सिरसा की बेटी मेजर कर्मजीत कौर ने 'समुद्र प्रदक्षिणा' अभियान को फतेह कर रचा इतिहास
mahendra india news, new delhi
भारत की थल सेना, नौसेना और वायु सेना (त्रिवेणी) ने पहली बार विश्व के पहले 'समुद्र प्रदक्षिणा' अभियान, जिसमें 9 महिला अधिकारी शामिल थी, ने अपने बुलंद हौंसले व साहस से 314 दिन की कठिन समुद्री यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर इतिहास रच दिया है। इस अभियान में सिरसा की बेटी मेजर कर्मजीत कौर भी शामिल थीं। मेजर कर्मजीत कौर के पति कोमलप्रीत सिंह भी मर्चेंट नेवी में चीफ आॅफिसर हैं।
11 सितंबर 2025 से शुरू हुए इस संकटों से भरे अभियान को पूरा कर देश की बेटियों ने तिरंगा फहराकर सकुशन वापसी की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अभूतपूर्व 'समुद्र प्रदक्षिणा' अभियान की सफल वापसी पर दल का औपचारिक स्वागत और महिला अधिकारियों के हौंसले व साहस को सलाम करते हुए इसे युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बताया। यही नहीं महामहिम राष्टÑपति द्रोपदी मुर्मू ने भी इस साहसिक टीम का स्वागत किया और महिला टीम की जमकर सराहना की। सिरसा स्थित अपने गांव कंगनपुर पहुंचने पर मेजर कर्मजीत कौर का ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। परिजनों ने भी बेटी के सकुशल लौटने पर उसका मुंह मीठा करवाकर इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुक्त कंठ से प्रशंसा की। यह मिशन न केवल भारत की 'नारी शक्ति' और अदम्य साहस का प्रमाण है, बल्कि तीनों सेनाओं के आपसी तालमेल का भी एक बेहतरीन उदाहरण है।
विश्व का पहला अभियान:
मेजर कर्मजीत कौर ने बताया कि यह दुनिया का पहला ऐसा समुद्री परिक्रमा अभियान था, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना (त्रि-सेवा) की वदीर्धारी महिला अधिकारी शामिल थीं। दल ने 11 सितंबर 2025 को मुंबई से अपनी यात्रा शुरू की थी और 314 दिनों में लगभग 25,500 समुद्री मील (करीब 47,000 किलोमीटर) की दूरी तय की। इस यात्रा के दौरान दल ने दुनिया के चार प्रमुख महासागरों को पार किया। उन्होंने बताया कि जांबाज महिला अधिकारियों ने भूमध्य रेखा को दो बार पार किया, अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को लांघा और तीन प्रमुख अंतरीपों—केप आॅफ गुड होप, केप लीउविन और केप हॉर्न का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। इसके साथ ही वे प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय 'केप हॉर्नर्स' बिरादरी में शामिल हो गईं।
50 फीट लंबे स्वदेशी पोत पर पूरा किया आईएएसवी त्रिवेणी:
मेजर कर्मजीत कौर ने बताया कि यह पूरा अभियान 50 फीट लंबे आईएएसवी त्रिवेणी पोत पर पूरा हुआ, जो पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया। यह 'आत्मनिर्भर भारत' की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का एक बड़ा प्रतीक है। हालांकि सफर के दौरान अनेक बार ऐसी परिस्थितियां आई जब बोट में भी तकनीकी खराबी आई, कई बार उनकी जान पर भी बन आई थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और हर मुश्किल परिस्थिति से पार पाते हुए इस ऐतिहासिक सफर को पूरा किया।
परिवार का मिला फुल सपोर्ट:
मेजर कर्मजीत ने बताया कि इससे पूर्व भी उन्होंने इसी हवा से चलने वाली बोट पर एक मिशन को पूरा किया था, जिसको लेकर परिजनों के मन में संशय की स्थिति थी, लेकिन टीम के सदस्यों के बुलंद हौंसले के आगे परिवार के लोगों ने भी प्रोत्साहित किया। उनके पति कोमलप्रीत सिंह के साथ-साथ पिता रिछपाल सिंह रंधावा, माता व भाई ने पूरा सपोर्ट किया, जिसका परिणाम सभी के सामने है।
युवाओं के लिए दिया अद्भुत संदेश:
मेजर कर्मजीत कौर ने युवाओं को दिए अपने संदेश में कहा कि युवा इस सोच के साथ नेवी में न जाएं कि उन्हें सिर्फ नौकरी ही करनी है। नौकरी के साथ-साथ देश के लिए कुछ हटकर करने के लिए आपका एक मिशन होना चाहिए, ताकि वो देशवासियों के साथ-साथ अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का काम करे।