जनता की मानसिकता व वित्तीय व्यवस्थाओं पर गहरा प्रभाव डाल रहा है शनि: डा. पुनीत गोयल
वर्तमान आर्थिक परिस्थितियां, महंगाई एवं ग्रहों का प्रभाव से कैसे मिलेगी राहत
सिरसा। देश वर्तमान समय में आर्थिक दबाव, बढ़ती महंगाई, ईंधन मूल्यों में अस्थिरता, रोजगार संबंधी चिंताओं तथा व्यापारिक अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रहा है। आम नागरिक की दैनिक आवश्यकताओं से लेकर व्यापार जगत तक लगभग प्रत्येक वर्ग बढ़ते खर्चों और आर्थिक दबाव को महसूस कर रहा है।
वास्तुकार डा. पुनीत गोयल ने कहा कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से वर्तमान समय मुख्य रूप से शनि, राहु तथा गुरु ग्रह की विशेष स्थितियों से प्रभावित माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव, युद्ध जैसी परिस्थितियां, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक तनाव, मुद्रा विनिमय अस्थिरता तथा सप्लाई चेन संबंधी समस्याओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डाला है। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत, खाद्य पदार्थों तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर दिखाई दे रहा है। शनि ग्रह वर्तमान समय में आर्थिक संरचना, आम जनता की मानसिकता तथा वित्तीय व्यवस्थाओं पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। शनि का प्रभाव सामान्यत: निम्न परिस्थितियां उत्पन्न करता है, जैसे आर्थिक दबाव, आय की तुलना में बढ़ते खर्च, रोजगार में अस्थिरता, व्यापार में धीमापन, मेहनत के अनुपात में कम लाभ, मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त बोझ।
यही कारण है कि वर्तमान समय में अनेक लोग यह अनुभव कर रहे हैं कि आय बढ़ने के बावजूद बचत कम हो रही है तथा आर्थिक संतुलन बनाए रखना कठिन होता जा रहा है। डा. गोयल ने आगे कहा कि राहु ग्रह को ज्योतिष में भ्रम, अचानक उतार-चढ़ाव, वैश्विक तनाव, बाजार अस्थिरता तथा अप्रत्याशित घटनाओं का कारक माना गया है। वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय तेल संकट, युद्ध संबंधी परिस्थितियां तथा शेयर बाजारों में अनिश्चितता राहु के प्रभाव को दर्शाती है। ईंधन मूल्यों में वृद्धि का प्रभाव केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर परिवहन, कृषि, खाद्य वस्तुओं तथा दैनिक जीवन की लगभग प्रत्येक आवश्यकता पर पड़ता है। हालांकि परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, फिर भी ज्योतिषीय दृष्टि से गुरु ग्रह पूर्णत: कमजोर स्थिति में नहीं है।
यही कारण है कि भारत अभी भी विश्व के कई देशों की तुलना में अपेक्षाकृत स्थिर दिखाई देता है। बैंकिंग व्यवस्था, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना विकास, घरेलू मांग, वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका ये सभी कारक आने वाले समय में भारत को आर्थिक मजबूती प्रदान कर सकते हैं। ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार वर्ष 2026 का मध्य भाग अभी भी आर्थिक दृष्टि से संवेदनशील माना जा सकता है। विशेष रूप से महंगाई, ईंधन मूल्य, ब्याज दरों का दबाव, व्यापारिक अनिश्चितता, बाजार अस्थिरता के रूप में। डा. गोयल ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध अथवा तेल संकट लंबा चलता है, तो अस्थायी रूप से परिस्थितियां और चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार वर्ष 2026 के अंतिम चरण से धीरे-धीरे सुधार के संकेत बनने प्रारंभ हो सकते हैं।
वहीं वर्ष 2027 के मध्य के बाद अधिक स्थिरता एवं आर्थिक संतुलन बनने की संभावनाएं दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय घबराने का नहीं बल्कि संयम, व्यावहारिक योजना तथा वित्तीय अनुशासन अपनाने का है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय संघर्ष के माध्यम से पुनर्गठन का संकेत देता है। भारत की आर्थिक स्थिति पर वर्तमान दबाव स्थायी नहीं माना जा सकता। आने वाले 12 से 18 महीनों में धैर्य एवं संतुलित आर्थिक निर्णय अत्यंत आवश्यक रहेंगे।