हरियाणा में 18 से 45 साल के व्यक्तियों में हार्ट अटैक से 17,973 मौतें, सिरसा में 1,758 मौत, विधानसभा सत्र में सामने आया चौंकाने वाला यह आंकड़ा, देखें पूरी रिपोर्ट

 

mahendra india news, new delhi
आजकल हर कहीं पर सुनने को मिल रहा है कि हार्ट अटैक से मौत हो गई। पहले जहां हार्ट अटैक का बात आती है तो अधिकतर लोगों के मन में किसी बुज़ुर्ग की छवि उभरती थी। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और युवा भी तेज़ी से इसका शिकार बन रहे हैं। नौजवानों में कई बार कोई चेतावनी संकेत नहीं आते। उन्हें अचानक ही हार्ट अटैक आ जाता है।

हरियाणा प्रदेश में 18 से 45 साल की आयु के व्यक्तियों में हृदयाघात और हृदय विफलता से होने वाली मौतों का आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला है। हरियाणा सरकार की ओर से विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2020 से जनवरी 2026 तक इस आयु वर्ग में 17,973 मौतें दर्ज की गईं। ्र


आपको बता दें कि इस अवधि में औसतन करीबन 8 व्यक्तियों की प्रतिदिन मौत दर्ज की गई। यह जानकारी जुलाना से कांग्रेस एमएलए विनेश फोगाट के प्रश्र  के लिखित जवाब में हरियाणा प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की ओर से सदन में दी गई थी।

राजकीय आंकड़ों के मुताबिक 2020 में 18 से 45 साल के आयु वर्ग में हृदयाघात या हृदय विफलता से 2,394 मौतें हुई थीं। 2021 में यह आंकड़ा बढक़र 3,188 हो गया। 2022 में 2,796, 2023 में 2,886 और 2024 में 3,063 मौतें दर्ज की गईं। वर्ष 2025 में यह संख्या बढक़र 3,255 हो गई, जो 2020 के मुकाबले अधिक है। जनवरी 2026 में ही इस आयु वर्ग में 391 मौतें दर्ज की गईं। वर्षवार आंकड़ों में 2021 में तेज उछाल दिखाई देता है। इसके बाद 2022 में कुछ कमी आई, लेकिन 2023 से मौतों का आंकड़ा फिर बढ़ता गया। 2024 में यह 3,063 और 2025 में 3,255 तक पहुंच गया। 


इस तरह 2020 में दर्ज 2,394 मौतों की तुलना में 2025 में संख्या करीब 36 प्रतिशत अधिक रही। विधानसभा में उपलब्ध कराए गए जिलावार आंकड़े भी अलग-अलग जिलों के बीच बड़ा अंतर दिखाते हैं। जनवरी 2020 से दिसंबर 2025 तक यमुनानगर में सबसे अधिक मौतें दर्ज की गईं। इस जिले में वर्षवार आंकड़े 2020 में 387, 2021 में 461, 2022 में 375, 2023 में 378, 2024 में 410 और 2025 में 389 रहे। छह वर्षों में इनका योग 2,400 से अधिक है। SIRSA में इस अवधि में 1,758 और पलवल में 1,539 मौतें हार्ट अटैक से हुईं। इसके अलावा नूंह में 1,129, पंचकूला में 1,003, कैथल में 914 और जींद में 893 मौतें दर्ज हुईं। कुरुक्षेत्र में 739, फरीदाबाद में 633, गुरुग्राम में 632 और रेवाड़ी में 625 मौतों का आंकड़ा सामने आया।

 

वहीं पानीपत में 471, सोनीपत में 344 और करनाल में 215 मौतें दर्ज की गईं। उपलब्ध आंकड़ों में रोहतक का आंकड़ा भी अपेक्षाकृत कम रहा। रेवाड़ी के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां भी 2020 के मुकाबले 2025 में मौतों की संख्या अधिक रही। 2020 में 75 मौतें दर्ज हुईं, जो 2021 में बढक़र 99 हो गईं। 2022 में 91, 2023 में 105 और 2024 में 112 मौतें दर्ज की गईं। 2025 में यह संख्या बढक़र 126 हो गई। जनवरी 2026 में रेवाड़ी में 17 मौतें दर्ज की गईं।


कोविड से संबंध पर सरकार ने नहीं कराया अध्ययन
विधानसभा में इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कोविड-19 से संभावित संबंध का सवाल रहा। एमएलए ने हरियाणाा सरकार से पूछा था कि क्या 2020 के बाद 18 से 45 वर्ष के लोगों में हुई हृदय संबंधी मौतों और कोविड-19 संक्रमण या कोविड-19 टीकाकरण के बीच कोई संबंध है तथा क्या सरकार ने इसकी जांच के लिए अध्ययन कराया है। सरकार के जवाब के मुताबिक, ऐसा कोई अध्ययन या सर्वे नहीं कराया गया है। इसलिए विधानसभा में रखे गए इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि इन मौतों का कारण कोविड-19 संक्रमण या कोविड-19 टीकाकरण था। इसी तरह केवल इन आंकड़ों के आधार पर कोविड के साथ किसी संबंध को पूरी तरह खारिज करना भी वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं होगा। इसके लिए अलग से वैज्ञानिक और महामारी विज्ञान संबंधी अध्ययन की आवश्यकता होगी। 


युवाओं में हृदय स्वास्थ्य क्यों महत्वपूर्ण
18 से 45 वर्ष का आयु वर्ग बड़ी संख्या में कामकाजी लोगों का होता है। इस उम्र में हृदयाघात या हृदय विफलता से होने वाली अचानक मौत का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार की आय, बच्चों की शिक्षा और घरेलू आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। हृदय स्वास्थ्य के लिए उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और तंबाकू का सेवन, अस्वास्थ्यकर खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता तथा मोटापा जैसे जोखिम कारकों पर ध्यान देना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार रक्तचाप, रक्त शर्करा तथा कोलेस्ट्रॉल की जांच जोखिम को पहचानने में मदद कर सकती है हाथ, कंधे, जबड़े अथवा पीठ तक फैलना हृदयाघात के संभावित संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, अचानक अत्यधिक पसीना आना, चक्कर, मितली या दर्द का हाथ, कंधे, जबड़े अथवा पीठ तक फैलना हृदयाघात के संभावित संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है।


आंकड़ों ने उठाए कई सवाल
हरियाणा विधानसभा में पेश किए गए 17,973 मौतों के आंकड़े निश्चित रूप से युवा आयु वर्ग में हृदय स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सार्वजनिक चर्चा का आधार देते हैं। लेकिन ये आंकड़े अपने आप में यह नहीं बताते कि प्रत्येक मौत के पीछे कौन-सा चिकित्सकीय कारण था, मृतकों में कौन-कौन से जोखिम कारक मौजूद थे या कोविड संक्रमण अथवा टीकाकरण की कोई भूमिका थी।
सरकार द्वारा किसी अध्ययन या सर्वे के अभाव में इन सवालों के जवाब अभी उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए आगे की तस्वीर के लिए विस्तृत चिकित्सकीय और वैज्ञानिक अध्ययन महत्वपूर्ण होगा। खासतौर पर उम्र, लिंग, जिले, पहले से मौजूद बीमारियों, जीवनशैली, धूम्रपान, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, कोविड संक्रमण के इतिहास और अन्य संभावित कारकों को शामिल करके अध्ययन किया जाए तो इन मौतों के पैटर्न को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
लेकिन उम्रदराज़ लोगों में हार्ट अटैक से पहले कई चेतावनी संकेत दिखाई देते हैं, जैसे चलने पर सांस फूलना, सीढय़िां चढ़ते समय सांस फूलना और छाती में भारीपन महसूस होना.

चिकित्सक डा. संदीप ने बताया कि अगर युवाओं की बात करें तो तो उनमें अक्सर ये लक्षण दिखाई नहीं देते. उन्हें अचानक ही हार्ट अटैक आता है।

अगर किसी को चलते समय सांस फूलने लगे और छाती में भारीपन महसूस हो, तो उसे डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए.

हार्ट अटैक का दर्द छाती की बीच वाली हड्डी के आसपास होता है. यह दर्द जबड़े तक भी जा सकता है. यह दाएं और बाएं दोनों बाजुओं में भी महसूस हो सकता है.

पेट के निचले हिस्से में भी दर्द हो सकता है. कई बार लोग इसे केवल पेट दर्द समझकर नजऱअंदाज़ कर देते हैं. ऐसा नहीं करना चाहिए।

हार्ट अटैक से जुड़ी एक और बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि जब किसी को हार्ट अटैक आ रहा हो, तो जितनी जल्दी चिकित्सा सहायता ली जाए, उतनी जल्दी उसका इलाज किया जा सकता है.

कई बार कोई व्यक्ति बाहर से पूरी तरह फ़िट और तंदुरुस्त दिखाई देता है, लेकिन उसके भीतर दिल से जुड़ी गंभीर समस्याएं विकसित हो रही होती हैं। 

दिल को स्वस्थ रखने के लिए युवाओं को क्या करना चाहिए?
सबसे अधिक ज़रूरी है कि हर प्रतिदिनकसरत की जाए. काम की जगह पर भी कोशिश करें कि लिफ्ट की बजाय सीढय़िों का इस्तेमाल करें. साथ ही शारीरिक गतिविधियां करते रहेंद्ध 

प्रतिदिन 30 से 40 मिनट पैदल चलना बहुत ज़रूरी है. कोशिश करें कि 10 से 12 मिनट में एक किलोमीटर की दूरी तय की जाए।


खानपान का भी विशेष ध्यान रखें.
इसी के साथ ही सेहत पर ध्यान देना भी बहुत ही जरूरी है। फल और सब्जय़िां खाएं. अंडा खाना भी अच्छा है. ड्राई फ़्रूट्स को भी अपने आहार में शामिल करें. जो लोग मांसाहारी भोजन करते हैं, वे चिकन और मछली को रोस्ट करके खा सकते हैं.

मटन में वसा अधिक होती है. इसलिए हम इसे कम खाने की सलाह देते हैं. इस बीमारी में आनुवंशिकता की भी बड़ी भूमिका होती है। 

 

इसलिए अगर किसी का कोलेस्ट्रॉल अधिक हो, तो उसे दवाइयां भी लेनी चाहिए. हालांकि मैं यह नहीं कहता कि शुरुआत में ही दवाइयां खाना शुरू कर दें।

पहली कोशिश यही होनी चाहिए कि सही खानपान और कसरत से स्थिति में सुधार हो जाए. इसके अलावा सिगरेट और शराब की आदत छोड़ देनी चाहिए.

सिगरेट कई बीमारियों की जड़ है. इनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक और कैंसर शामिल हैं. नौजवानों को पैसिव स्मोकिंग का भी ध्यान रखना चाहिए।

इसका मतलब है कि आप ख़ुद सिगरेट नहीं पी रहे हैं, लेकिन आपके साथ मौजूद कोई व्यक्ति सिगरेट पी रहा है। उसका असर भी आपके शरीर पर लगभग उतना ही पड़ता है।