नॉन टीचिंग कर्मचारी संघ हरियाणा ने प्रदेशभर में किया प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम जिला उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
Mahendra india news, new delhi
भारतीय मजदूर संघ हरियाणा के नेतृत्व में नॉन टीचिंग कर्मचारी संघ हरियाणा द्वारा प्रदेश भर के विश्वविद्यालयों में हरियाणा सरकार के खिलाफ जॉब सिक्योरिटी एक्ट-2024 की मांग को लेकर किए गए रोष प्रदर्शन के तहत सिरसा में भी प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। रोष प्रदर्शन की अध्यक्षता रणवीर बांगड़वा ने की।
उनके साथ जीवन ठाकुर प्रदेश सदस्य भारतीय मजदूर संघ, जिला मंत्री चरणजीत वर्मा, विश्वविद्यालय अध्यक्ष जगदीश लूना, उपाध्यक्ष दारा सिंह, मनीष सचिव, सुनील गोदारा कोषाध्यक्ष, दिलीप, संजय मंगा, मुकेश वर्मा, अमनदीप मौजूद रहे। रणबीर बांगड़वा ने कहा कि
जॉब सुरक्षा अधिनियम 14 अगस्त 2024 में जो हरियाणा सरकार ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत प्रदेश भर में कार्य कर रहे 1.20 लाख कर्मचारियों को जॉब सुरक्षा अधिनियम 2024 देने की बात कही थी, उसको सरकार ने पूर्ण किया। लेकिन जब 25 दिसंबर 2025 को सुशासन दिवस पर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जॉब सुरक्षा पोर्टल लॉन्च किया तो उसमें जानकारी मिली की विश्वविद्यालय में लगे किसी भी कर्मचारी को यह सुरक्षा नहीं मिलेगी। जिससे कर्मचारियों में मायूसी छा गई। उन्होंने कहा कि सरकार की करनी व कथनी में फर्क है और जब तक कर्मचारियों का इसका लाभ नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
ये है कर्मचारियों की मुख्य मांग:
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि विश्वविद्यालयों के एचकेआरएनएल कर्मचारियों को जॉब सुरक्षा अधिनियम 2024 को सभी विश्वविद्यालयों में 5 साल से ऊपर वालों के साथ-साथ 0-5 वालों को भी सेवा सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत लाया जाए व राज्य विश्वविद्यालयों के संविदा कर्मचारियों को अधिनियम के अंतर्गत कवर करने एवं पोर्टल पर पंजीकरण की सुविधा प्रदान करने के निर्देश जारी किए जाएं। विश्वविद्यालयों के कुछ एचकेआरएनएल कर्मचारियों के अनुभव विवरण गलत दर्ज हैं। अनुरोध है कि उनके सेवा अनुभव का सत्यापन करवाया जाए और उनकी वास्तविक कार्यभार ग्रहण और सेवा अभिलेखों के अनुसार उसे सही करवाया जाए ताकि अनुभव के आधार पर वेतनलाभ मिल सके।
ईएसआई के नियमानुसार कुछ कर्मचारियों के 21100 रुपए से अधिक वेतन होने पर ईएसआई कार्ड कट गए हंै, उनके चिरायु कार्ड जारी किये जाएं और कर्मचारियों के लिए विश्वविद्यालयों में डिस्पेंसरी खोली जाये व डिस्पेंसरी में फ्री मेडिकल सुविधा प्रदान जी जाए। विश्वविद्यालयों के एचकेआरएनएल के कुछ कर्मचारियों के नाम पोर्टल से हट गए हैं और उनके नाम वापिस जोड़े जाएं और उनका 3 महीने का बकाया वेतन दिलवाया जाये, ताकि कर्मचारियों को आर्थिक व मानसिक परेशानी से ना जूझना पड़े।