निजी बैंक की नौकरी छोड़ 12 एकड़ में शुरू की प्राकृतिक खेती,  जहर रहित खेती के संकल्प के साथ बंदीप सिंह गिल ने बदली राह

 

mahendra india news, new delhi
खंड ओढां के गांव लकड़ांवाली के किसान बंदीप सिंह गिल (बन्नी नंबरदार) ने निजी बैंक की नौकरी से मोहभंग होने के बाद खेती की राह चुनी। लोगों को सुरक्षित और जहर रहित खाद्य उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने करीब तीन वर्ष पहले प्राकृतिक खेती को अपनाने का फैसला किया। आज बंदीप सिंह अपनी 12 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।


बंदीप सिंह इससे पहले निजी बैंक में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत रहे हैं। नौकरी के दौरान ही उन्हें महसूस हुआ कि उनका मन खेती और प्राकृतिक तरीके से फसल उत्पादन की ओर अधिक जुड़ रहा है। जहर रहित भोजन और स्वस्थ मिट्टी के उद्देश्य ने उन्हें खेती की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया। हालांकि प्राकृतिक खेती शुरू करने से पहले भी वे अपने खेत की करीब दो एकड़ भूमि में गेहूं का जैविक तरीके से उत्पादन करते रहे थे। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने नौकरी छोडक़र प्राकृतिक खेती को अपना पूर्णकालिक कार्य बनाने का निर्णय लिया।


उपयोगी जीवाणुओं से शुरू किया सफर
प्राकृतिक खेती की शुरुआत करते हुए बंदीप सिंह ने नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु और फास्फोरस को घुलनशील बनाने वाले जीवाणुओं के संवर्धन पर काम किया। इन उपयोगी जीवाणुओं को तैयार कर खेतों में प्रयोग किया गया। इससे मिट्टी में केंचुओं की संख्या बढ़ी तथा मिट्टी की उर्वरता और जैविक गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला।
मिट्टी में आए बदलाव ने बंदीप सिंह का प्राकृतिक खेती के प्रति विश्वास और मजबूत किया। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे फसल विविधता बढ़ाई और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।


12 एकड़ में विविध फसलों का उत्पादन
वर्तमान में बंदीप सिंह की 12 एकड़ प्राकृतिक खेती वाली भूमि पर मूंग, बाजरा, सरसों, गेहूं, चना, लहसुन, आलू, प्याज, धनिया, मिर्च, सौंफ और अलसी सहित विभिन्न फसलों एवं औषधीय पौधों से उत्पादन लिया जा रहा है। खेत पर सौर ऊर्जा तथा जल संरक्षण के लिए तालाब की व्यवस्था भी की गई है। इससे खेती में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उनके बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है।