नाथूसरी चौपटा और गोरीवाला नए हलके बनने की संभावना, परिसीमन से बदल जाएगा सिरसा का सियासी भूगोल, बदलेगा पूरा चुनावी गणित

 

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हरियाणा प्रदेश के अंदर आने वाले में चुनावी गणित बदलने वाला है। अगले विधानसभा परिसीमन की चर्चाओं के साथ ही सिरसा जिला की सियासत में भी संभावित बदलावों को लेकर हलचल तेज होने लगी है। बता दें कि परिसीमन अभी भविष्य की प्रक्रिया है और अंतिम नक्शा परिसीमन आयोग तथा निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन जिला के मौजूदा जनसंख्या, मतदाता और मतदान केंद्रों के आंकड़े यह संकेत जरूर देते हैं कि यदि विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ती है तो सिरसा का राजनीतिक भूगोल भी एक बार फिर बड़े बदलाव से गुजर सकता है। 


राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वर्तमान पांच विधानसभा सीटों की संख्या बढक़र 7 हो सकती है। इसी क्रम में गोरीवाला और नाथूसरी चौपटा को नए विधानसभा क्षेत्र के रूप में विकसित करने, जबकि मौजूदा सिरसा विधानसभा क्षेत्र को शहरी और ग्रामीण दो हिस्सों में बांटने की संभावनाओं पर चर्चा है। हालांकि यह अभी राजनीतिक और प्रशासनिक संभावनाओं का विषय है, आधिकारिक निर्णय नहीं। सिरसा जिले में वर्तमान में कालांवाली, डबवाली, रानियां, सिरसा और ऐलनाबाद 5 विधानसभा क्षेत्र हैं।  


मौजूदा आंकड़ों की बात करें तो डबवाली विधानसभा क्षेत्र जिले की बड़ी सीटों में शामिल है। यहां करीब 231 मतदान केंद्र हैं और लगभग 1 लाख 87 हजार 521 मतदाता हैं। इनमें करीब 99 हजार 871 पुरुष, 87 हजार 647 महिला तथा तीन किन्नर मतदाता शामिल हैं। डबवाली सीट की भौगोलिक स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके विशाल ग्रामीण क्षेत्र में गोरीवाला सहित अनेक गांव आते हैं। यदि भविष्य में गोरीवाला को अलग विधानसभा क्षेत्र का दर्जा मिलता है तो डबवाली के मौजूदा गांवों का पुनर्गठन होना लगभग स्वाभाविक होगा। इसका सीधा असर डबवाली के राजनीतिक समीकरणों, उम्मीदवारों की दावेदारी और चुनावी रणनीति पर पड़ेगा। 2008 के परिसीमन में डबवाली विधानसभा क्षेत्र को पूरी डबवाली तहसील के आधार पर गठित किया गया था। आधिकारिक परिसीमन आदेश में इसे अलग विधानसभा क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है।

सिरसा में शहर और गांव अलग हुए तो बदलेगा पूरा चुनावी गणित
जिला में बूथों की संख्या के लिहाज से सिरसा विधानसभा क्षेत्र भी बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान में यहां करीब 233 मतदान केंद्र हैं। कुल मतदाताओं संख्या लगभग 1 लाख 86 हजार 433 है। सिरसा विधानसभा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका बड़ा मतदाता आधार शहर में केंद्रित है। करीब 149 मतदान केंद्र शहर क्षेत्र में, जबकि लगभग 74 बूथ ग्रामीण क्षेत्र में हैं। जिले की अन्य सीटों की तुलना में यह शहरी-ग्रामीण विभाजन सिरसा विधानसभा को परिसीमन की दृष्टि से सबसे संवेदनशील सीटों में शामिल करता है। यही वजह है कि राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच यह संभावना चर्चा में है कि भविष्य में सिरसा विधानसभा को सिरसा शहरी और सिरसा ग्रामीण दो विधानसभा क्षेत्रों में बांटा जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो केवल एक सीट के दो हिस्से नहीं होंगे, बल्कि शहर और गांव की अलग-अलग राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर दो नए चुनावी केंद्र विकसित होंगे। सिरसा विधानसभा की मौजूदा संरचना में केवल 31 गांव हैं, जबकि शहर में मतदान केंद्रों की संख्या कहीं अधिक है। 

ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र में भी करीब 1 लाख 85 हजार 998 मतदाता और लगभग 214 मतदान केंद्र हैं। यहां भी परिसीमन के बाद बड़े बदलाव की संभावना पर चर्चा है। राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण संभावना यह है कि ऐलनाबाद क्षेत्र के नाथूसरी चोपटा को अलग विधानसभा क्षेत्र का रूप दिया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो ऐलनाबाद के गांवों की वर्तमान संरचना में व्यापक बदलाव होना तय माना जाएगा। यह क्षेत्र इतिहास में पहले भी विधानसभा पुनर्गठन का गवाह रहा है। परिसीमन से पहले दड़बा कलां विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में था। 1977 से लेकर 2005 तक दड़बा एक विधानसभा क्षेत्र रहा। 2008 के परिसीमन के बाद दड़बा और रोड़ी दोनों विधानसभा क्षेत्रों का अस्तित्व समाप्त हो गया और नए राजनीतिक नक्शे में कालांवाली तथा रानियां जैसे विधानसभा क्षेत्र उभरे।

रानियां और कालांवाली भी नहीं रहेंगी अछूती

रानियां विधानसभा क्षेत्र में करीब 1 लाख 76 हजार 337 मतदाता हैं। कालांवाली में करीब 1 लाख 72 हजार 461 मतदाता और लगभग 198 मतदान केंद्र हैं। मौजूदा निर्वाचन व्यवस्था में कालांवाली अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है, जबकि रानियां सामान्य सीट है।  आधिकारिक परिसीमन आदेश के अनुसार कालांवाली में सिरसा तहसील के विभिन्न पटवार सर्किलों के साथ बड़ागुढ़ा, सिकंदरपुर, लक्कड़ांवाली, रोड़ी और कालांवाली क्षेत्र शामिल किए गए थे। रानियां में सिरसा तहसील के कुछ गांवों के साथ रानियां तहसील और पुराने रोड़ी हलका के गांव जोड़े गए।
सिरसा का विधानसभा इतिहास भी परिसीमन के साथ लगातार बदलता रहा है। 1967 से 1972 के दौर में जिले में रोड़ी, सिरसा, डबवाली और ऐलनाबाद चार विधानसभा क्षेत्र थे। इसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया ने जिले के राजनीतिक नक्शे में नया अध्याय जोड़ा। 1976 के परिसीमन के बाद दड़बा विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया। इसके बाद कई वर्षों तक दड़बा सिरसा जिले की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। लेकिन 2008 का परिसीमन सबसे बड़ा बदलाव लेकर आया। 2008 के बाद रोड़ी और दड़बा दोनों विधानसभा क्षेत्र समाप्त हो गए, जबकि कालांवाली और रानियां नए विधानसभा क्षेत्रों के रूप में सामने आए। सिरसा जिले की मौजूदा पांच सीटों वाली संरचना इसी परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। 2008 के आधिकारिक आदेश में पांचों मौजूदा सीटों की सीमाएं अलग-अलग तहसील, कानूनगो सर्किल और पटवार सर्किल के आधार पर निर्धारित की गई थीं।
 उस समय सिरसा संसदीय क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ा बदलाव हुआ। 
इस बार परिसीमन हुआ तो किसकी जमीन खिसकेगी?

अब संभावित नए परिसीमन ने एक बार फिर यही सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि सिरसा जिले में पांच की जगह सात विधानसभा क्षेत्र बने तो किन नेताओं की राजनीतिक जमीन बदलेगी। यदि गोरीवाला नया हलका बनता है तो डबवाली की संरचना प्रभावित होगी। यदि नाथूसरी चोपटा नया विधानसभा क्षेत्र बनता है तो ऐलनाबाद का भूगोल बदलेगा। और यदि सिरसा शहर तथा ग्रामीण क्षेत्र अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में बांटे जाते हैं तो वर्तमान सिरसा सीट का चुनावी चरित्र पूरी तरह बदल सकता है। यानी आने वाला परिसीमन केवल नक्शे पर खींची जाने वाली नई रेखाएं नहीं होंगी। यह राजनीतिक प्रभाव क्षेत्रों, जातीय समीकरणों, ग्रामीण-शहरी संतुलन, नेताओं की दावेदारी और चुनावी रणनीतियों की नई पटकथा भी लिख सकता है।
युवा मतदाता रहेगे निर्णायक भूमिका में

सिरसा जिले की राजनीति में युवा मतदाता आने वाले समय में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी, हरियाणा के उम्रवार मतदाता आंकड़ों के अनुसार जिले की पांच विधानसभा सीटों—कालांवाली, डबवाली, रानियां, सिरसा और ऐलनाबाद—में कुल 9 लाख 8 हजार 750 मतदाता दर्ज हैं। उम्र के हिसाब से सबसे बड़ा समूह 30 से 39 वर्ष की आयु के मतदाताओं का है, जबकि इसके बाद 20 से 29 वर्ष की आयु के मतदाता दूसरे सबसे बड़े समूह के रूप में सामने आते हैं।  पूरे सिरसा जिले में 30 से 39 वर्ष की उम्र के 2 लाख 39 हजार 413 मतदाता हैं। इस वर्ग के मतदाता ऐसे आयु वर्ग में आते हैं, जहां रोजगार, कारोबार, कृषि, शिक्षा, परिवार, मकान, महंगाई और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे सीधे चुनावी फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए यह वर्ग विशेष महत्व रखता है। 20 से 29 वर्ष की आयु के मतदाताओं की संख्या 1 लाख 49 हजार 563 है।

यह वह वर्ग है जो पहली बार मतदान करने वाले युवाओं से लेकर नौकरी, उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, निजी रोजगार और कारोबार की ओर बढ़ रहे युवाओं तक फैला है। ऐसे में रोजगार और भविष्य की संभावनाएं इस वर्ग के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दे बन सकती हैं।
 जिले में 40 से 49 वर्ष की उम्र के 1 लाख 86 हजार 144 मतदाता हैं। इनमें 95 हजार 681 पुरुष और 90 हजार 458 महिलाएं हैं, जबकि 5 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। ऐसे ही 50 से 59 वर्ष की उम्र के 1 लाख 55 हजार 886 मतदाता जिले में हैं। इनमें 81 हजार 11 पुरुष, 74 हजार 874 महिलाएं और एक ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल है। सिरसा जिले में 60 से 69 वर्ष की उम्र के 1 लाख 7 हजार 689 मतदाता हैं। 70 से 79 वर्ष के 50 हजार 757, 80 से 89 वर्ष के 14 हजार 659 और 90 से 99 वर्ष के 3 हजार 328 मतदाता हैं। इसके अलावा 100 से 109 वर्ष की उम्र के 272, 110 से 119 वर्ष के 13 और 120 वर्ष से अधिक उम्र का एक मतदाता का नाम भी आंकड़ों में दर्ज है।
विधानसभा वाइज यह है आंकड़ा
कालांवाली विधानसभा में कुल 1 लाख 72 हजार 461 मतदाता हैं। इनमें 30-39 वर्ष के 46 हजार 588, 20-29 वर्ष के 26 हजार 918, 40-49 वर्ष के 35 हजार 429 और 50-59 वर्ष के 29 हजार 806 मतदाता हैं। 60-69 वर्ष के 19 हजार 888 तथा 70-79 वर्ष के 9 हजार 740 मतदाता हैं।

80-89 वर्ष के 3 हजार 80, 90-99 वर्ष के 827 और 100-109 वर्ष के 34 मतदाता दर्ज हैं। 18-19 वर्ष के मतदाताओं की संख्या 145 है। डबवाली विधानसभा में 1 लाख 87 हजार 521 मतदाता हैं। यहां 30-39 वर्ष का वर्ग 48 हजार 674 मतदाताओं के साथ सबसे बड़ा है। 20-29 वर्ष में 29 हजार 357, 40-49 वर्ष में 39 हजार 678 और 50-59 वर्ष में 31 हजार 597 मतदाता हैं। 60-69 वर्ष में 23 हजार 205, 70-79 वर्ष में 10 हजार 852 तथा 80-89 वर्ष में 3 हजार 80 मतदाता हैं। 90-99 वर्ष के 827, 100-109 वर्ष के 70 और 110-119 वर्ष के 3 मतदाता भी आंकड़ों में दर्ज हैं। 18-19 वर्ष के 175 मतदाता हैं। रानियां विधानसभा में कुल 1 लाख 76 हजार 337 मतदाता हैं। 30-39 वर्ष के 47 हजार 122, 20-29 वर्ष के 29 हजार 900, 40-49 वर्ष के 36 हजार 141 और 50-59 वर्ष के 29 हजार 900 मतदाता हैं। 60-69 वर्ष के 20 हजार 137 तथा 70-79 वर्ष के 9 हजार 313 मतदाता हैं। 80-89 वर्ष के 2 हजार 910, 90-99 वर्ष के 645 और 100-109 वर्ष के 68 मतदाता हैं। 18-19 वर्ष के 193 मतदाता दर्ज हैं।

सिरसा विधानसभा में 1 लाख 86 हजार 433 मतदाता हैं। इनमें 30-39 वर्ष का वर्ग 48 हजार 486 मतदाताओं के साथ सबसे बड़ा है। 20-29 वर्ष के 30 हजार 175, 40-49 वर्ष के 39 हजार 554 और 50-59 वर्ष के 31 हजार 938 मतदाता हैं। 60-69 वर्ष के 22 हजार 362, 70-79 वर्ष के 10 हजार 565 और 80-89 वर्ष के 2 हजार 568 मतदाता हैं। 90-99 वर्ष में 433, 100-109 वर्ष में 35 तथा 110-119 वर्ष में एक मतदाता दर्ज है। 18-19 वर्ष के मतदाताओं की संख्या 313 है। ऐलनाबाद में कुल 1 लाख 85 हजार 998 मतदाता हैं। इनमें 30-39 वर्ष के 48 हजार 543 मतदाता हैं। 20-29 वर्ष में 33 हजार 213, 40-49 वर्ष में 35 हजार 342 और 50-59 वर्ष में 32 हजार 645 मतदाता हैं। 60-69 वर्ष के 22 हजार 97, 70-79 वर्ष के 10 हजार 287 और 80-89 वर्ष के 3 हजार 21 मतदाता हैं। 90-99 वर्ष में 596, 100-109 वर्ष में 65 और 110-119 वर्ष में 3 मतदाता हैं। 18-19 वर्ष के 184 मतदाता दर्ज हैं।