त्रिवेणी युवा महोत्सव SIRSA की सांस्कृतिक शोभायात्रा में शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज सिरसा प्रथम
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चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, SIRSA में आयोजित 13वें त्रिवेणी युवा महोत्सव के पहले दिन सांस्कृतिक शोभायात्रा में शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज, सिरसा ने प्रथम स्थान हासिल किया। एमएम कॉलेज, फतेहाबाद की टीम दूसरे और मेजबान विश्वविद्यालय सीडीएलयू की टीम तीसरे स्थान पर रही। सीडीएलयू के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने शोभायात्रा को हरी झंडी देकर रवाना किया। यह शोभायात्रा विश्वविद्यालय के गेट से चलकर एमपी हॉल पहुंची। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ सुनील कुमार, प्रो. सुशील कुमार, प्रो. सुरेंद्र सिंह, युवा कल्याण निदेशक प्रो. मंजू नेहरा, प्रो. अमित, प्रो. रविंद्र आदि उपस्थित थे।
युवा उत्साह, लोक संस्कृति और कलात्मक अभिव्यक्ति के संगम के साथ शुरू हुए चार दिवसीय महोत्सव के पहले दिन विश्वविद्यालय परिसर के चार मंचों पर सांस्कृतिक, साहित्यिक, संगीत एवं ललित कला संबंधी गतिविधियां आयोजित की गई। विश्वविद्यालय के युवा कल्याण निदेशालय की ओर से 25 से 28 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे इस महोत्सव की थीम ‘युवा उमंग, संस्कृति के संग’ रखी गई है। महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान करने के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत, साहित्यिक चेतना और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना है।
शोभायात्रा ने प्रस्तुत की सांस्कृतिक विविधता की झलक
महोत्सव के पहले दिन आयोजित सांस्कृतिक शोभायात्रा ने आयोजन को जीवंत शुरुआत दी। विभिन्न संस्थानों की सहभागिता ने युवा प्रतिभाओं के साथ सांस्कृतिक विविधता को भी सामने रखा। शोभायात्रा के परिणामों में शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज, सिरसा ने पहला, एमएम कॉलेज, फतेहाबाद ने दूसरा और सीडीएलयू की टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। मेजबान विश्वविद्यालय की टीम का शीर्ष तीन में स्थान प्राप्त करना भी आयोजन के लिए उल्लेखनीय रहा।
मुख्य मंच पर लोक परंपराओं और शास्त्रीय नृत्य का संगम
मुख्य सभागार में उद्घाटन समारोह के साथ कोरियोग्राफी, लोक वाद्यवृंद और शास्त्रीय नृत्य से जुड़ी प्रस्तुतियां कार्यक्रम का हिस्सा रहीं। इन कला विधाओं ने भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की विविधता और मंचीय अभिव्यक्ति की संभावनाओं को रेखांकित किया। लोक संगीत और शास्त्रीय नृत्य जैसी विधाएं युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ उनकी कलात्मक प्रतिभा को निखारने का माध्यम भी बनती हैं।
संगीत और साहित्य ने जोड़े सुरों के साथ विचार
ऑडिटोरियम में भारतीय समूहगान और शास्त्रीय गायन की एकल प्रतियोगिताएं निर्धारित रहीं। समूहगान में सामूहिक तालमेल और संगीतबद्ध प्रस्तुति का महत्त्व सामने आया, जबकि शास्त्रीय गायन ने व्यक्तिगत संगीत साधना को मंच प्रदान किया।
वहीं, सेमिनार हॉल में आयोजित काव्य संगोष्ठी ने महोत्सव को साहित्यिक आयाम दिया। कविता के माध्यम से विचारों, संवेदनाओं और कल्पनाओं की अभिव्यक्ति ने यह दर्शाया कि युवा संस्कृति का विस्तार संगीत और नृत्य से आगे बढ़कर साहित्य और वैचारिक संवाद तक जाता है।
ललित कलाओं में दिखी कल्पनाशीलता
विश्वविद्यालय शिक्षण विभाग के भवन में क्ले मॉडलिंग और कार्टूनिंग जैसी प्रतियोगिताओं को स्थान दिया गया। इन विधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी कल्पना शक्ति और कलात्मक दृष्टि प्रदर्शित करने का अवसर मिला। मिट्टी से आकृतियां गढ़ने और रेखाओं के माध्यम से विचारों को आकार देने वाली ये कलाएं महोत्सव की बहुआयामी रचनात्मकता का हिस्सा रहीं।
28 अक्टूबर तक चलेगा महोत्सव
4 दिवसीय त्रिवेणी युवा महोत्सव के आगामी दिनों में हरियाणवी एवं पश्चिमी समूह नृत्य, मिमिक्री, एकांकी, भारतीय और पश्चिमी संगीत, वाद-विवाद, भाषण, प्रश्नोत्तरी, रंगोली तथा पोस्टर निर्माण सहित अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित की जानी हैं। कार्यक्रम के अनुसार 28 अक्टूबर को पुरस्कार वितरण समारोह के साथ महोत्सव का समापन होगा।
पहले दिन के आयोजन और सांस्कृतिक शोभायात्रा के परिणामों ने महोत्सव को प्रतिस्पर्धा, रचनात्मकता और सांस्कृतिक सहभागिता की दिशा में आगे बढ़ाया। त्रिवेणी युवा महोत्सव इस विचार को सामने रखता है कि विश्वविद्यालय केवल अकादमिक शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि कला, साहित्य, संस्कृति और युवा प्रतिभाओं के विकास के महत्त्वपूर्ण मंच भी हैं।