिरसा : जेसीडी विद्यापीठ में स्थित जेसीडी डेंटल कॉलेज में दर्दरहित रूट कैनाल उपचार की संभावना को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण शोध कार्य किया गया है। यह शोध कार्य एंडोडोंटिक्स विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. राकेश सिंगला, डॉ. तमन्ना, डॉ. गुरदीप सिंह, डॉ. नमिता जैन एवं प्राचार्य डॉ. अरिंदम सरकार द्वारा संपन्न किया गया। इस शोध को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित किया गया है, जिससे संस्थान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि न केवल जेसीडी डेंटल कॉलेज बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।


जेसीडी विद्यापीठ के महा निदेशक डॉ. जय प्रकाश ने इस शोध कार्य के लिए पूरी टीम को बधाई देते हुए मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि जेसीडी डेंटल कॉलेज लगातार शोध एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह अध्ययन रूट कैनाल उपचार को अधिक सुरक्षित, आरामदायक एवं दर्दरहित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने शोधकर्ताओं की मेहनत, समर्पण एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अनुसंधान विद्यार्थियों तथा चिकित्सकों के लिए भी प्रेरणादायक सिद्ध होंगे।
 


जेसीडी डेंटल कॉलेज के  एंडोडोंटिक्स विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. राकेश सिंगला ने जानकारी देते हुए बताया कि रूट कैनाल उपचार प्रारंभ करने से पहले यदि दांत पर शीत परीक्षण, ऊष्मा परीक्षण एवं विद्युत पल्प परीक्षण का संयुक्त रूप से उपयोग किया जाए, तो यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि दांत पूरी तरह सुन्न हुआ है अथवा नहीं। इससे मरीजों की सबसे बड़ी चिंता — “क्या रूट कैनाल के दौरान दर्द महसूस होगा?” — का समाधान संभव हो सकेगा।

उन्होंने बताया कि कई बार आसपास का भाग तो सुन्न महसूस होता है, लेकिन दांत की नसें सक्रिय रहती हैं। ऐसी स्थिति में उपचार के दौरान मरीज को अचानक दर्द का अनुभव हो सकता है। यह शोध इस बात के लिए वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करता है कि कौन-कौन से चेयरसाइड परीक्षण पूर्ण पल्पल एनेस्थीसिया की पुष्टि करने में सबसे अधिक प्रभावी हैं।


इस अवसर पर डॉ. राकेश सिंगला ने कहा, “हमारा उद्देश्य मरीजों की अनुभूति एवं दंत चिकित्सकों की धारणा के बीच के अंतर को समाप्त करना था। रूट कैनाल उपचार से पहले शीत, ऊष्मा एवं विद्युत परीक्षण करने से असुविधा को रोका जा सकता है। यह अध्ययन उस प्रक्रिया को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करता है, जिसे अनेक दंत चिकित्सक पहले से अपनाते रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि इस शोध से भविष्य में दंत चिकित्सा के क्षेत्र में नई तकनीकों एवं बेहतर उपचार पद्धतियों को विकसित करने में सहायता मिलेगी।


शोधकर्ताओं ने जेसीडी डेंटल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरिंदम सरकार के मार्गदर्शन, सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इस अध्ययन से चिकित्सकों को उपचार प्रारंभ करने से पहले अधिक सटीक निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। जेसीडी विद्यापीठ के चेयरमैन अर्जुन सिंह चौटाला ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी संस्थान इसी प्रकार के शोध कार्यों के माध्यम से समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा तथा विद्यार्थियों को अनुसंधान के लिए प्रेरित करता रहेगा।