किसान आंदोलन 2020-21 अदम्य संघर्ष व स्वाभिमान की गौरव गाथा पुस्तक का लोकार्पण

 

Mahendra india news, new delhi
 लोक चेतना कला एवं साहित्य मंच सिरसा द्वारा श्री युवक साहित्य सदन सिरसा आयोजित पुस्तक लोकार्पण एवं विचारगोष्ठी में किसान संगठनों, कर्मचारी संगठनों, जनवादी महिला समिति और बहुत से जनवादी सोच के लोगों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इस कार्यक्रम के मंच संचालक वीर सिंह भरोखां ने सबसे पहले कुलदीप सिंह सिरसा को आमंत्रित किया, जिसने अपने जनवादी लोकगीत से उपस्थित लोगों की चेतना को जागृत करने का काम किया। उसके बाद एडवोकेट उमेद सिंह पूर्व विधायक द्वारा लिखित पुस्तक, किसान आंदोलन 2020-21 अदम्य संघर्ष व स्वाभिमान की गौरव गाथा का लोकार्पण मंच आसीन अध्यक्ष मंडल द्वारा किया गया

, जिसमें प्रमुख रूप से प्रो. रामकुमार खटकड़ पूर्व विभागाध्यक्ष कृषि अर्थशास्त्र एचएयू हिसार, डा. बलजीत भ्याण पूर्व उद्यान अधिकारी हिसार, कॉमरेड स्वर्ण सिंह विर्क, राजकुमार शेखुपुरिया, डा. रामजीलाल दड़बी, प्रो. हरभगवान चावला, डा. हरविंद्र सिरसा, सीडीएलयू से डा. मनोज सिवाच, डा. अभय सिंह गोदारा, डा. प्रियंका सिवाच, किसान नेता कॉमरेड सुरजीत सिंह, मनदीप नथवान, रणधीर जोधकां ने मिलकर किया। पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर लेखकीय टिप्पणी में उमेद सिंह ने बताया कि ये केवल किसान का आंदोलन ही नहीं था,

बल्कि सामाजिक जनजागृति और लोक चेतना का आजादी के बाद सबसे सफल धर्मनिरपेक्ष भाईचारे को स्थापित करने वाला आंदोलन था।जिसने सामाजिक भाईचारे को प्रगाढ़ करने के लिए एक नई दिशा दी साथ-साथ इस आंदोलन ने लोगों को व्यापक एकता के साथ ज़ोर ज़ुल्म जबर के खिलाफ  लडऩा भी सिखाया है। आगामी जनसंघर्षों के लिए एक नई नजीर पेश की इस पुस्तक को हर एक मजदूर, किसान, कर्मचारी और जनवादी सोच के आदमी को पढऩा चाहिए। बीज बिल-2025 की चुनौतियों पर बोलते हुए मुख्य वक्ता डा. बलजीत भ्याण पूर्व उद्यान अधिकारी एचएयू हिसार ने बहुत बारीकी से समझाया कि इस बिल के पारित होने से भारतीय कृषि कार्पोरेट की मर्जी अनुसार होगी और छोटा किसान लगभग उजड़ जाएगा, उसकी कोई सुनवाई नहीं होगी। बीजों के दाम बढ़ेंगे, क्वालिटी का कोई भरोसा नहीं होगा।

आम उपलब्ध देश बीज खत्म हो जाएंगे। ये न केवल किसान के लिए घातक होगा, बल्कि आम माध्यम वर्ग के भोजन, सब्जी व फलों के खरीद पर बुरा असर डालेगा। इसके खिलाफ  जोरदार आंदोलन करने की सख्त जरूरत है वर्ना कृषि कार्पोरेट के कब्जे में होगी। अध्यक्षीय टिप्पणी में बोलते हुए कॉमरेड स्वर्ण सिंह विर्क ने बताया कि वर्तमान सत्ता किस प्रकार से आम आवाम को मुख्य आवश्यकताओं से ध्यान हटाकर संसद में लोगों के जीवन के खिलाफ  कानून बना रही है, जिसमें बिजली बिल, लेबर कोड बिल, मनरेगा को लगभग खत्म कर दिया गया है, जिससे मजदूरों की हालात बहुत खराब हो जाएगी। मनरेगा कानून को खत्म करके नए बिल जी राम जी से मजदूर को किसान से लड़वाने का काम वर्तमान सत्ता कर रही है। इस बिल से दोनों मजदूर-किसान को मार पड़ेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. रामकुमार खटकड़ पूर्व विभागाध्यक्ष कृषि अर्थशास्त्र एचएयू हिसार ने बताया कि सरकार ने सभी यूनिवर्सिटीज को प्राइवेट हाथों में देने का पक्का मसौदा तैयार कर रखा है।

जिस दिन ये मसौदा पास हो गया, उसी दिन मजदूर-किसान, आम कमेरे वर्ग के बच्चों की शिक्षा चली जाएगी। उच्च शिक्षा आप मध्यम वर्ग की पहुंच से बहुत दूर चली जाएगी। इनको बचाने के लिए एकजुट होकर बड़ा संघर्ष करना होगा वर्ना, यूनिवर्सिटी कार्पोरेट के हाथों में होगी। अंत में इस कार्यक्रम के संयोजक राजकुमार शेखुपुरिया ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि भविष्य में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करवाने के लिए आप सभी सहयोग करें। ऐसे जनचेतना और सामाजिक सरोकारों से संबंधित कार्यक्रम का आयोजन होना, वर्तमान समय में बहुत जरूरी है।

अगर कोई संगठन ऐसा कोई भी कार्यक्रम आयोजित करवाने के लिए आगे आएगा तो लोक चेतना कला एवं साहित्य मंच सिरसा उसकी हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। इस कार्यक्रम में जनवादी महिला समिति सिरसा की प्रधान एडवोकेट बलवीर कौर गांधी, रेखा, किसान सभा के राज्य सचिव समित, भरत झाझड़ा, डा. सुभाष जोधपुरिया, प्रो. अशोक भाटिया, प्रो. प्रेम कंबोज, प्रिंसिपल नत्थूराम सिंवर, अचलवीर गिलांखेड़ा, प्रिंसिपल बलदेव सिंह, डा. बिक्करजीत साधुवाला, एसकेएस के जिला प्रधान मदन खोथ, रमेश सैनी, सोहन सिंह रंधावा, निर्मल सिंह फौजी, रवि कुमार रोड़ी, ज्ञान विज्ञान समिति सिरसा से ललित सोलंकी, अजय पासी, अविनाश कंबोज, अनीश कुमार, रामचंद्र मौर्य , किसान नेता राजेंद्र औलख, रोशन सुचान, संदीप शेरपुरा, सुरेश ढाका, राजूराम रिटायर्ड हेडमास्टर, गुरदित्त बाजेकां, रोहतास, रणजीत घोड़ांवाली, सुरेन्द्र नुईया कार्यकारी अभियंता व सैकड़ों की संख्या में लोगों ने मुख्य रूप से भाग लिया।