सीडीएलयू SIRSA में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर व्याख्यान, ग्रामीण लोकतंत्र की मजबूती पर जोर
mahendra india news, new delhi
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा के टैगोर एक्सटेंशन हॉल में राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन तथा इतिहास एवं आर्कियोलॉजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस: ग्रामीण लोकतंत्र का उत्सव विषय पर एक ऑन लाइन विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार के मार्गदर्शन तथा कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (IIPA), नई दिल्ली के वरिष्ठ प्रो. सुरेश मिश्रा रहे, जबकि अध्यक्षता फैकल्टी ऑफ सोशल साइंसेज के डीन एवं लोक प्रशासन विभाग के चेयरपर्सन प्रो. सुल्तान सिंह ढांडा ने की।
प्रो. सुरेश मिश्रा ने पंचायती राज व्यवस्था के महत्व, उपलब्धियों और चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग तथा महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि देश में लगभग 31 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जो विश्व में सर्वाधिक हैं, जिनमें करीब 46 प्रतिशत यानी लगभग साढ़े 14 लाख महिलाएं पंचायती राज संस्थाओं में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने ग्राम सभा तथा पंचायती राज की त्रिस्तरीय संरचना को स्थानीय लोकतंत्र की सुदृढ़ नींव बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक मजबूत करती है और भारतीय परंपराओं को भी जीवित रखती है।प्रो. मिश्रा ने अपने व्याख्यान में सोशल मोबिलाइजेशन, इंडीजीनियस नॉलेज सिस्टम, केंद्र एवं राज्य वित्त आयोग तथा जिला योजना समिति जैसे विषयों पर भी विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी और वर्तमान चुनौतियों पर विचार साझा किए।
स्वागत भाषण में प्रो. सुल्तान सिंह ढांडा ने 73वें संविधान संशोधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संशोधन ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान कर लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक सशक्त बनाया है। उन्होंने सुशासन में डिजिटलाइजेशन की भूमिका और विद्यार्थियों की भागीदारी पर भी जोर दिया, साथ ही निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए साक्षरता की आवश्यकता को रेखांकित किया।कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव राजनीति विज्ञान विभाग के चेयरपर्सन प्रो. राजबीर सिंह दलाल ने प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता के विचारों की सराहना करते हुए कहा कि यह व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक सिद्ध होगा।इस अवसर पर इतिहास एवं आर्कियोलॉजी विभाग के चेयरपर्सन प्रो. विष्णु भगवान, प्रो. राजकुमार सिवाच, प्रो. सत्यवान दलाल, डॉ. नीलम, डॉ. रितु, प्राध्यापक पंकज एवं सुनील कुमार सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन लोक प्रशासन विभाग की शोधार्थी मीनाक्षी ने किया, जबकि तकनीकी सहयोग में शोधार्थी आदित्य, रोहित मलिक, हरदीप सिंह, यूआईटीडीसी से गुलशन मेहता तथा तकनीकी स्टाफ सदस्य अर्श कंबोज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।