किसानों की समस्याओं, लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली को लेकर जेजेपी आई आगे, गेहूं का समर्थन मूल्य 150 रुपए बढ़ाने की मांग
JJP steps forward to address farmers' issues and the restoration of the democratic system; demands a ₹150 increase in the minimum support price (MSP) for wheat
mahendra india news, new delhi
सिरसा। किसानों को दरपेश आ रही समस्याओं और देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली को लेकर बुधवार को जननायक जनता पार्टी सिरसा की जिला कार्यकारिणी ने उपाुयक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजा है। इस सिलसिले में पार्टी के जिला प्रेस प्रवक्ता अमर सिंह ज्याणी ने बताया कि जेजेपी की जिला कार्यकारिणी की ओर से उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति द्वारा रबी विपणन वर्ष 2027-28 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य मात्र 25 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 2610 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। यह बढ़ोतरी मात्र करीब एक प्रतिशत ही है, जो कि किसानों के साथ बड़ा मजाक है।
भारत का किसान अपनी फसलों को तैयार करने के लिए जहां कड़ी मेहनत करता है वहीं बढ़ती महंगाई और प्राकृतिक आपदाओं की दोहरी मार की वजह से वह ऋण के नीचे दबता जा रहा है। खेती के लिए उपयोग होने वाली खाद, कीटनाशक, बीज, मशीनें इत्यादि जैसी वस्तुओं के दाम निरंतर बढ़ रहे है। किसानों को फसल उत्पादन के लिए भारी खर्चा उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि नमी के नाम पर फसलें एमएसपी से नीचे के दाम खरीदी जा रही है। ऐसे में सरकारी खरीद व्यवस्था कागजों तक सीमित रह जाती है। कर्ज के बोझ के कारण आज देश में औसतन लगभग 30 किसान एवं कृषि मजदूर प्रतिदिन आत्महत्या कर रहे है। इन परिस्थितियों में भारत सरकार द्वारा एमएसपी में मात्र 25 पैसे प्रति किलो की वृद्धि ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है, जो कि भारत सरकार की किसान विरोधी नीति को दर्शाता है। देश की 80 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है।
वहीं भारत में गेहूं का उत्पादन सबसे ज्यादा हरियाणा, पंजाब राज्य में होता है। पिछले दस वर्षों में गेहूं के एमएसपी में हर वर्ष औसतन 100 से 160 प्रति क्विंटल की वृद्धि होती हुई आ रही है जबकि इस वर्ष मात्र 25 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि ही की गई है। ऐसे में गेहूं में लगभग एक प्रतिशत की एमएसपी बढ़ोतरी किसानों को घाटे में धकेलने के सिवा कुछ नहीं है। सरकार के इस किसान विरोधी फैसले का सबसे ज्यादा नुकसान हरियाणा और पंजाब के किसानों झेलना पड़ेगा जिसका जेजेपी परिवार विरोध करता है। जेजेपी परिवार ने कहा कि किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम मिलना चाहिए, इसके लिए सरकार को किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए फसलों का उचित खरीद मूल्य निर्धारित करना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से गेहूं की एमएसपी वृद्धि पर पुन: विचार करते हुए कम से कम 150 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि किए जाने की मांग की। साथ ही प्रधानमंत्री से कहा गया है कि केंद्रीय चुनाव आयोग पर वोट चोरी के जो गंभीर आरोप लगे हैं,
उस मामले में केंद्रीय चुनाव आयुक्त को सामने आकर लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष रखना चाहिए ताकि देशवासियों को वास्तविकता का पता चल सके। ज्ञापन सौंपने वालों में जेजेपी के जिलाध्यक्ष अशोक वर्मा, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के प्रधान महासचिव राधेश्याम शर्मा, जिला कार्यालय सचिव हरिसिंह भारी, सुरेंद्र भागीराम एडवोकेट, सर्वजीत मसीतां, प्रदेश प्रदेश संगठन सचिव रणदीप मट्टदादू, कोषाध्यक्ष अंजनी लढा, मास्टर जयपाल नैन, पार्टी के शहरी प्रधान दीपक भाटिया, सुधीर कूकणा, नरेंद्र बराड़, अनिल कासनियां, जेजेपी किसान सैल के जिलाध्यक्ष शगनजीत सिंह गिल, युवा जिला प्रभारी शांतनु गोदारा, हरबेल सिंह खाजाखेड़ा, राजेंद्र कसवां बनसुधार, कृष्ण शाहपुरिया, जेजेपी की महिला सैल की जिलाध्यक्ष सरोज डूडी, जिला महिला प्रभारी सुमित्रा भारी, महिला सैल की प्रदेश प्रवक्ता कल्पना झोरड़, महिला हलका प्रधान सर्वजीत कौर, कार्यालय सहसचिव कुलदीप जांगू सहित अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।