प्राणायाम से वज्रकाय, दीर्घजीवन और प्राणशक्ति के ऊर्ध्वारोहण का मार्ग प्रशस्त होता है: स्वामी विज्ञानानंद

 

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फतेहाबाद। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से अपने स्वास्थ्य जाग्रति कार्यक्रम आरोग्य प्रकल्प के अंतर्गत स्थानीय अल्फा इंटरनेशनल सिटी पार्क नंबर 1 में आयोजित तीन दिवसीय विलक्षण योग एवं ध्यान साधना शिविर के बुधवार को दूसरे दिन संस्थान की ओर से दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के शिष्य योगाचार्य स्वामी विज्ञानानन्द ने आज विशेष रूप प्राणायाम को योग पद्धति का प्राण तत्व स्वीकार करते हुए बताया कि प्राणायाम का योग में बहुत महत्व है। यह श्वास की क्रियाओं से संबंधित है। स्थूल रूप में यह जीवनधारक शक्ति अर्थात प्राण से सम्बंधित है।

इस प्रकार प्राणायाम का अर्थ श्वास का दीर्घीकरण और फिर उसका नियंत्रण है। यह एक ऐसा अभ्यास है जो शरीर को आंतरिक शक्ति प्रदान करने के साथ तमाम तरह की गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखता है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्राणायाम श्वास नियमन का अभ्यास है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए प्राणायाम काफी लाभदायक हो सकता है। स्वामी विवेकानंद इस विषय में अपना मत व्यक्त करते हैं प्राणायाम में सिद्ध होने पर हमारे लिए मानो अनंत शक्ति का द्वार खुल जाता है। मान लो, किसी व्यक्ति की समझ में यह प्राण का विषय पूरी तरह आ गया और वह उस पर विजय प्राप्त करने में भी कृतकार्य हो गया , तो फिर संसार में ऐसी कौन-सी शक्ति है, जो उसके अधिकार में न आए? उसकी आज्ञा से चन्द्र-सूर्य अपनी जगह से हिलने लगते हैं, क्षुद्रतम परमाणु से वृहत्तम सूर्य तक सभी उसके वशीभूत हो जाते हैं,

क्योंकि उसने प्राण को जीत लिया है। प्रकृति को वशीभूत करने की शक्ति प्राप्त करना ही प्राणायाम की साधना का लक्ष्य है। क्योंकि प्राणायाम प्राण-शक्ति का प्रवाह कर व्यक्ति को जीवन शक्ति प्रदान करता है। स्वामी जी ने उपस्थित साधकों को कब्ज जैसे रोगों के निराकरण सम्बंधित यौगिक क्रियाओं में अनुलोम विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, कपाल भाति यौगिक प्रक्रिया, सूर्य भेदी प्राणायाम, उदराकर्षण आसन, कटि चक्रासन, ब्रह्मचर्यासन, बाह्य यौगिक क्रिया, अर्धचंद्रासन, नौकासन, स्कन्ध चालन, पाद चालन, उत्तिष्ट तान आसन इत्यादि क्रियाओं का अभ्यास करवाया और साथ ही इनके दैहिक लाभों से परिचित भी करवाया। कार्यक्रम का आरम्भ विधिवत वेद मंत्रोच्चारण के साथ हुआ।

कार्यक्रम के अंत में स्वामी जी के साथ सभी योग साधकों ने शान्ति मन्त्र का उच्चारण कर सर्व जगत कल्याण की प्रार्थना भी की। कार्यक्रम में चंद्र प्रकाश आहूजा, वीरेंद्र आहूजा, डा. महेश मेहता, नरेश झांझड़ा, यश बजाज, जुगल किशोर, विपिन गोयल, गुरुप्रीत सिंह, संजीव मोंगा, ललित मेहता, पृथ्वी सिंह बाणा, जगदीश शर्मा, मीनाक्षी मोंगा और सुषमा सेठी की सहर्ष उपस्थिति रही।