चौधरी आर्थोपेडिक एंड जनरल हॉस्पिटल SIRSA में रोबोटिक क्रांति: डॉ. अभिषेक चौधरी ने वेलिस एआई रोबोट से लोगों का होगा तुरंत इलाज

 

Mahendra india news, new delhi
 चिकित्सा जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक तकनीक ने घुटने के प्रत्यारोपण को बेहद आसान और सटीक बना दिया है। नंदन वाटिका स्थित चौधरी आर्थोपेडिक एंड जनरल हॉस्पिटल में आज मीडिया से बातचीत में डॉक्टर अभिषेक चौधरी मीडिया ने नई अत्याधुनिक वेलिस एआई रोबोटिक मशीन और इसके जरिए किए जा रहे आधुनिक इलाज के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। इस पत्रकार वार्ता के दौरान दिल्ली से आई एक महिला मरीज ने मीडिया के सामने अपना भावुक अनुभव साझा किया।

महिला ने बताया कि घुटने पूरी तरह खराब होने के कारण वह चलने-फिरने को तरस गई थी। कई जगह चेक करवाने के बाद भी उन्हें आराम नहीं मिला।

मैं तो चलने की उम्मीद पूरी तरह खो चुकी थी। लेकिन डॉक्टर साहब ने ऐसा सटीक इलाज किया कि महज 3 दिन के भीतर मुझे बिना सहारे के अपने पैरों पर चला दिया। यह मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। मीडिया से बातचीत करते हुए डॉ. अभिषेक चौधरी ने बताया कि 3 दिन बाद बिना किसी सहारे के चलना, हरियाणा का पहला ऐसा हॉस्पिटल जंहा सबसे ज्यादा घुटने बदले, भारत का पहला ऐसा हॉस्पिटल जंहा दो रोबोट है। पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले वेलिस एआई रोबोटिक तकनीक मरीजों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रही है। यह एआई-संचालित रोबोटिक सिस्टम घुटने की बनावट का बारीकी से विश्लेषण करता है,

जिससे सर्जरी में गलती की गुंजाइश खत्म हो जाती है। इस ऑपरेशन में पारंपरिक विधि की तुलना में बहुत छोटा चीरा लगाना पड़ता है, जिससे नसों और मांसपेशियों को नुकसान नहीं पहुँचता और दर्द न के बराबर होता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यही है कि मरीज ऑपरेशन के महज 3 दिन के भीतर बिना सहारे और किसी बड़ी तकलीफ के चलने-फिरने के काबिल हो जाता है।

डॉ. चौधरी ने कहा कि चौधरी आर्थोपेडिक एंड जनरल हॉस्पिटल का उद्देश्य मरीजों को वैश्विक स्तर की चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है। अब गंभीर मरीजों को विश्वस्तरीय रोबोटिक सर्जरी के लिए बड़े महानगरों की दौड़ लगाने की जरूरत नहीं है। इस सफल ऑपरेशन और नई तकनीक के बाद लोगो को काफ़ी राहत महसूस हुई हैं।